फर्जी बेटा बनकर सरकारी नौकरी की, 7 साल कैद:फर्जी दस्तावेजों से निःसंतान दंपती का बेटा बताया, अदालत ने लगाया 20 हजार रुपए जुर्माना
मिर्जापुर में निःसंतान दंपती का फर्जी पुत्र बनकर कूटरचित दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले आरोपी को अदालत ने 7 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पल्लवी सिंह की अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर उसे दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। संपत्ति हड़पने के लिए खुद को बताया था पुत्र मामला चुनार थाना क्षेत्र के सहसपुरा गांव का है। पुलिस के मुताबिक, 28 अप्रैल 2017 को गांव निवासी प्रेम शंकर पांडेय ने भगवती प्रसाद के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि गांव के एक निःसंतान दंपती की संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से आरोपी ने खुद को उनका पुत्र बताया और फर्जी दस्तावेज तैयार किए। दंपती के पति बाबतपुर हवाई अड्डे पर एयरोड्रम ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अधिशासी अभियंता, लिफ्ट सिंचाई निर्माण खंड वाराणसी को गुमराह किया और हेल्पर के पद पर नौकरी हासिल कर ली। गवाहों की गवाही के आधार पर सुनाया फैसला पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान गवाहों को पेश किया गया। मंगलवार को अदालत ने भगवती प्रसाद पुत्र देवनंदन निवासी शाहपुर, थाना बड़ागांव, वाराणसी को दोषी करार दिया। मामले में अभियोजन अधिकारी एपीओ जितेंद्र यादव, विवेचक उपनिरीक्षक अशोक कुमार यादव, कोर्ट मुहर्रिर मुख्य आरक्षी सोहराब अली, आरक्षी पंकज गौड़ और पैरोकार मुख्य आरक्षी साहेब सिंह यादव ने पैरवी की।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)