गोरखपुर में लोन देने वाली कंपनी से धोखाधड़ी:कर्मचारियों ने 9.61 लाख का गबन किया, रुपए व्यक्तिगत इस्तेमाल करने का आरोप, 5 पर FIR
गोरखपुर में लोन देने वाली एक गैर- बैंकिंग वित्तीय कंपनी में लाखों रुपये के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। कंपनी के ही चार फील्ड ऑफिसरों और एक ऑडिट एग्जीक्यूटिव पर मिलीभगत कर करीब 9 लाख 61 हजार रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। मामले में SSP के निर्देश पर रामगढ़ताल थाने में गुरुवार को 5 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किया गया। शुक्रवार को कंपनी के कुछ लोगों से पूछताछ की गई। पुलिस आगे की जांच और कार्रवाई में जुटी है। किश्तें वसूलीं, कंपनी में नहीं की जमा
तारामंडल स्थित पैसालो डिजिटल लिमिटेड कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट अनूप कुमार सक्सेना की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक, कंपनी में फील्ड ऑफिसर के पद पर तैनात संदीप सिंह (कुशीनगर), निरंजन सिंह (महाराजगंज), गौरव सिंह (मऊ) और विशाल कुमार (बलिया) का काम ग्राहकों को लोन बांटना और उनसे किश्तों की रकम कलेक्ट करना था। इन चारों ने फील्ड से लाखों रुपये वसूले, लेकिन उसे कंपनी के खाते में जमा करने के बजाय खुद हड़प लिया। कंपनी के ऑडिट में जब इसका खुलासा हुआ तो लोन लेने वाले ग्राहकों ने लिखित रूप में बताया कि वे पैसे दे चुके हैं। पर्सनल बैंक अकाउंट में मंगाए पैसे, जारी की फर्जी रसीदें
आरोप है कि इन फील्ड अफसरों ने चालाकी दिखाते हुए ग्राहकों से किश्तों का भुगतान अपने व्यक्तिगत बैंक खातों में ऑनलाइन (QR कोड या मोबाइल नंबर के जरिए) ट्रांसफर करवा लिया। इसके सबूत के तौर पर कंपनी के पास ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट मौजूद हैं। इतना ही नहीं, ग्राहकों को गुमराह करने के लिए इन लोगों ने कंपनी के नाम पर फर्जी रसीदें भी काटकर दे दीं। फर्जी एनओसी (NOC) बनाकर ग्राहकों को बांटा
मामले में मुख्य आरोपी संदीप सिंह पर यह भी आरोप है कि उसने कंपनी के नाम से एक फर्जी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) तैयार किया और एक ग्राहक छोटेलाल प्रसाद को सौंप दिया। इस एनओसी पर जिस अधिकारी के फर्जी दस्तखत किए गए हैं, वह वास्तव में कंपनी की तरफ से कभी एनओसी जारी ही नहीं करता था। इससे साफ है कि आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत जालसाजी की। ऑडिट एग्जीक्यूटिव ने भी बहती गंगा में धोए हाथ
कंपनी को दूसरा बड़ा झटका तब लगा जब उनके ऑडिट एग्जीक्यूटिव सतीश कुशवाहा (निवासी बलिया) ने भी धोखाधड़ी की। सतीश का काम फील्ड अफसरों के कामकाज और पैसों के लेन-देन की जांच करना व रिपोर्ट बनाना था। उसके पास ग्राहकों से पैसे वसूलने का कोई अधिकार नहीं था, फिर भी उसने गोरखपुर शाखा के लोन धारकों से सीधे 3,68,531 रुपये कलेक्ट किए और अपने निजी इस्तेमाल में ले लिए। ग्राहकों ने इसके सबूत भी कंपनी को सौंपे हैं। तहरीर के मुताबिक संदीप सिंह (फील्ड ऑफिसर) ने 4,18,357 रुपए, सतीश कुशवाहा (ऑडिट एग्जीक्यूटिव) ने 3,68,531 रुपए, गौरव सिंह (फील्ड ऑफिसर) ने 79,582 रुपए, निरंजन सिंह (फील्ड ऑफिसर) ने 69,920 रुपए, और विशाल कुमार (फील्ड ऑफिसर) 15,302 रुपए का गबन किया गया है। गबन की रकम और बढ़ने की आशंका
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों को लिखित नोटिस भेजकर पैसे लौटाने को कहा गया, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। फिलहाल कंपनी द्वारा इन सभी के कार्यक्षेत्रों में अंदरूनी जांच जारी है, जिससे गबन की गई कुल धनराशि में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। जांच में जुटी पुलिस
थाना प्रभारी श्याम नंद राय ने बताया कि तहरीर के आधार पर FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस आगे की जांच और कार्रवाई में जुटी है।
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