एसएन में बढ़े सांस के मरीज, फुल हुए बेड:पिछले 8 दिन में15 से 20% की बढ़ोतरी, पॉल्यूशन से हार्ट स्ट्रोक का भी खतरा
आगरा में दिवाली और सफाई के दौरान उड़ रही धूल ने लोगों की सांसों पर संकट बढ़ा दिया है। सड़कों पर धूल के गुबार और बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी विभाग में पिछले 8 दिनों में अस्थमा के मरीजों की संख्या में 15 से 20% तक का उछाल आया है। हालात यह हैं कि विभाग के सभी बेड फुल हो गए हैं। पहले से अस्थमा और सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों की दवाओं की डोज बढ़ानी पड़ रही है। वहीं, स्वस्थ लोग भी एलर्जी की चपेट में आ रहे हैं और सामान्य दवाओं से उन्हें राहत नहीं मिल रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. जीबी सिंह ने बताया कि इन दिनों हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) की मात्रा बढ़ने से सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ी है। ये बेहद छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों की छोटी नलियों और एल्वियोली (वायु थैलियों) तक पहुंच जाते हैं। यहां से रक्त संचार में शामिल होकर फेफड़ों के साथ हृदय संबंधी बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि कई ऐसे मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिन्होंने बीमारी नियंत्रित होने पर दवाएं बंद कर दी थीं। अब उन्हें दोबारा दवाएं शुरू करनी पड़ रही हैं। वहीं, पहले पूरी तरह स्वस्थ रहे लोग भी एलर्जी और सांस संबंधी परेशानी की चपेट में आ रहे हैं। प्रदूषण के कारण आंखों, नाक और गले में खुजली जैसे लक्षण भी सामने आ रहे हैं। एन-95 मास्क लगाकर ही निकलें बाहर डॉ. सिंह ने सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को फिलहाल घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। जरूरी होने पर एन-95 मास्क लगाकर ही बाहर निकलें। मास्क उपलब्ध नहीं होने पर कपड़े से नाक और मुंह ढककर निकलें। सांस लेने में परेशानी या एलर्जी के लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ से परामर्श लें। उन्होंने कहा कि सांस की तकलीफ को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। स्थिति बिगड़ने पर मरीज को अस्पताल में भर्ती तक करना पड़ सकता है।
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