ट्रंप की हार से भारत मालामाल? शेयर बाजार में आया उछाल!

अमेरिका में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मध्यावधि चुनाव में झटका लगने के बाद भारतीय शेयर बाजार में करीब 2 प्रतिशत की तेजी आई। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को आयात खर्च, रुपये और महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद है।

Nov 05, 2026 - 16:17
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ट्रंप की हार से भारत मालामाल? शेयर बाजार में आया उछाल!

दि राइजिंग न्यूज़ | अमेरिका | 5 नवंबर 2026

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा, जहां 5 नवंबर को सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इस उछाल के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और ईरान युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीद को अहम कारण माना जा रहा है।

दरअसल, अमेरिकी चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने के बाद उनके प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है। ईरान के साथ जारी युद्ध, सैन्य खर्च और महंगाई जैसे मुद्दों पर विरोध तेज हो सकता है। अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति से ट्रंप प्रशासन के लिए युद्ध से जुड़े फैसले लेना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा, लेकिन निवेशकों को पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद जरूर दिखाई दे रही है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए क्यों अहम है

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88.7 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भारत का आयात खर्च बढ़ जाता है, जिससे रुपये पर दबाव और महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। वहीं, तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम हो सकता है और अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है। 4 नवंबर को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 8.7 प्रतिशत गिरकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। इसके बाद 5 नवंबर को भी इसमें गिरावट जारी रही।

क्या पेट्रोल-डीजल और महंगाई से मिलेगी राहत

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से पेट्रोल-डीजल सस्ता होने और महंगाई पर दबाव कम होने की संभावना बन सकती है। हालांकि, इसका फायदा आम लोगों तक तुरंत पहुंचना तय नहीं है। भारत में ईंधन की खुदरा कीमतें अंतरराष्ट्रीय तेल की दरों के साथ रुपये की विनिमय दर, परिवहन खर्च, कर और तेल कंपनियों की नीतियों पर भी निर्भर करती हैं। कुल मिलाकर, अमेरिकी चुनाव के नतीजों ने भारतीय बाजार को सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन भारत को वास्तविक आर्थिक फायदा तभी मिलेगा जब कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम बनी रहें और पश्चिम एशिया में तनाव घटे।

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