ट्रंप की वीटो वाली लाल टोपी से अमेरिका में सियासी हलचल...

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने वीटो अधिकार इस्तेमाल करने की चेतावनी दी। जानिए लाल टोपी के पीछे का राजनीतिक संदेश और राष्ट्रपति की संवैधानिक ताकत।

Nov 06, 2026 - 10:21
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ट्रंप की वीटो वाली लाल टोपी से अमेरिका में सियासी हलचल...

दि राइजिंग न्यूज़ | अमेरिका | 6 नवंबर 2026

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। चुनावी झटके के बीच ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल कार्यालय में अपने सामने रखी मेज पर एक बड़ी लाल टोपी रखी, जिस पर वीटो लिखा हुआ था। इस टोपी के जरिए उन्होंने साफ संकेत दिया कि विपक्ष के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के बावजूद वह अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे।

ट्रंप ने लाल टोपी से दिया राजनीतिक संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद लाल टोपी के जरिए अपनी राजनीतिक मंशा जाहिर की। पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब वह एक सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर रहे थे, उसी समय उनके सामने रखी मेज पर वीटो लिखी लाल टोपी दिखाई दी। इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर भी इसी तरह की टोपी की तस्वीर साझा की थी।इस टोपी को विपक्ष के लिए एक राजनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, चुनाव में जीत के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी की विधायी ताकत बढ़ गई है। ऐसे में ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि विपक्ष उनकी नीतियों के खिलाफ कोई प्रस्ताव लाता है, तो वह राष्ट्रपति के विशेष अधिकार का इस्तेमाल करके उसे रोक सकते हैं।

क्या होता है राष्ट्रपति का वीटो अधिकार

अमेरिका के संविधान में राष्ट्रपति को संसद द्वारा पारित विधेयकों पर वीटो लगाने का अधिकार दिया गया है। इसका मतलब है कि यदि राष्ट्रपति किसी विधेयक से सहमत नहीं हैं, तो वह उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए उसे आपत्तियों के साथ संसद में वापस भेज सकते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए राष्ट्रपति संसद के फैसले पर अपनी असहमति जाहिर कर सकते हैं।हालांकि, राष्ट्रपति का वीटो अंतिम फैसला नहीं होता। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी प्रतिनिधि सभा और सीनेट में यदि किसी विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से दोबारा पारित कर दिया जाता है, तो राष्ट्रपति के वीटो को निष्प्रभावी किया जा सकता है। इस तरह यह अधिकार राष्ट्रपति को विपक्ष के फैसलों को चुनौती देने की ताकत देता है, लेकिन संसद के पास भी इसका संवैधानिक जवाब मौजूद है।

ट्रंप बोले- बेतुका फैसला किया तो लगा दूंगा वीटो

डोनाल्ड ट्रंप ने समाचार चैनल फॉक्स न्यूज से बातचीत में वीटो अधिकार को राष्ट्रपति के सबसे शक्तिशाली संवैधानिक अधिकारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि पहले भी कई बार इस अधिकार का इस्तेमाल किया जा चुका है और जरूरत पड़ने पर वह भी ऐसा करेंगे। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि डेमोक्रेट्स कोई बेतुका फैसला करेंगे, तो वह उस पर वीटो लगा देंगे।ट्रंप के इस बयान से साफ है कि मध्यावधि चुनाव में हार के बावजूद वह विपक्ष के सामने झुकने के मूड में नहीं हैं। उनकी लाल टोपी और बयान को आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति में संभावित टकराव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

डेमोक्रेट्स की जीत से बदलेगा अमेरिका का राजनीतिक समीकरण

मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने अमेरिका में राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में नियंत्रण हासिल कर लिया है। इससे ट्रंप प्रशासन पर विपक्ष की निगरानी बढ़ने की संभावना है। डेमोक्रेट्स अब सरकारी फैसलों की जांच, संसदीय सुनवाई और अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाने जैसे अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं।इसके अलावा ट्रंप प्रशासन के न्यायिक और मंत्रिमंडलीय नियुक्तियों से जुड़े फैसलों पर भी विपक्ष का प्रभाव बढ़ सकता है। इससे राष्ट्रपति के लिए अपनी नीतियों को बिना किसी राजनीतिक चुनौती के आगे बढ़ाना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है। आने वाले दिनों में संसद और राष्ट्रपति के बीच कई मुद्दों पर टकराव देखने को मिल सकता है।

रो खन्ना ने चुनावी नतीजों को बताया ट्रंप के खिलाफ जनादेश

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने चुनावी नतीजों को डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जनता का बड़ा जनादेश बताया है। उन्होंने दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बड़ी संख्या में सीटें हासिल कर सकती है। खन्ना के मुताबिक, पार्टी को वर्ष 2008 में बराक ओबामा की जीत के समय जैसी बड़ी सफलता मिल सकती है।रो खन्ना ने कहा कि मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंता बढ़ती महंगाई, रोजमर्रा की वस्तुओं का खर्च और जारी युद्ध है। उन्होंने बताया कि डेमोक्रेटिक पार्टी का ध्यान स्वास्थ्य सेवाओं, बच्चों की देखभाल और जरूरी वस्तुओं की कीमतों को कम करने पर रहेगा। उनके मुताबिक, चुनावी नतीजे जनता की बदलती प्राथमिकताओं और ट्रंप प्रशासन के प्रति नाराजगी को दर्शाते हैं।

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