बंगाल में यूसीसी और धर्मांतरण कानून संकेत

पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण विरोधी कानून लागू करने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान की रक्षा और अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण के लिए उनकी सरकार सख्त कदम उठाएगी। उन्होंने सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अवैध प्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया पर भी जोर दिया।

बंगाल में यूसीसी और धर्मांतरण कानून संकेत

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 27 जून 2026

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राज्य के प्रमुख नेता शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार पश्चिम बंगाल में धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लागू करेगी और समान नागरिक संहिता भी लाएगी। उन्होंने दावा किया कि इन कदमों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और राज्य की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना है।

कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित एक कार्यक्रम में संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से होने वाली अवैध घुसपैठ सामाजिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि घुसपैठ के कारण धर्मांतरण, कथित लव जिहाद और जनसांख्यिकीय बदलाव जैसी समस्याएं बढ़ी हैं।उन्होंने कहा कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। उनके अनुसार इन कानूनों का उद्देश्य कानून व्यवस्था को मजबूत करना और सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

सीमा सुरक्षा पर दिया जोर

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार ने सीमा सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई है। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती जिलों में ऐसे केंद्र स्थापित किए गए हैं जहां अवैध रूप से प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान की जा सके और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें उनके मूल स्थानों पर भेजा जा सके।उन्होंने कहा कि जो लोग अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करते हैं और ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं जो देश की सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए खतरा बन सकती हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सीएए और अवैध प्रवासियों पर टिप्पणी

अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद भारत आए लोगों और अवैध घुसपैठियों के बीच स्पष्ट अंतर है। उनके अनुसार कानून के दायरे में आने वाले पात्र लोगों को नागरिकता प्रदान की जाएगी।उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे लोगों को संरक्षण देने के पक्ष में है जो प्रताड़ना के कारण भारत आए हैं, जबकि अवैध तरीके से प्रवेश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का दावा

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर कार्यक्रम

यह बयान वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया गया। शुभेंदु अधिकारी ने वंदे मातरम को देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह गीत देशवासियों को एक सूत्र में बांधने का काम करता है और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करता है।उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राजनीतिक चर्चाएं और तेज होने की संभावना है।