'टोपी पहनने की आदत नहीं, जरूरत होगी तो पहनेंगे':गोरखपुर में बोले संजयन; सपा सरकार बनी तो 4 महीने में बदलेगी शिक्षकों की तकदीर
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव में मतदान से पहले समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी ने अधिकारियों पर चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आजमगढ़, मऊ, बलिया, अंबेडकर नगर और कुशीनगर से शिकायतें मिली हैं कि शिक्षा विभाग के अधिकारी वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों पर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसा नहीं करने पर विद्यालयों के दस्तावेजों की जांच कराने की बात कही जा रही है। वहीं, चुनाव प्रचार के दौरान सपा की टोपी नहीं पहनने के सवाल पर डॉ. संजयन त्रिपाठी ने हल्के अंदाज में कहा कि टोपी पहनना मेरे लिए अनिवार्य नहीं है और मुझे इसकी आदत भी नहीं है। उन्होंने कहा, "अगर आवश्यक होगा तो बिल्कुल पहनेंगे। टोपी पहनने पर थोड़ा असहज महसूस होता है। उन्होंने कहा कि मैं अपनी शादी में भी मौर ज्यादा देर तक नहीं पहन पाया था।" मतदाता सूची जारी होने के बाद जांच पर उठाए सवाल डॉ. संजयन त्रिपाठी ने मतदान से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि मुझे आशंका है कि शासन-प्रशासन अधिकारियों पर दबाव बनाकर चुनाव को प्रभावित करने और निष्पक्ष मतदान में व्यवधान डालने का प्रयास कर सकता है। उन्होंने कहा, "पिछले तीन-चार दिनों में आजमगढ़, मऊ, बलिया, अंबेडकर नगर और थोड़ी-बहुत शिकायत कुशीनगर से भी आई है। वहां के शिक्षा विभाग के अधिकारी, विशेष रूप से जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी, वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को फोन करके भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने का दबाव बना रहे हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रबंधन से कहा जा रहा है कि यदि वे भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं करते हैं, तो उन्हें अगले दिन अपने सभी कागजात लेकर उपस्थित होना होगा और जांच की जाएगी। डॉ. त्रिपाठी ने सवाल उठाया, "यह बहुत गंभीर विषय है। जब एक बार मतदाता सूची का प्रकाशन हो गया, तो उसके बाद इस तरह की जांच का क्या औचित्य है। वही अधिकारी रहे होंगे, जिन्होंने मतदाता सूची में नाम स्वीकृत किया होगा। विद्यालयों के अटेंडेंस रजिस्टर, वेतन पंजिका और दूसरे दस्तावेजों की जांच के बाद ही मतदाता सूची में नाम शामिल किए गए होंगे।" उन्होंने आगे कहा, "जब मतदाता सूची प्रकाशित हो गई, तब इस तरह नोटिस भेजकर जांच कराने का क्या औचित्य है? यह सीधे-सीधे प्रशासनिक दबाव बनाकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है, ताकि हमारे प्रधानाचार्य और प्रबंधक मतदान के लिए न जा सकें।" ये आरोप सपा प्रत्याशी ने लगाए हैं। प्रेस वार्ता में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया। बोले- भाजपा में 6 साल रहा, कार्यक्रमों में निमंत्रण तक नहीं मिलता था भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद अपने राजनीतिक कद में बदलाव से जुड़े सवाल पर डॉ. संजयन त्रिपाठी ने कहा कि सपा में मुझे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से मेरा कद बढ़ा है। यहां मैं सीधे अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुखातिब हूं। राष्ट्रीय अध्यक्ष सीधे मुझसे बात करते हैं और मैं अपनी बात उन तक पहुंचा पाता हूं। पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के बड़े पदाधिकारियों से भी अपनी बात कह पा रहा हूं।" उन्होंने भाजपा में अपने अनुभव को लेकर कहा, "वहां जिले और महानगर स्तर के लोगों से भी अपनी बात कह पाना बड़ा कठिन होता था। छह साल तक मैं पार्टी में रहा, लेकिन किसी कार्यक्रम में मुझे निमंत्रण नहीं दिया जाता था।" डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि समाजवादी पार्टी में आए उन्हें अभी 15-20 दिन ही हुए हैं, लेकिन पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चुनाव को अपने चुनाव की तरह लिया है। उन्होंने कहा, "ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जैसे संजयन त्रिपाठी नहीं, बल्कि पूरी पार्टी चुनाव लड़ रही है। यही पार्टी का नियम और कार्यकर्ताओं का संकल्प होता है।" 'टोपी पहनना अनिवार्य नहीं, आदत नहीं है' चुनाव प्रचार के दौरान सपा का गमछा और टोपी नहीं पहनने को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. संजयन त्रिपाठी ने हल्के अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, "पार्टी का गमछा या टोपी लगाना अनिवार्य है, यह मुझे अभी तक किसी ने नहीं बताया। अगर आवश्यक होगा तो बिल्कुल पहनेंगे। इसमें ऐसी कोई बात नहीं है। गमछा मैं लगाता हूं, उसे लगाने में कोई दिक्कत नहीं है।" टोपी नहीं पहनने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, "टोपी इसलिए नहीं लगाता हूं, क्योंकि उसे पहनने का अभ्यास नहीं है। थोड़ा असहज महसूस होता है। अपनी शादी में भी जो मौर पहना जाता है, उसे भी मैं बहुत देर तक नहीं पहन पाया था।" पुरानी पेंशन और मानदेय को लेकर शिक्षकों से की अपील डॉ. संजयन त्रिपाठी ने शिक्षक मतदाताओं से पुरानी पेंशन योजना (OPS), सेवा सुरक्षा और वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय समेत लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर समर्थन मांगा। उन्होंने कहा, "शिक्षक साथियों से हाथ जोड़कर हमारी बड़ी विनम्र अपील है कि उन्हें एक सुनहरा अवसर मिला है। पिछले दो दशक से उनकी जो प्रमुख मांगें लंबित हैं, उनके निस्तारण का समय आ गया है।" उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन की बहाली, सेवा सुरक्षा की शर्तों की बहाली और वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय दिलाना प्रमुख मुद्दे हैं। इसके अलावा मदरसा शिक्षकों के बंद अनुदान और समाप्त छात्रवृत्ति की बहाली, स्थानांतरण नीति में बदलाव और उसका सरलीकरण तथा संस्कृत शिक्षकों के वर्ष 2022 से लंबित विनियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना भी जरूरी है। डॉ. त्रिपाठी ने कहा, "ये सभी प्रमुख मुद्दे हैं, जिनके समाधान का वक्त आ गया है। आप 27 अक्टूबर को मुझे चुनाव जिताकर भेजेंगे और ठीक दो से ढाई महीने बाद विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाएंगे और अखिलेश यादव जी को मुख्यमंत्री बनाएंगे, तो चार महीने के अंदर आपकी तकदीर बदलने जा रही है।" उन्होंने दावा किया कि सपा की सरकार बनने पर शिक्षकों की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। 'एमएलसी बनने के बाद भी अकेले पेंशन बहाल नहीं करा सकते' डॉ. संजयन त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों को चुनाव के दौरान भ्रमित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, पुरानी पेंशन बहाल करने और वित्तविहीन शिक्षकों के लिए मानदेय तय करने का फैसला सरकार के स्तर पर ही हो सकता है। उन्होंने कहा, "ऐसे लोग हैं, जो इस चुनाव में भ्रम पैदा कर रहे हैं। वे खुद जानते हैं कि एमएलसी बनने के बाद भी वे पुरानी पेंशन बहाल नहीं करा सकते, क्योंकि यह काम सरकार ही कर सकती है। व्यक्तिगत क्षमता में कोई भी व्यक्ति न तो पुरानी पेंशन बहाल करा पाएगा और न ही वित्तविहीन शिक्षकों के लिए मानदेय दिला पाएगा।" उन्होंने दावा किया कि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों ने सपा प्रत्याशी के समर्थन में मन बना लिया है। साथ ही उन्होंने वित्तपोषित विद्यालयों में वर्ष 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों से भी समर्थन देने की अपील की। सरकार बनते ही शिक्षकों का सम्मान करेंगे उन्होंने कहा कि शिक्षक पुरानी पेंशन, मानदेय, सेवा सुरक्षा और दूसरी लंबित मांगों को ध्यान में रखकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें। उन्होंने दावा किया कि इन मांगों को पूरा करने के लिए सपा की सरकार बनने पर चार महीने के भीतर बदलाव देखने को मिलेगा।
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