दिल्ली में खुलेआम पटाखों की बिक्री पर SC ने जताई चिंता

दिल्ली में खुलेआम पटाखों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने सरकार को तत्काल कार्रवाई करने और केवल निर्धारित मानकों वाले हरे पटाखों की बिक्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

Nov 03, 2026 - 12:56
Updated: 2 hours ago
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दिल्ली में खुलेआम पटाखों की बिक्री पर SC ने जताई चिंता

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 3 नवंबर 2026

दिल्ली में पटाखों की खुलेआम बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिबंध और दिशा-निर्देश जारी होने के बावजूद बाजारों में हर तरह के पटाखे आसानी से बेचे जा रहे हैं। अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार से इस मामले पर तत्काल ध्यान देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल लाइसेंस प्राप्त और निर्धारित मानकों वाले हरे पटाखों की ही बिक्री की अनुमति दी गई है, लेकिन बाजार में नियमों का उल्लंघन होने की खबरें सामने आ रही हैं।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि एक समाचार रिपोर्ट में तस्वीर के साथ दिखाया गया है कि अदालत के आदेश के बावजूद दुकानों पर सभी तरह के पटाखे उपलब्ध हैं। न्यायमूर्ति ने चिंता जताते हुए कहा कि बाजार में लाइसेंस वाले और बिना लाइसेंस वाले, क्यूआर संकेत वाले और बिना क्यूआर संकेत वाले सभी प्रकार के पटाखे बेचे जा रहे हैं। अदालत ने सरकार से इस स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में दीपावली के अवसर पर निर्धारित समय के दौरान केवल हरे पटाखे चलाने की अनुमति दी थी। अदालत के आदेश के अनुसार, 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकेंगे। इसके अलावा अस्पतालों, विद्यालयों, वृद्धाश्रमों और शांत क्षेत्र घोषित स्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर रोक रहेगी। वहीं, 9 नवंबर से पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पटाखों से वायु प्रदूषण होता है और प्रतिबंध के बावजूद पारंपरिक पटाखों की अवैध बिक्री जारी रहना चिंता का विषय है। अदालत के अनुसार, पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय निर्धारित मानकों के तहत हरे पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को नियंत्रित करना अधिक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाजारों में अवैध बिक्री रोकने और अदालत के आदेशों का सख्ती से पालन कराने की है।

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