दीपावली से पहले नगर निगम के खजाने पर संकट:टैक्स वसूली घटी तो ठेकेदारों का भुगतान अटका, CFAO के लेटर से खुली फंड की कमी

Nov 01, 2026 - 07:38
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दीपावली से पहले नगर निगम के खजाने पर संकट:टैक्स वसूली घटी तो ठेकेदारों का भुगतान अटका, CFAO के लेटर से खुली फंड की कमी
कानपुर नगर निगम में पिछले कई महीनों से चल रही खींचतान के बीच अब दीपावली से पहले नगर निगम के सरकारी खजाने पर आर्थिक संकट के बादल छाए हुए हैं। टैक्स वसूली में कमी के चलते विकास कार्यों के भुगतान पर असर पड़ रहा है। ठेकेदारों समेत कई भुगतानों की फाइलें अटक गई हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए चीफ फाइनेंस एंड अकाउंट ऑफिसर (CFAO) रीता सचान ने नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय को पत्र लिखकर वसूली बढ़ाने और इसकी समीक्षा कराने की जरूरत बताई है। वहीं, लेखा विभाग के बाहर भी भुगतान को लेकर नोटिस चस्पा किया गया है। वसूली नहीं बढ़ी तो भुगतान करना होगा मुश्किल CFAO रीता सचान ने नगर आयुक्त को भेजे पत्र में कहा है कि नगर निगम के सभी 6 जोनों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। काम पूरा होने के बाद चीफ इंजीनियर की संस्तुति पर भुगतान से संबंधित फाइलें लेखा विभाग पहुंच रही हैं। इनका लगातार भुगतान भी किया जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर नगर निगम निधि में वसूली की स्थिति बेहद खराब है। इसके चलते निधि में उपलब्ध धनराशि कम रह गई है। उन्होंने पत्र में कहा कि भुगतान के लिए लगातार फाइलें आ रही हैं। ऐसे में समय से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सभी जोनों से रोजाना होने वाली वसूली की समीक्षा जरूरी है। अगर वसूली की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो भुगतान करना संभव नहीं होगा। इस पत्र के बाद नगर निगम में लंबित भुगतान और राजस्व वसूली को लेकर चिंता बढ़ गई है। जनगणना में स्टाफ की ड्यूटी, OTS का पैसा भी अटका नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि जनगणना-2027 में टैक्स स्टाफ की ड्यूटी लगने से वसूली प्रभावित हुई है। इसके अलावा वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना के तहत जमा होने वाला पैसा सीधे शासन के खाते में जा रहा है। वहां से नगर निगम को धनराशि वापस मिलने में समय लग रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, OTS के तहत करीब 15 करोड़ रुपए जमा हुए हैं, लेकिन इसमें से अब तक केवल 1.26 करोड़ रुपए ही नगर निगम को मिले हैं। इससे भी निधि में उपलब्ध धनराशि पर दबाव पड़ा है। वेतन-पेंशन के लिए हर महीने 60-65 करोड़ नगर निगम को राज्य वित्त आयोग (SFC) के तहत कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, एरियर, बीमा और ग्रेच्युटी आदि के लिए शासन से हर महीने करीब 60 से 65 करोड़ रुपए मिलते हैं। इसमें से औसतन 55 करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा नगर निगम को हाउस टैक्स, कॉमर्शियल टैक्स, सेंट्रल टैक्स, विज्ञापन, यूजर चार्ज, पार्किंग और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन से भी आय होती है। ठेकेदारों को भुगतान नगर निगम निधि से किया जाता है। वेतन-पेंशन के भुगतान के बाद हर महीने बचने वाली धनराशि को जोड़कर देखा जाए तो नगर निगम के पास पर्याप्त पैसा मौजूद है, लेकिन ठेकेदारों के भुगतान के लिए निर्धारित मद में पर्याप्त पैसा उपलब्ध नहीं है। इसी कारण ठेकेदारों के करोड़ों रुपए के भुगतान अटके हुए हैं। दूसरे मदों का पैसा खर्च करने से बच रहे अफसर नगर निगम के अधिकारी दूसरे मदों में उपलब्ध धनराशि से ठेकेदारों का भुगतान करने में भी सावधानी बरत रहे हैं। उन्हें आशंका है कि अगर वेतन-पेंशन या किसी अन्य मद की धनराशि दूसरे काम में खर्च की गई और भविष्य में ऑडिट विभाग ने आपत्ति लगा दी, तो उसका जवाब देना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से अधिकारी नियमों के दायरे में रहकर ही भुगतान करने की कोशिश कर रहे हैं।

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