खाद संकट से जूझ रहे गुना के किसान

मध्य प्रदेश के गुना जिले में खाद की कमी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बोवनी के महत्वपूर्ण समय में किसान घंटों कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। कई किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल रही है, जिससे खेती प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिया है, लेकिन किसानों की परेशानियां अभी भी बनी हुई हैं।

खाद संकट से जूझ रहे गुना के किसान

दि राइजिंग न्यूज़ | गुना | 9 जून 2026

खाद की कमी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें

मध्य प्रदेश के गुना जिले में बोवनी के मौसम के बीच खाद की भारी कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। समय पर खाद नहीं मिलने से किसान परेशान हैं और कई गांवों के किसान लंबी दूरी तय कर खाद वितरण केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके उन्हें आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। खेती के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसान खेतों की तैयारी पूरी कर चुके हैं और बुवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में खाद की कमी फसल उत्पादन पर सीधा असर डाल सकती है।

40 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे किसान

नानाखेड़ी खाद वितरण केंद्र पर उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब उकावद गांव के किसान शिवनंदन रघुवंशी खाद लेने के लिए करीब 40 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे। किसान के पास कोई निजी वाहन नहीं था और उन्हें खाद मिलने की उम्मीद में लगातार दो दिन तक इंतजार करना पड़ा। जब उन्हें जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिली तो उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की। किसान ने बताया कि उन्हें खेती के लिए छह कट्टे खाद की आवश्यकता थी, लेकिन केवल दो कट्टे ही दिए गए। इससे उनकी खेती की जरूरत पूरी नहीं हो पाएगी।

कलेक्टर के सामने छलके आंसू

खाद वितरण केंद्र के निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर किसानों की समस्याएं सुनने पहुंचे। इसी दौरान शिवनंदन रघुवंशी ने अपनी परेशानी बताई। खाद की कमी और लगातार इंतजार से परेशान किसान की आंखों से आंसू निकल पड़े। यह दृश्य वहां मौजूद अन्य किसानों को भी भावुक कर गया। किसानों का कहना था कि खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद के लिए इस तरह संघर्ष करना उनकी मजबूरी बन गई है।

कई किसानों ने उठाए सवाल

खाद वितरण केंद्र पर मौजूद अन्य किसानों ने भी अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। किसान संजय परिहार ने बताया कि टोकन मिलने के बावजूद उन्हें समय पर खाद नहीं मिल रही है। किसानों का आरोप है कि कई बार उन्हें डीएपी खाद की जगह एनपीके खाद खरीदने के लिए कहा जाता है। एनपीके खाद की कीमत डीएपी की तुलना में काफी अधिक है, जिससे खेती की लागत और बढ़ जाती है।

महंगी खाद से बढ़ा आर्थिक बोझ

किसानों के अनुसार डीएपी खाद की कीमत लगभग 1300 रुपये प्रति कट्टा है, जबकि एनपीके खाद 1940 रुपये से लेकर 2450 रुपये तक उपलब्ध है। पहले से ही बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई की लागत बढ़ने के कारण किसान आर्थिक दबाव में हैं। ऐसे में महंगी खाद खरीदना उनके लिए और मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि यदि उचित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो खेती की लागत बढ़ेगी और लाभ कम होगा।

प्रशासन ने दिए सुधार के निर्देश

खाद संकट की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर किशोर कन्याल ने किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने बताया कि खाद वितरण की क्षमता बढ़ाई जा रही है। पहले प्रतिदिन लगभग 300 किसानों को खाद वितरित की जाती थी, जिसे बढ़ाकर 500 किसानों तक किया गया है। इसके अलावा किसानों को समय पर जानकारी देने के लिए वितरण केंद्र पर माइक लगाने और सूचना व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र पर लगाए गए टेंट की मरम्मत और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की बात भी कही गई है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने

खाद संकट का मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी लेने लगा है। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता जयवर्धन सिंह ने कहा कि किसानों की आंखों से निकला हर आंसू सरकार के लिए चेतावनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि खाद की कमी और अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण किसान परेशान हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इसका असर खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।

बोवनी के समय बढ़ी चिंता

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बोवनी के समय खाद की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि किसानों को समय पर खाद नहीं मिलती तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। गुना जिले के कई किसानों का कहना है कि उन्होंने खेती की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, लेकिन खाद की कमी के कारण काम प्रभावित हो रहा है। इससे उनकी मेहनत और निवेश दोनों पर असर पड़ सकता है।

उम्मीद में किसान

संकट के बावजूद किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन जल्द ही पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराएगा। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान हो गया तो वे अपनी फसल बचा सकेंगे और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे। फिलहाल गुना जिले में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक कदम और आपूर्ति की स्थिति यह तय करेगी कि किसानों की यह समस्या कितनी जल्दी दूर हो पाती है।