दो बहनों की बर्फबारी में गई जान:लखनऊ में भाई को सोशल मीडिया से मिली हादसे की खबर, शव लेकर घर रवाना
उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित केदारताल ट्रैक पर बर्फबारी और हिमस्खलन की चपेट में आकर लापता हुए 8 लोगों में से अब तक 6 की मौत हो चुकी है। बुधवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान तीन और शव बरामद किए गए। इनमें लखनऊ के गुडंबा के टेढ़ी पुलिया स्थित गायत्रीपुरम निवासी दो सगी बहनें वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा भी शामिल हैं। बुधवार देर शाम पोस्टमार्टम के बाद परिजन दोनों के शव लेकर लखनऊ रवाना हो गए। गुरुवार दोपहर करीब एक बजे शव घर पहुंचेंगे। इसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। मूलरूप से बाराबंकी के सराय पांडेय निवासी श्रीनारायण वर्मा कृषि विभाग से रिटायर हैं। उनके तीन बच्चे हैं। इनमें वर्तिका, दीपिका और बेटा अतुल शामिल हैं। दीपिका मुंबई की एक निजी कंपनी में ग्राफिक्स डिजाइनर थीं। फिलहाल उनका वर्क फ्रॉम होम चल रहा था, इसलिए वह लखनऊ में रह रही थीं। वहीं, वर्तिका नोएडा की एक निजी कंपनी में काम करने के साथ फ्रीलांस इन्फ्लुएंसर भी थीं। उन्हें कंपनी की ओर से टूर पैकेज मिला था। इसी के चलते दोनों बहनें साथ केदारताल ट्रेक पर गई थीं। पहाड़ों से था प्यार, भारत-नेपाल के कई ट्रेक कर चुकी थीं दोनों बहनों को पहाड़ों पर ट्रेकिंग का शौक था। वे भारत और नेपाल के कई ट्रेक पूरे कर चुकी थीं। करीब दो महीने पहले ही दोनों फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौटी थीं। एक साल पहले भी उन्होंने भाई अतुल और दोस्तों के साथ उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र में केदारकांठा ट्रेक किया था। इस बार दोनों बहनें केदारताल की यात्रा पर निकली थीं, लेकिन यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया। 27 अक्टूबर को 7 ट्रेकर्स और 5 सपोर्ट स्टाफ के साथ निकली थीं वर्तिका और दीपिका 27 अक्टूबर को सात अन्य ट्रेकर्स और पांच सपोर्ट स्टाफ के साथ गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुई थीं। तीन दिन का यह ट्रेक पूरा कर सभी को 29 अक्टूबर को वापस लौटना था। इसी बीच मौसम बिगड़ गया और भारी बर्फबारी के साथ हिमस्खलन हो गया। इससे वापसी का रास्ता बंद हो गया और दल के आठ सदस्य रास्ते में ही फंस गए। 30 अक्टूबर को ट्रेकिंग दल के कुछ सदस्यों ने कच्ची ढांग के पास फंसे होने की जानकारी ट्रेकिंग एजेंसी को देकर मदद मांगी। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। 31 अक्टूबर को सपोर्ट टीम के चार सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। बुधवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान तीन और शव बरामद हुए, जिनमें दोनों बहनें शामिल थीं। भाई को सोशल मीडिया से मिली हादसे की जानकारी, एजेंसी पर उठाए सवाल दोनों बहनों की तलाश में उनके भाई अतुल वर्मा परिजनों के साथ उत्तरकाशी पहुंचे थे। अतुल के मुताबिक, परिवार को ट्रेकिंग एजेंसी की ओर से हादसे की जानकारी नहीं दी गई। उन्हें सोशल मीडिया पर खबर देखने के बाद घटना का पता चला। इसके बाद वह परिजनों के साथ उत्तरकाशी पहुंचे। परिजनों ने ट्रेकिंग एजेंसी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मौसम खराब होने के बावजूद ट्रेकिंग कराई गई। हादसे के बाद भी एजेंसी ने समय पर परिवार को सूचना नहीं दी। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते जानकारी दी जाती तो वे तत्काल मदद के लिए पहुंच सकते थे।
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