एएमयू चुनाव में दो मुद्दों पर घिरे निर्वाचन अधिकारी:छात्रसंघ फंड का हिसाब मांगने पहुंचे छात्र, कोर्ट प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने पर हंगामा
एएमयू छात्रसंघ चुनाव के बीच सोमवार को यूनियन हॉल में दो मुद्दों पर छात्रों ने विरोध जताया। छात्रसंघ निधि में जमा रकम के इस्तेमाल और उसके हिसाब को लेकर सवाल उठे, वहीं एएमयू कोर्ट के एक प्रत्याशी का नामांकन निरस्त होने पर समर्थकों ने हंगामा किया। दोनों मामलों में छात्रों ने चुनाव अधिकारी से जवाब मांगा।
अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अब्दुल वाहिद समर्थकों के साथ यूनियन हॉल पहुंचे और छात्रसंघ निधि का हिसाब मांगा। छात्रों का सवाल था कि वर्ष 2018-19 से छात्रसंघ अस्तित्व में नहीं है, इसके बावजूद हर साल विद्यार्थियों से शुल्क लेकर रकम जमा की जाती रही। ऐसे में यह पैसा कहां खर्च हुआ और वर्तमान में कितना फंड बचा है?
छात्रों के सवालों पर चुनाव अधिकारी प्रो. जावेद तालिब ने कहा कि छात्रसंघ निधि सुरक्षित है। यदि इसमें से कोई रकम खर्च हुई है तो उसकी भरपाई दूसरे विशेष फंड से की जाएगी। हालांकि, छात्र पूरे लेनदेन का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग पर अड़े रहे।
आरटीआई में भी नहीं मिला हिसाब
छात्रसंघ निधि को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता प्रो. तारिक इस्लाम ने वर्ष 2018-19 से अब तक का हिसाब मांगा था। सीपीआईओ एवं एएफओ मोहम्मद आमिल की ओर से जवाब दिया गया कि यह थर्ड पार्टी सूचना है और आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(e) के तहत इसे साझा नहीं किया जा सकता। प्रो. तारिक इस्लाम ने इस आधार पर आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि छात्रसंघ निधि में हर साल कम से कम 30 लाख रुपये जमा होते हैं। इस हिसाब से आठ वर्षों में करीब ढाई करोड़ रुपये जमा होने चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब छात्रसंघ की निर्वाचित कार्यकारिणी नहीं थी तो इस रकम का इस्तेमाल किसकी अनुमति से किया गया?
बैलेट में नाम आने के बाद कोर्ट प्रत्याशी का नामांकन रद्द, समर्थकों ने घेरा कार्यालय
अलीगढ़। एएमयू कोर्ट के प्रत्याशी मोहम्मद साबिर का नामांकन निरस्त किए जाने पर सोमवार को यूनियन हॉल में समर्थकों ने हंगामा किया। छात्रों ने निर्वाचन कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की। कुछ ने कार्यालय में ताला लगाने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया।
छात्रों का आरोप है कि साबिर ने 12वीं की पढ़ाई उर्दू माध्यम से की है। इसी आधार पर उनका नामांकन रद्द किया गया। छात्रों ने सवाल उठाया कि मतदान से महज तीन दिन पहले इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई? प्रत्याशी साबिर ने आरोप लगाया कि पूर्व छात्रों के दबाव में उम्मीदवारों के नामांकन निरस्त किए जा रहे हैं। इससे पहले अध्यक्ष पद के दावेदार फरहान जुबैरी के नामांकन को लेकर भी विवाद हुआ था।
कोषाध्यक्ष को लेकर भी सवाल
छात्रसंघ के नियमों के मुताबिक मानद कोषाध्यक्ष विश्वविद्यालय के शिक्षण स्टाफ से चुना जाता है। वहीं, एएमयू की वेबसाइट पर प्रो. मोहम्मद नफीस अंसारी का नाम वर्ष 2017 से मानद कोषाध्यक्ष के रूप में दर्ज बताया जा रहा है। प्रो. तारिक इस्लाम ने सवाल उठाया कि जब 2018-19 से छात्रसंघ की निर्वाचित कार्यकारिणी नहीं है तो निधि की रकम का पुनर्विनियोजन किसकी अनुमति से किया गया?
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