बलिया में खादी कारीगरों की कताई मजदूरी दोगुनी हुई:सूत कताई का भुगतान 7.50 से बढ़ाकर 15 रुपए प्रति लच्छी; पात्र संस्थाओं को 4% ब्याज पर ऋण
बलिया में खादी उद्योग से जुड़े कतिनों, बुनकरों और कारीगरों की मजदूरी, आर्थिक सहायता और कच्चे माल की समस्या को लेकर संसद में उठाए गए सवाल पर केंद्र सरकार ने अपने प्रयासों का ब्योरा दिया है। पिछले तीन वर्षों में सूत कताई की मजदूरी 7.50 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये प्रति लच्छी कर दी गई है। वहीं, पात्र खादी संस्थाओं को कार्यशील पूंजी के लिए चार प्रतिशत वार्षिक रियायती ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर विद्यार्थी ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र की समस्याओं को लेकर लोकसभा में उठाए गए उनके सवाल पर केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने 27 अक्टूबर को पत्र भेजकर जवाब दिया है। सांसद ने 29 जुलाई को नियम 377 के तहत खादी संस्थाओं को एमएमडीए भुगतान में देरी, कच्चे माल की अनुपलब्धता, कार्यशील पूंजी पर ब्याज का बोझ और कतिनों-बुनकरों को कम मजदूरी मिलने का मुद्दा उठाया था। एमएमडीए भुगतान के लिए ऑनलाइन दावा और डीबीटी की व्यवस्था सांसद के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने जवाब में बताया कि एमएमडीए योजना के तहत संस्थाओं का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य चरखे-करघे, कारीगरों और कार्यशील पूंजी के आधार पर तय होता है। उत्पादन के बाद संस्थाओं को जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन दावा प्रस्तुत करना होता है। संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद पात्र दावों का भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से किया जाता है। निर्धारित प्रारूप या आवश्यक दस्तावेजों की कमी होने पर भुगतान में देरी हो सकती है।
कारीगरों को प्रोत्साहन राशि और अतिरिक्त सहायता सांसद ने बताया कि कारीगरों की मजदूरी बढ़ाने के साथ उनके हितों के लिए भी व्यवस्था की गई है। एमएमडीए के तहत अर्जित 35 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि में से 49 प्रतिशत हिस्सा कारीगरों और कार्यकर्ताओं को सीधे डीबीटी के जरिए दिया जाता है। इसके अलावा एडब्लूएएफटी के तहत कारीगर की कमाई का 12 प्रतिशत और संस्था की ओर से समान अंशदान जमा किया जाता है। कार्यशाला योजना के माध्यम से कारीगरों को बेहतर कार्यस्थल उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। कच्चे माल और बिक्री बढ़ाने के लिए भी कदम कच्चे माल की उपलब्धता और गुणवत्ता सुधारने के लिए चित्रदुर्ग एवं कुत्तूर सीएसपी का आधुनिकीकरण किया गया है। लेह में पश्मीना रोविंग संयंत्र और बीकानेर में मेरिनो ऊन बैंक स्थापित किए गए हैं। खादी उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए आठ खादी भवनों और 15 शाखाओं का डिजिटलीकरण करने के साथ ई-खादी पोर्टल शुरू किया गया है। उत्पादों को सरकारी खरीद के लिए जीईएम पोर्टल पर भी उपलब्ध कराया गया है। सांसद के मीडिया प्रभारी जितेश कुमार वर्मा एडवोकेट ने कहा कि खादी एवं ग्रामोद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का महत्वपूर्ण आधार है। इससे जुड़े कारीगरों को समय पर भुगतान और मेहनत का उचित पारिश्रमिक मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी का लाभ वास्तविक कारीगरों तक पहुंचे और एमएमडीए भुगतान में अनावश्यक देरी न हो, इसके लिए प्रभावी निगरानी जरूरी है।
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