गैर इरादतन हत्या के 11 साल पुराने मामले में सजा:पति-पत्नी समेत 5 दोषियों को 8 साल की सजा, जुर्माना भी लगा
मऊ के दोहरीघाट थाना क्षेत्र में मारपीट के दौरान गैर इरादतन हत्या के करीब साढ़े 11 साल पुराने मामले में शुक्रवार को जिला जज संजय कुमार की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने पति-पत्नी समेत पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए आठ-आठ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही सभी दोषियों पर अलग-अलग अर्थदंड भी लगाया गया है। खूंटा और पिलर गाड़ने के विवाद में हुई थी मारपीट अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोहरीघाट थाने में दर्ज मुकदमे में वादिनी सरोज पासवान ने आरोप लगाया था कि 15 मार्च 2015 की सुबह पड़ोसी रामप्रवेश, उसकी पत्नी गीता और पुत्रियां रिंकी, पिंकी व प्रियंका तथा अभय खूंटा और पिलर गाड़ रहे थे। इसका विरोध करने पर आरोपियों ने कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों, घूंसे और थप्पड़ों से मारपीट की, जिसमें कई लोग घायल हो गए। घटना में रामभवन, धर्मेंद्र और सुभावती सरोज को चोटें आई थीं। रामभवन के सिर में गंभीर चोट लगने से वह मौके पर बेहोश हो गए थे। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां से तीन लोगों को आजमगढ़ रेफर किया गया। उपचार के दौरान रामभवन की मौत हो गई थी। अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया मामले में दोहरीघाट पुलिस ने मादी दुल्लाह निवासी रामप्रवेश, उसकी पत्नी गीता और तीन पुत्रियों रिंकी, पिंकी व प्रियंका के खिलाफ विवेचना पूरी कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था।अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी अजय कुमार सिंह और एडीजीसी फौजदारी धीरेंद्र प्रताप सिंह ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाह पेश कर अपना पक्ष रखा। साक्ष्यों और सुनवाई के बाद जिला जज संजय कुमार की अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी रामप्रवेश पुत्र स्वर्गीय किशुनधारी, उसकी पत्नी गीता तथा पुत्रियों रिंकी, पिंकी और प्रियंका को आठ-आठ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा रामप्रवेश और गीता पर 33-33 हजार रुपये तथा रिंकी, पिंकी और प्रियंका पर 18-18 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अदालत ने अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश दिया।
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