यूपी में रेप-छेड़खानी के झूठे मुकदमे दर्ज कराने का बिजनेस:महिला बोली- आप तो पैसे खर्च करो, जिंदगी बर्बाद करने का काम मेरा

Oct 31, 2026 - 05:09
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यूपी में रेप-छेड़खानी के झूठे मुकदमे दर्ज कराने का बिजनेस:महिला बोली- आप तो पैसे खर्च करो, जिंदगी बर्बाद करने का काम मेरा
‘पुलिस और अदालतों में आने वाले रेप के अधिकतर मामले फर्जी होते हैं।’ ‘झूठे रेप के मुकदमे दर्ज कराने वाले के खिलाफ FIR होनी चाहिए। FIR में विवेचना होती है, पैसा और समय की बर्बादी होती है।‘ ये सख्त कमेंट इलाहाबाद हाईकोर्ट के हैं, जो रेप-छेड़खानी के झूठे मुकदमों पर किए गए। यूपी के अलग-अलग इलाकों में कुछ महिलाएं यह काम बिजनेस की तरह करने लगी हैं। सवाल है कि कोर्ट तक रेप-छेड़खानी के इतने झूठे मुकदमे पहुंच क्यों रहे हैं और पुलिस इन्हें रोक क्यों नहीं पा रहीं? ऐसा करने वाली महिलाएं कौन हैं? दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव टीम यूपी में चल रहे रेप-छेड़खानी के झूठे केस में फंसाने वाले नेक्सस तक पहुंची। सामने आया कि कई महिलाओं ने इसको पैसा कमाने का जरिया बना लिया है। कुशीनगर की एक महिला स्टिंग के दौरान दैनिक भास्कर रिपोर्टर से रुपए लेकर किसी को भी झूठे केस में फंसा देने का दावा करती है। हम ऐसे लोगों तक भी पहुंचे, जिनके खिलाफ महिला ने झूठे केस दर्ज कराए थे। उनसे जमीन और लाखों रुपए वसूलने के बाद इन महिलाओं ने समझौते कर लिए। इन्वेस्टिगेशन में पहले वह महिला, जिसे हमने कैमरे में रंगे-हाथों कैद किया इनपुट मिला कि कुशीनगर की 45 साल की जरीना खातून ने कई लोगों पर FIR कराई हैं। वह नाबालिग लड़कियों की मदद से पॉक्सो का केस भी दर्ज कराती है। हम कुशीनगर के रामकोला उरधहां गांव में जरीना से मिले। महिला से हिडन कैमरे पर बात की- रिपोर्टर - एक आदमी बहुत परेशान कर रहा है…फर्जी केस कराना था? जरीना - त्योहार का सीजन है, लड़कियां घर परिवार में व्यस्त हैं…खाली होंगी तो करा देंगे। रिपोर्टर - कब तक इंतजार करना पड़ेगा, हमें थोड़ी जल्दी है… जरीना - लड़की मिलते ही काम हो जाएगा। (मोबाइल में फोटो दिखाते हुए) देखिए…ये चंद्रभान सिंह हैं, रामकोला थाना के एसओ थे। अब ट्रांसफर हो गया, लेकिन कोई दिक्कत नहीं। नए वाले एसओ से भी मेरा अच्छा रिलेशन है। आपका केस तो उनसे भी लिखा देंगे। रिपोर्टर - हम हरियाणा से आए हैं, लड़का बहुत परेशान है… जरीना - जो जहां का होता है, वहां उसी का पावर होता है। आप लोग यहां कुछ नहीं कर पाएंगे। यहां मेरी चलती है…हम सब करा देंगे। (मोबाइल में फोटो दिखाते हुए) देखिए…आज ही एक लड़की का मामला आया था। हम ही थाने पर उसकी मदद कराए हैं। रामकोला थाने का सारा काम हम ही देखते हैं। रिपोर्टर - आप पुलिस में काम करती हैं क्या… कितना पैसा देना होगा? जरीना - हम थाना के चौकीदार हैं…पुलिस से ज्यादा हम लोगों की मदद करते हैं। लड़की और पुलिस वाले आपस में बात करने के बाद बताएंगे रिपोर्टर - किसी ने हम लोगों को बताया था कि मैडम बहुत मददगार हैं। इस मामले में वह चाहेंगी तो मुकदमा लिख जाएगा। जरीना - पुलिस मेरे पीछे रहती है, हम कुछ भी करें, पुलिस हमसे कुछ नहीं पूछेगी। रिपोर्टर - देखिए, मेरे साथ जो लड़का आया है, उसके पट्टीदार पति-पत्नी को फर्जी केस में फंसाना चाहते हैं। पत्नी सरकारी नौकरी करती है, पट्‌टीदार चाहते हैं, दोनों जेल चले जाएं, पूरी प्रॉपर्टी पट्टीदार लें। जरीना - हो जाएगा…परेशान मत होइए (एक फर्जी मुकदमे की कॉपी दिखाते हुए) देखो, धारा पढ़ो…यह केस हमने ही दर्ज कराया है। हम लोगों के पास बहुत सारे ऑप्शन हैं। दरोगा को बोल दूंगी तो वह मुकदमा लिख देगा। रिपोर्टर - इस लड़के के लिए भी रेप का ही मुकदमा लिखवाएंगी आप… कुछ ऐसा हो, जिसमें बड़ी धाराएं लगें। जरीना - हां, इसमें तो उसका घर बिक जाएगा और सजा भी हो जाएगी। रेप के प्रयास की भी धारा लग गई तो कोई बचा नहीं पाएगा। रिपोर्टर - इसकी पत्नी लिखवा देती, लेकिन वह सरकारी नौकरी करती है, इसलिए इसमें पड़ना नहीं चाहती। जरीना - टेंशन नहीं लो, हम करवा देंगे। इस समय 4 मुकदमे कराए हुए हैं। सब परेशान हैं, मैनेज करने के लिए… रिपोर्टर - आप खुद नहीं करा देंगी? जरीना - नहीं, हम नहीं कराएंगे, नौकरी में हैं तो दिक्कत होगी, मैंने पहले से ही कई केस करा रखे हैं। रिपोर्टर - लड़की तो बाहरी रहेगी, मुकदमा लिखवाकर मुकर गई तो उल्टा हम लोग ही फंस जाएंगे जरीना - नहीं…नहीं ये नहीं होगा, इसी का तो पैसा लेती है। मुकदमा लिखवाने के बाद उसका मजिस्ट्रेट के पास बयान करा देंगे। एक बार जब बयान दे देगी तो फिर वह मुकर नहीं सकती। मुकर गई तो वह खुद फंसेगी। रिपोर्टर - अगर दूसरी पार्टी थाने पर पैसा खर्च कर देगी तो फिर क्या होगा? जरीना - कितना भी पैसा खर्च कर दे, कुछ नहीं होगा। सुलह तो होगी ही बाद में…। (एक केस की कॉपी दिखाते हुए) देखिए, यह केस पॉक्सो एक्ट का केस हमने ही कराया है। इसमें जमानत भी नहीं होती है। बयान दे देंगे तो सजा हो जाएगी। रिपोर्टर - लड़की बालिग होगी या नाबालिग… जरीना - नाबालिग लड़की से केस कराएंगे, पैसा उस समय क्लियर हो जाएगा। मैंने पति और उसके दोस्त को भी नहीं छोड़ा है, वह भी केस में बर्बाद हो गए हैं। रिपोर्टर - नाबालिग लड़की नहीं मिली तो क्या होगा? जरीना - किसी शादीशुदा महिला से करा देंगे। दरोगा को कॉल लगाया, बोली- एक मुकदमा करवाना है… जरीना ने हमें यकीन दिलाने के लिए थाने के एक दरोगा को कॉल लगाया। मोबाइल स्क्रीन पर नायब दरोगा लिखकर आया। कॉल उठने पर कहा- नमस्ते सर…क्या हो रहा है? आप थाने पर हैं या क्वार्टर पर…। एक काम था आपसे…मुकदमा लिखवाना है। अच्छा ठीक है…फिर सुबह 10 बजे थाने पर ही आएंगे। वो खर्चा भी देगा, बाकी आगे भी पैसा मिलता रहेगा…। रिपोर्टर - देखिए, यह लड़का डर की वजह से घर नहीं जा रहा है। वहां पट्टीदार मारपीट कर रहे हैं। जरीना - कमजोर नस पकड़ ली होगी। मारपीट करें तो मेरे पास आए। तुम इस लड़के के खाते में पैसा डाल दो अभी…जो लगेगा इसके केस में वह मैं लगा दूंगी। कुशीनगर, देवरिया कहीं भी हो जाएगा। रिपोर्टर - कल शाम तक या परसों सुबह इसके खाते में पैसा भिजवा देंगे, लड़की वाला इंतजाम कैसे होगा...जो मुकदमा लिखवाएगी। जरीना - लड़की ऐसे तत्काल नहीं मिलती, कोई करीबी लड़की से कराया जाता है। मेरे पास कलेजा है, डीएम, कप्तान, एसपी किसी से बात कर लेंगे। हमने दरोगा से बोल दिया है। केस इसका सरकार बनाम कराएंगे। आपको नहीं लड़ना पड़ेगा। पुलिस खुद लड़ेगी। पैसे के लालच में केस कराने के लिए खुद तैयार हुई एजेंट जरीना - लेकिन, पैसा तो आप इस लड़के (गिरोह का सदस्य) के खाते में देंगे। हां, जो भी पैसा इसको दीजिएगा, हमसे जरूर पूछिएगा कि कहां कितना खर्च हुआ है। रिपोर्टर - अब कितना पैसा डाल दें, इसके खाते में… जरीना - एक लाख रुपए तो कम से कम डाल ही दीजिए। केस होने के बाद देखना, वो सब खुद तुमको फोन करके बुलाएंगे कि आओ और सुलह करो। तुम्हारे पैर पर गिरने के लिए सब तैयार हो जाएंगे। पुलिस की कलम में बहुत ताकत होती है। रिपोर्टर - आपका आदमी तो 3 लाख रुपया मांग रहा है। जरीना - तीन लाख रुपया नहीं, पहले कुछ दे दीजिए। बाकी बाद में जितना जरूरत पड़ेगी…मांग लेंगे आपसे। मुकदमा दर्ज होने पर कॉपी आपको वॉट्सऐप पर भेज देंगे। जरीना भास्कर के कैमरे पर थाने से मिलीभगत होने का खुलासा करती रही। उसको एक लाख रुपए देने का वादा करके हम उसके घर से बाहर निकल आए। जरीना बातचीत में जिन लोगों पर केस दर्ज कराने का जिक्र कर रही थी, हमने उन्हें खोजा। सामने आया कि कई लोगों के खिलाफ उसने पहले थाने में आवेदन देकर दबाव बनाया, फिर रुपए-जमीन पर समझौता करके केस वापस ले लिया। ये खेल वो कई साल से कर रही है। पीड़ित 1. रामजीत खरवार विवाद जमीन का, छेड़खानी में जेल भिजवाया रामकोला के 80 साल के रामजीत खरवार और मुर्तजा में जमीनी विवाद था। कई बार दोनों के बीच मारपीट हुई। जब मुर्तजा पूरी कोशिश करके हार गया तो जरीना खातून को आगे कर दिया। जरीना खातून ने छेड़खानी का केस करवा दिया। रामकोला थाने में छेड़खानी का मुकदमा दर्ज होते ही रामजीत एक महीने तक जेल में रहा। अब वह सुलह समझौते के लिए परेशान है। मोटी रकम की डिमांड हो रही है। पीड़ित 2. अंगद जरीना के लड़के को चोरी करते पकड़ा तो एफआईआर लिखवा दी अंगद ने बताया कि मैं एक परचून की दुकान चलाता हूं। एक दिन जरीना के लड़के ने मेरी दुकान से चोरी की। इसको लेकर झगड़ा हुआ। नाराज होकर जरीना ने मेरे खिलाफ रेप के प्रयास की एफआईआर दर्ज करवा दी। मैं उससे मिलने गया तो उसने मुझसे पैसों की डिमांड की। पीड़ित 3. रणजीत गोविंद राव ‘रास्ता नहीं दिया तो रेप का झूठा केस करा दिया’ कुशीनगर रामकोला के चकावट में जमीन को लेकर रणजीत गोविंद राव और जरीना खातून का विवाद हुआ। जरीना के घर के आगे रणजीत की जमीन है। इसके पीछे जरीना का घर बना हुआ है। जरीना इसी जमीन से अपना रास्ता मांग रही थी। इसको लेकर मारपीट हुई। जरीना ने रामकोला थाना में रणजीत गोविंद राव पर छेड़खानी और रेप की कोशिश का केस करा दिया। रणजीत और गोविंद राव मानसिक प्रताड़ित होने लगे। दबाव में आकर रास्ता दे दिया, समझौता करने के लिए उन्होंने रुपए भी दिए। थाने का चौकीदार नहीं, पुलिस की मुखबिर है जरीना स्टिंग में जरीना का दावा था कि वो थाने की चौकीदार है। हमने थाने पर छानबीन की। सामने आया कि जरीना जिस इलाके उरदहां मस्जिद टोला की रहने वाली है, वहां पहले एक इदरीश नाम का व्यक्ति चौकीदार था। सात साल पहले ही इदरीश की मौत हो गई। जरीना खुद को थाने का चौकीदार बनने के जुगाड़ में लगी रही, फिर वो पुलिस को इलाके की हर एक सूचना देने लगी। इस तरह वह पुलिस मुखबिर की तरह काम करने लगी। अब आगरा की शालिनी..11 लोगों को झूठे मामलों में फंसाया… आगरा की एक 26 साल की शालिनी (बदला हुआ नाम) ने 3 लोगों पर रेप-छेड़खानी के मुकदमे दर्ज कराए। शाहजहांपुर, एटा और आगरा के जिन लोगों पर FIR कराई गई थी, उन्होंने खुद लड़की के खिलाफ छानबीन की तो उसके 11 लड़कों से रिलेशन सामने आए। अलग-अलग जिलों में इन लड़कों के खिलाफ भी रेप-छेड़खानी की शिकायत की गई थी, मगर ज्यादातर में समझौता हुआ। चौंकाने वाले फैक्ट सामने आने के बाद इन लोगों ने लड़की के खिलाफ पुलिस काे सबूत दिए। पुलिस ने लड़की को जेल भेजा, लेकिन वह जमानत पर बाहर आ गई। हम शालिनी के सताए हुए युवाओं तक पहुंचे- शाहजहांपुर के पवन (बदला हुआ नाम) एटा में किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रहा था। ऊपर की मंजिल पर रहने वाली शालिनी ने एक दिन उसे अपने कमरे में बुलाया, कहा कि मेरे मोबाइल में नेट कनेक्ट नहीं हो रहा है। पवन के जाने पर उसको अपना मोबाइल नंबर दिया। फिर दोनों की बातचीत होने लगी। शालिनी ने एक दिन अचानक 50 हजार रुपए मांगे, मना करने पर धमकी दी कि तुम्हें रेप केस में फंसा दूंगी। पवन ने घबराकर 10 हजार रुपए ट्रांसफर किए। फिर शालिनी ने 1 लाख रुपए मांगे। नहीं देने पर पवन के खिलाफ सिकंदराबाद थाने में FIR करवा दी। शालिनी ने वीडियो कॉल पर 2 लाख रुपए देकर केस खत्म कराने का प्रपोजल दिया। पवन पुलिस तक गया, खुद छानबीन की, सामने आया कि शालिनी ने 10 और के खिलाफ इसी तरह के केस दर्ज कराए हैं। पुलिस एक्शन- पुलिस ने शालिनी के खिलाफ एफआईआर लिखी और जेल भेजा। फिलहाल शालिनी जमानत पर बाहर है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में 3 बातें साफ हो गईं- ये स्थितियां कोर्ट के सामने आ चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को संशोधन करने का सुझाव दिया- ये महिलाएं इतनी आसानी से फर्जी FIR कैसे दर्ज करवा पाती हैं? ये हमने लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक सिंह से समझा। वह कहते हैं- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 166A कहती है कि अगर कोई पुलिस अधिकारी महिलाओं से जुड़े यौन अपराधों जैसे बलात्कार, छेड़खानी की सूचना मिलने पर FIR दर्ज करने से इनकार करता है, तो उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला बनता है। इसमें अधिकारी को 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सख्त कैद और जुर्माना हो सकता है। कुछ ऐसे मामले पढ़िए, जिन्हें अदालत ने फर्जी माना- ये इन्वेस्टिगेशन भी पढ़ें - सील अस्पताल खोलने के लिए डॉक्टर ने मांगे 3 लाख:मालिक बनकर CMO ऑफिस पहुंचा रिपोर्टर; यूपी में खुफिया कैमरे में डील गलत इलाज से मरीज की मौत हो जाती है… अस्पताल में रेप और मर्डर भी हो जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इनको सील कर देते हैं। लेकिन, कुछ दिनों बाद पैसे लेकर ये ‘दागदार’ अस्पताल नए नाम से फिर शुरू हो जाते हैं। ऐसा करके स्वास्थ्य विभाग के अफसर मरीजों की जिंदगी का सौदा कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने इस खेल को एक्सपोज करने के लिए उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और उन्नाव में इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए पूरी खबर…

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