तेज प्रताप यादव को बड़ा झटका!
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट से जनशक्ति जनता दल की उम्मीदवार वीणा मानवी का नामांकन निरस्त कर दिया गया है। इसके बाद तेज प्रताप यादव ने सरकार पर षड्यंत्र का आरोप लगाया और न्यायालय जाने की बात कही। नामांकन निरस्त होने के आधिकारिक कारण का अभी इंतजार है।
दि राइजिंग न्यूज़ | पटना | 14 जुलाई 2026
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पटना की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। जनशक्ति जनता दल की उम्मीदवार वीणा मानवी का नामांकन निर्वाचन अधिकारियों द्वारा निरस्त कर दिया गया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए सरकार पर सुनियोजित षड्यंत्र का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगी और न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। हालांकि निर्वाचन विभाग की ओर से अब तक नामांकन निरस्त किए जाने का विस्तृत आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
बांकीपुर सीट पर चुनावी मुकाबले से पहले मचा सियासी घमासान
बिहार विधानसभा चुनाव की सबसे चर्चित सीटों में शामिल बांकीपुर में चुनावी मुकाबले से पहले ही बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जनशक्ति जनता दल की उम्मीदवार वीणा मानवी का नामांकन निरस्त होने के बाद पूरे राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक दल इस फैसले को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं और इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।
वीणा मानवी ने एक दिन पहले पूरे समर्थकों के साथ पटना समाहरणालय पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। नामांकन के दौरान पार्टी ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक शुरुआत बताया था। लेकिन अगले ही दिन नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन पदाधिकारी ने उनका नामांकन अमान्य घोषित कर दिया। इस फैसले ने जनशक्ति जनता दल को बड़ा झटका दिया है और पार्टी अब कानूनी लड़ाई की तैयारी में जुट गई है।
तेज प्रताप यादव ने कहा- सरकार विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है
नामांकन निरस्त होने के बाद जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के उम्मीदवार के साथ अन्याय किया गया है और पूरी कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दलों को बराबर अवसर मिलना चाहिए, लेकिन सरकार विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव मैदान से बाहर करने की कोशिश कर रही है।
मीडिया से बातचीत के दौरान तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले को न्यायालय में लेकर जाएगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि नामांकन किस तकनीकी आधार पर निरस्त किया गया है, लेकिन उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायालय से उन्हें न्याय मिलेगा। उनके बयान के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है।
गिरफ्तारी के बाद पहले ही जता दी थी आशंका
नामांकन दाखिल करने के कुछ समय बाद ही वीणा मानवी को एक पुराने धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। बताया गया कि यह मामला लगभग सत्रह वर्ष पुराना है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें जमानत मिल गई थी।
गिरफ्तारी के समय ही वीणा मानवी ने दावा किया था कि उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश की जा रही है और उनका नामांकन भी निरस्त किया जा सकता है। अब जब उनका नामांकन वास्तव में रद्द हो गया है, तो उनके समर्थक इसे उसी आशंका से जोड़कर देख रहे हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक विवादित बना दिया है।
बांकीपुर का चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया
वीणा मानवी के चुनाव मैदान से बाहर होने के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक समीकरण बदलता नजर आ रहा है। अब इस सीट पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज के उम्मीदवारों के बीच माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पहले भी मुख्य लड़ाई इन्हीं दलों के बीच मानी जा रही थी, लेकिन वीणा मानवी के मैदान में रहने से चुनावी समीकरण कुछ हद तक प्रभावित हो सकते थे।अब उनके बाहर होने के बाद मुकाबला और सीधा हो गया है। सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और अधिक तेज होने की संभावना है।
नामांकन रद्द होने की वजह पर अब भी बना हुआ है सस्पेंस
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वीणा मानवी का नामांकन किस कारण निरस्त किया गया। निर्वाचन अधिकारियों ने अभी तक इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं और विभिन्न दल अपनी-अपनी व्याख्या प्रस्तुत कर रहे हैं।यदि जनशक्ति जनता दल न्यायालय का रुख करती है, तो यह मामला कानूनी रूप से भी महत्वपूर्ण बन सकता है। आने वाले दिनों में न्यायालय और निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी रहेगी। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि इस पूरे घटनाक्रम का बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों पर कितना असर पड़ता है।