सीबीएसई ने बदला फैसला छात्रों को राहत

सीबीएसई ने तीन भाषा नीति को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए मौजूदा 10वीं कक्षा के छात्रों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा से छूट दे दी है। नई गाइडलाइन के अनुसार यह नियम केवल वर्ष 2026 में कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर लागू होगा। इस फैसले से लाखों छात्रों और अभिभावकों को राहत मिली है।

सीबीएसई ने बदला फैसला छात्रों को राहत

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 30 जून 2026

CBSE का बड़ा यू-टर्न 10वीं में तीसरी भाषा की परीक्षा खत्म

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए अपना फैसला वापस ले लिया है। नई गाइडलाइन के अनुसार अब मौजूदा 10वीं कक्षा के छात्रों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। इस फैसले के बाद देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।

मौजूदा छात्रों पर नहीं लागू होगी नई नीति

CBSE ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान 10वीं बैच के छात्रों पर थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी लागू नहीं होगी। वे पहले की तरह दो भाषाओं वाले पुराने सिस्टम के तहत ही पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा देंगे। इसके साथ ही 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ रहे मौजूदा छात्रों को भी आगे चलकर 10वीं में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा से छूट दी गई है।

धीरे-धीरे लागू होगी नई व्यवस्था

बोर्ड के अनुसार थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी केवल उन छात्रों पर लागू होगी जो 2026 में कक्षा 6 में प्रवेश लेंगे। इसी बैच से नई प्रणाली को पूरी तरह लागू किया जाएगा। यानी मौजूदा छात्रों को इससे बाहर रखा गया है और बदलाव को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

9वीं के छात्रों के लिए क्या नियम

शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 9वीं कक्षा के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें एक भारतीय भाषा अनिवार्य होगी। हालांकि तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। जब यही बैच 10वीं में पहुंचेगा, तब भी उन्हें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।

पहले क्या था CBSE का फैसला

कुछ समय पहले CBSE ने थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने की घोषणा की थी, जिसके तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी थीं और दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य थीं। यह नियम 1 जुलाई से सभी CBSE स्कूलों में लागू होना था, लेकिन व्यापक विरोध के बाद अब बोर्ड ने अपना फैसला बदल दिया है।

विरोध के बाद बदला फैसला

इस नीति को लेकर छात्रों, अभिभावकों और कई राज्यों में विरोध देखने को मिला था। कुछ राज्यों ने इस मामले को लेकर कानूनी चुनौती भी दी थी। बढ़ते विरोध और असहमति के बाद CBSE ने अपनी गाइडलाइन में संशोधन किया है।

विदेशी भाषा पढ़ने वालों के लिए भी स्पष्टता

नई गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि जो छात्र पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। हालांकि भविष्य में उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा को शामिल करना होगा।