ईरान को ट्रंप की धमकी: “बहादुर बनने वाले अब मारे जा चुके हैं”, इजरायल के हमलों के बाद परमाणु समझौते पर दबाव
दि राइजिंग न्यूज। नई दिल्ली। 13 जून, 2025 । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद तीखा बयान दिया है। इज़रायल द्वारा ईरान के नतांज परमाणु संयंत्र और तेहरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद ट्रंप ने X (पूर्व ट्विटर) पर कहा कि “कुछ लोग बहुत बहादुर बन रहे थे, वे अब मारे जा चुके हैं। और यह सिर्फ शुरुआत है।”
दि राइजिंग न्यूज। नई दिल्ली। 13 जून, 2025 ।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद तीखा बयान दिया है। इज़रायल द्वारा ईरान के नतांज परमाणु संयंत्र और तेहरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद ट्रंप ने X (पूर्व ट्विटर) पर कहा कि “कुछ लोग बहुत बहादुर बन रहे थे, वे अब मारे जा चुके हैं। और यह सिर्फ शुरुआत है।”


क्या कहा ट्रंप ने?
-
“मैंने ईरान को बार-बार परमाणु समझौते का मौका दिया। उन्हें साफ शब्दों में चेताया कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे घातक सैन्य शक्ति है और इजरायल के पास ऐसे हथियार हैं जिनका इस्तेमाल वे करना जानते हैं।”
-
“अगर ईरान अब भी नहीं समझा, तो आने वाले हमले और भी अधिक क्रूर और विनाशकारी होंगे।”
-
“अब भी समय है। अगर समझौता नहीं किया, तो वह जो कभी ‘ईरानी साम्राज्य’ कहा जाता था, वह पूरी तरह खत्म हो सकता है।”
इजरायल का हमला और ईरानी पलटवार
-
इजरायल ने 20 वरिष्ठ ईरानी कमांडर और वैज्ञानिकों को मार गिराया है।
-
ये हमले नतांज और तेहरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों पर किए गए।
-
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
नेतन्याहू का ऐलान: पूर्ण युद्ध के लिए तैयार
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रूस की TASS News Agency को दिए इंटरव्यू में कहा,
“इजरायल, ईरान के साथ पूर्ण युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। यह युद्ध कई हफ्तों तक चल सकता है और इसकी तीव्रता अलग-अलग हो सकती है।”
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पश्चिम एशिया पहले से ही संवेदनशील और तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा है।
विश्लेषण: एक और बड़ा युद्ध करीब?
ट्रंप के बयान और नेतन्याहू की चेतावनी से यह स्पष्ट हो रहा है कि यदि जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो पश्चिम एशिया पूर्ण सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ सकता है, जिसका असर दुनिया की राजनीति, ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा संतुलन पर पड़ सकता है।