बरेली में पीड़ित 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला का छलका दर्द:शांति भंग चालान मामले में एक माह बाद भी कार्रवाई न होने पर दिवाली न मनाने का फैसला
बरेली जनपद स्थित देवरनिया थाना क्षेत्र में 70 वर्षीय विधवा रमा देवी को एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी न्याय नहीं मिल सका है। गाँव जमुनिया निवासी पीड़िता के खेत से करीब 200 यूकेलिप्टिस के पेड़ चोरी-छिपे कटवाकर बेच दिए गए थे। आरोप है कि जब वे शिकायत दर्ज कराने थाने पहुँची थीं, तो पुलिस ने आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय एक माह पूर्व 02 अक्टूबर को उल्टे पीड़िता का ही शांति भंग में चालान कर दिया था। अफसरों से गुहार लगाने और जांच टीम गठित होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से आहत बुजुर्ग महिला और उनके परिवार ने इस बार दिवाली न मनाने का फैसला लिया है। खेत से काटे 5 लाख के पेड़, पीड़िता का ही हुआ था चालान
पीड़िता रमा देवी के अनुसार, पति स्वर्गीय वीरेन्द्र कुमार के नाम दर्ज गाटा संख्या 140 में लगे लगभग 200 पेड़ गाँव के ही राजकुमार द्वारा चोरी से काटकर करीब 5 लाख रुपये में बेच दिए गए। जब इस मामले में देवरनिया थाने में शिकायत दी गई, तो उप निरीक्षक शेखर खोखर ने निष्पक्ष जांच करने की जगह 2 अक्टूबर को बुजुर्ग महिला के खिलाफ ही बीएनएसएस की धारा 126/135 के तहत शांति भंग की कार्रवाई कर दी थी। मकान पर ताला लगाने से रोकने और दबंगों को शह देने का आरोप
रमा देवी ने आरोप लगाया है कि पति के निधन के बाद से मीरा देवी, नन्ही देवी और राजकुमार उन्हें घर से बेदखल करने की नीयत से लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। उत्पीड़न के चलते वे अपनी बेटी के यहाँ रहने को मजबूर हुईं। उनका कहना है कि जब वे अपने पैतृक घर में ताला लगाने जाती हैं, तो स्थानीय पुलिस द्वारा उन्हें रोका जाता है और कोर्ट से हिस्सा लिखवाकर लाने का दबाव बनाया जाता है, जिससे दबंगों के हौसले बुलंद हैं। जांच में लगातार बयान बदल रहा आरोपी
मामले की जांच के दौरान आरोपी राजकुमार द्वारा अलग-अलग अधिकारियों के सामने विरोधाभासी बयान दिए गए हैं। एसडीएम बहेड़ी के समक्ष दावा किया कि जमीन की वसीयत उसके नाम है और पेड़ उसी ने लगवाकर बेचे थे। थाना देवरनिया में कहा कि उसने पेड़ लगाने के लिए जमीन किराये पर ले रखी थी। सीओ बहेड़ी के समक्ष पूर्व बयानों से पलटते हुए कहा कि वह तो सिर्फ नौकर था और पेड़ों की कटाई-बिक्री से उसका कोई सरोकार नहीं है। अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी नतीजा सिफर
पीड़िता की बेटी जयश्री गंगवार ने बताया कि 6 अक्टूबर को अधिकारियों से मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। उस समय सात सदस्यीय टीम गठित कर 10 दिनों के भीतर निस्तारण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक महीना पूरा होने को है और अभी तक कोई परिणाम नहीं निकला। बुजुर्ग पीड़िता का कहना है कि जब तक उनकी संपत्ति और अधिकारों की रक्षा नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे घर में दिवाली नहीं मनाएंगी।
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