यूपी के 40 ब्लड बैंकों में छापेमारी:बिना जांच मरीजों को दे रहे थे ब्लड, 7 का लाइसेंस होगा सस्पेंड; दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद एक्शन

Oct 29, 2026 - 14:35
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यूपी के 40 ब्लड बैंकों में छापेमारी:बिना जांच मरीजों को दे रहे थे ब्लड, 7 का लाइसेंस होगा सस्पेंड; दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद एक्शन
यूपी में पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए स्टूडेंट्स को खून बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके पीछे एक बड़ा नेक्सस काम कर रहा है। दैनिक भास्कर के इस स्टिंग ऑपरेशन का बड़ा असर हुआ है। खबर पब्लिश होने के 48 घंटे बाद ही यूपी के ब्लड बैंकों में ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू हुई। प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक जांच चल रही है। लखनऊ के तीन, आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर और लखीमपुर खीरी के एक-एक ब्लड बैंकों पर कार्रवाई की गई है। यहां बिना जांच के ही मरीजों को ब्लड दिया जा रहा था, जिससे गंभीर इंफेक्शन का खतरा हो सकता है। इसके अलावा, कोल्ड चेन में लापरवाही और तकनीकी स्टाफ की कमी के साथ कई गड़बड़ियां पाई गई हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने 40 चैरिटेबल ब्लड बैंकों पर भी रेड मारी है, जिनमें से 7 के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिए गए हैं। 26 अक्टूबर को दैनिक भास्कर एप पर एक एक्सक्लूसिव इन्वेस्टिगेशन पब्लिश हुई थी। इसका शीर्षक था- ‘पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए छात्र अपना खून बेच रहे हैं, यूपी में नीट का छात्र बोला- खून तो बनता रहेगा, पढ़ाई का मौका फिर नहीं मिलेगा’। इस रिपोर्ट में हमने एक ऐसे गिरोह और नेक्सस को एक्सपोज किया था, जो मजबूरी का फायदा उठाकर युवा छात्रों, खासकर कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रहे स्टूडेंट से एक ही महीने में कई-कई बार ब्लड निकलवा रहा था। खबर सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में बवाल मच गया। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव, सपा सांसद डिंपल यादव, यूट्यूबर नेहा सिंह राठौर और नेशनल कांग्रेस समेत कई नेताओं व संस्थाओं ने भास्कर की खबर का हवाला देते हुए सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया। चौतरफा दबाव बनते ही प्रशासन हरकत में आया। FSDA कमिश्नर के निर्देश पर 10 जिलों में एक साथ छापेमारी खबर का असर ये हुआ कि FSDA (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) की कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब के सीधे आदेश पर ड्रग इंस्पेक्टरों की एक स्पेशल अंतरजनपदीय टीम गठित की गई। इस टीम ने प्रदेश के 10 प्रमुख जिलों में मौजूद चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसाइटियों द्वारा चलाए जा रहे 40 ब्लड बैंकों पर एक साथ रेड मारी। कहां-कहां हुई कितनी जांच- लखनऊ: 13 ब्लड बैंक आगरा: 5 ब्लड बैंक कानपुर: 5 ब्लड बैंक मुजफ्फरनगर: 4 ब्लड बैंक बिजनौर: 4 ब्लड बैंक अलीगढ़: 3 ब्लड बैंक गाजियाबाद: 2 ब्लड बैंक वाराणसी: 2 ब्लड बैंक गोरखपुर: 1 ब्लड बैंक प्रयागराज: 1 ब्लड बैंक बिना जांच ही बांटा जा रहा था खून; जान से खिलवाड़ का खेल छापेमारी के दौरान जो कमियां और सच निकलकर सामने आया, वो किसी का भी कलेजा कंपा देने वाला है। कई ब्लड बैंक ऐसे मिले, जो बिना किसी जरूरी जांच के मरीजों को सीधे खून सप्लाई कर रहे थे। नियमों के मुताबिक, मरीजों की सुरक्षा के लिए ब्लड डोनेशन के बाद उसमें एड्स, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, सिफलिस और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों की अनिवार्य जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही ब्लड को एक निश्चित टेंपरेचर पर रखना बेहद जरूरी होता है। लेकिन रेड में पाया गया कि कई जगह न तो टेस्ट की मशीनें काम कर रही थीं, न कोल्ड चेन का अता-पता था। इन 7 ब्लड बैंकों के संचालन पर तत्काल रोक गंभीर धांधली और जानलेवा लापरवाही पकड़े जाने पर FSDA ने 7 प्रमुख ब्लड बैंकों के कामकाज पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है- 1. लिटल स्टार ब्लड सेंटर, लखनऊ: यहां के प्रभारी डॉक्टर और टेक्निकल स्टाफ लंबे समय से गायब मिले। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि एलिसा टेस्ट मशीन खराब पड़ी थी, फिर भी बिना जांच के ही ब्लड और उसके कंपोनेंट्स बेचे जा रहे थे। फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा में रेड ब्लड सेल्स के टुकड़े पाए गए, जो बेहद खतरनाक है। 2. रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर, लखनऊ: बिना एलिसा टेस्ट के खून जारी किया जा रहा था। FFP को गलत तरीके से प्लेटलेट एजिटेटर में रखा गया था। इसके अलावा मरीजों के परिजनों से सरकार द्वारा तय रेट से ज्यादा पैसा वसूला जा रहा था। 3. केएचएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर, लखनऊ: मौके पर न डॉक्टर मिले, न ही कोई टेक्निकल बंदा। मास्टर रजिस्टर और एलिसा/TTI टेस्ट का कोई अता-पता नहीं था। इतना ही नहीं, पूरे सेंटर में भारी गंदगी फैली हुई थी। 4. श्री बालाजी चैरिटेबल ब्लड सेंटर, आगरा: यहां न तो अनिवार्य ELISA जांच हो रही थी और न स्टेरिलिटी टेस्ट। खून देने वालों का नाम, पता, मोबाइल नंबर या दस्तखत तक दर्ज नहीं किए गए थे। टेंपरेचर का स्टॉक रिकॉर्ड भी पूरी तरह गायब था। 5. न्यू बापू रक्त सेंटर, अलीगढ़: संक्रमण जांच (TTI) और CPDA सॉल्यूशन में भारी गड़बड़ी पाई गई। यहां भी एलिसा टेस्ट नहीं किया जा रहा था। क्वालिफाइड स्टाफ और जरूरी कागजात का कोई अता-पता नहीं मिला। 6. मानया चैरिटेबल ब्लड सेंटर, गोरखपुर: जांच टीम जब पहुंची तो न तो इंचार्ज डॉक्टर मिले और न कोई टेक्निकल कर्मचारी। कागजी रखरखाव पूरी तरह अधूरा पाया गया। 7. अनुभव चैरिटेबल ब्लड सेंटर, लखीमपुर खीरी: बायोमेडिकल वेस्ट (खतरनाक कचरे) के निपटारे का रजिस्ट्रेशन तक नहीं था। टेंपरेचर मॉनिटरिंग और अलार्म सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ा था। सभी DM को भेजी गई एडवाइजरी FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने साफ कर दिया है कि जिन 7 ब्लड बैंकों पर रोक लगाई गई है, वहां जमा पड़े ब्लड और ब्लड कंपोनेंट्स का सुरक्षित निस्तारण कराया जाएगा। इसके लिए सभी संबंधित जिलाधिकारियों को सख्त एडवाइजरी जारी कर दी गई है, ताकि वह असुरक्षित खून बाजार में या किसी मरीज तक न पहुंच सके। बाकी के जिन ब्लड बैंकों में छोटी-मोटी कमियां पाई गई हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस थमाया जा रहा है। शासन ने साफ किया है कि प्रदेश में मरीजों की सेहत और खून की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। दैनिक भास्कर आगे भी ऐसे ही मुद्दों को बेबाकी से उठाता रहेगा। -------------- ये भी पढ़ें- पढ़ाई-खर्च के लिए छात्र अपना खून बेच रहे:यूपी में नीट का छात्र बोला- खून तो बनता रहेगा; पढ़ाई का मौका फिर नहीं मिलेगा पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए छात्रों को अपना खून बेचना पड़ रहा है। गरीब परिवारों के इन बच्चों को नीट-एसएससी की महंगी कोचिंग, हॉस्टल-मेस की फीस भरनी होती है। पैसे जुटाने के लिए कोई छात्र महीने में 2 बार, तो कोई 4 बार अपना खून निकालकर बेचने को मजबूर है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

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