पूर्व MLC महेश चंद्र आर्य को हाईकोर्ट का नोटिस:अलीगढ़ में शिक्षक पद पर रहते वेतन लेने पर उठे सवाल, एमएलसी और अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य रहे महेश चंद्र आर्य
एमएलसी और अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य रहे महेश चंद्र आर्य की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जिला पंचायत के अधीन संचालित लक्ष्मी राज इंटर कॉलेज, गभाना में शिक्षक के पद पर तैनाती के बावजूद कथित तौर पर शिक्षण कार्य नहीं करने और जिला पंचायत के कैंप कार्यालय में अटैच दिखाकर वेतन लेने के आरोपों से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता पंडित केशव देव गौतम की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विपक्षी संख्या दो को नोटिस जारी करने और 10 दिन के भीतर तामीला की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होगी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि महेश चंद्र आर्य करीब 25 वर्षों से लक्ष्मी राज इंटर कॉलेज, गभाना में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। बसपा सरकार के दौरान वह एमएलसी और अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भी रहे। आरोप है कि इन महत्वपूर्ण राजनीतिक और संवैधानिक पदों पर रहने के दौरान उन्होंने कॉलेज में शिक्षण कार्य नहीं किया। इसके बावजूद उनका वेतन जारी होता रहा। बाद में जिला पंचायत के कैंप कार्यालय में अटैच दिखाकर भी वेतन लेने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग, धोखाधड़ी और गबन से जुड़ा मामला बताते हुए न्यायालय में शिकायत की थी।
बसपा के बाद सपा और फिर भाजपा में आए
याचिकाकर्ता के मुताबिक, महेश चंद्र आर्य पहले बसपा सरकार में एमएलसी और अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य रहे। सत्ता परिवर्तन के बाद वह समाजवादी पार्टी में चले गए और 2022 में प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद भाजपा में आ गए। याचिकाकर्ता ने उनके राजनीतिक सफर के साथ-साथ शिक्षक पद पर तैनाती और वेतन प्राप्त करने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं।
एमपी-एमएलए कोर्ट और रिवीजन कोर्ट के बाद हाईकोर्ट पहुंचे
इस मामले में अलीगढ़ की एमपी-एमएलए कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया था। वहां सुनवाई के बाद मामला रिवीजन कोर्ट तक पहुंचा। याचिकाकर्ता का कहना है कि दोनों स्तरों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट में यह मामला आर्टिकल 227 के तहत याचिका संख्या 15381/2026 के रूप में दर्ज है। 29 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की अदालत संख्या-55 में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वीरेंद्र प्रताप पाल ने पक्ष रखा। अदालत ने विपक्षी संख्या दो को नोटिस जारी करने, 10 दिन के भीतर आवश्यक कदम उठाने और सर्विस रिपोर्ट के साथ जनवरी 2027 में मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता पंडित केशव देव गौतम भ्रष्टाचार विरोधी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। फिलहाल हाईकोर्ट ने आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत का आदेश अभी नोटिस जारी करने और आगे की सुनवाई की प्रक्रिया से संबंधित है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)