KGMU धर्मांतरण मामले में 12 डॉक्टरों पर एक्शन की तैयारी:STF रिपोर्ट से बैकफुट पर यूनिवर्सिटी प्रशासन, बुलाई गई आपात बैठक
KGMU में धर्मांतरण के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। STF की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट में 12 डॉक्टरों के नाम सामने आने के बाद अब उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। अगले हफ्ते यानी 6 नवंबर को कार्यपरिषद की आपात बैठक बुलाई गई है। इसमें आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है। सात पेज की जांच रिपोर्ट में शामिल डॉक्टरों के नाम सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के कई बड़े पदों पर बैठे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रिपोर्ट में कुछ ऐसे डॉक्टरों का भी जिक्र है, जो मौजूदा समय में विभागाध्यक्ष समेत अहम प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इनमें एक डॉक्टर के कुलपति पद पर होने का भी जिक्र किया गया है। कुलपति के OSD एसए अब्बास भी घेरे में STF की रिपोर्ट में कुलपति के निजी सचिव एसए अब्बास का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अब्बास अली मेहंदी अपने कई काम एसए अब्बास के माध्यम से कराते थे। जांच समितियों के सदस्यों के नाम भी उनके सुझाव पर कुलपति तक पहुंचाए जाने का आरोप है। इस तरह विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। प्रो. उस्मान कौसर पर भी उठाए सवाल रिपोर्ट में मेडिसिन विभाग के नेफ्रोलॉजिस्ट प्रोफेसर उस्मान कौसर का भी नाम शामिल है। उन पर कई हिंदू महिला डॉक्टरों से संबंध होने और उन्हें इस्लामिक विचारधारा से जोड़ने के लिए प्रेरित करने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में अन्य डॉक्टरों के नाम भी दर्ज हैं। इन आरोपों को लेकर संबंधित लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है। जांच पूरी होने तक नहीं मिलेगी विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी STF की रिपोर्ट के आधार पर KGMU प्रशासन करीब 13 डॉक्टरों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इनके खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू कराने के लिए कमेटी गठित की जा सकती है। जांच पूरी होने तक आरोपी डॉक्टरों को विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी पर बनाए रखने या हटाने का मुद्दा भी कार्यपरिषद की बैठक में उठ सकता है। साथ ही दूसरी प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर भी फैसला होगा। इलाज और ड्यूटी में धर्म को दी प्राथमिकता STF की रिपोर्ट में डॉक्टरों के कामकाज और व्यवहार को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ आरोपी डॉक्टर अपने धर्म के लोगों को प्राथमिकता देते थे। इलाज से लेकर विभागीय जिम्मेदारियां सौंपने तक में कथित तौर पर धर्म के आधार पर पक्षपात किया जाता था। ड्यूटी लगाने में भी अपने धर्म के विशेषज्ञों को तरजीह देने की बात सामने आई है। रिपोर्ट आने के बाद कई डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। जाकिर नाइक की विचारधारा के प्रचार का आरोप STF की रिपोर्ट के मुताबिक, KGMU में एक लॉबी बनाकर जाकिर नाइक की विचारधारा का प्रचार किया जा रहा था। इसमें डॉ. नसीम खान की अहम भूमिका बताई गई है। रिपोर्ट में उनके नेतृत्व में मुस्लिम स्टूडेंट्स के बीच इस विचारधारा का प्रचार किए जाने का आरोप है। डॉ. नसीम खान वर्तमान में विश्वविद्यालय के फिजियोलॉजी विभाग में तैनात बताए गए हैं। इससे पहले वह मेडिसिन विभाग में थे। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय परिसर में बाहर से मौलानाओं को बुलाकर तकरीर कराने का भी जिक्र है। आरोप है कि इटावा, मैनपुरी और करहल समेत दूसरे स्थानों से लोग आकर यहां धार्मिक तकरीर करते थे। STF ने इन गतिविधियों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका को अपनी जांच रिपोर्ट में दर्ज किया है। इलाज और ड्यूटी में धर्म को प्राथमिकता देने का आरोप रिपोर्ट में डॉक्टरों के कामकाज और व्यवहार को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। आरोप है कि कुछ डॉक्टर अपने धर्म के लोगों को इलाज देने, विभागीय जिम्मेदारियां सौंपने और ड्यूटी आवंटित करने में प्राथमिकता देते थे। धर्म के आधार पर पक्षपात किए जाने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है। पीड़िता के परिवार पर दबाव बनाने का आरोप रिपोर्ट में पीड़िता के परिवार पर मामला दबाने का दबाव बनाने का भी जिक्र है। आरोप है कि विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश बाबू और एक अन्य प्रोफेसर ने पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की थी। परिवार को समझाने और शिकायत से पीछे हटने के लिए दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में कुछ रेजिडेंट डॉक्टरों पर भी पीड़िता का समर्थन करने वाले लोगों को धमकाने का आरोप लगाया गया है। 20 साल पुरानी हैं धर्मांतरण की जड़ें KGMU में लव जिहाद और धर्मांतरण से जुड़े मामलों की जड़ें करीब 20 साल पुरानी बताई जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2004 में भी विश्वविद्यालय में धर्मांतरण से जुड़ा गिरोह सक्रिय हुआ था। खास बात यह है कि इन मामलों से जुड़े कुछ डॉक्टर लंबे समय से संस्थान में अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। अब STF की रिपोर्ट सामने आने के बाद पुराने मामलों की भी चर्चा तेज हो गई है।
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