हरमनप्रीत कौर की कप्तानी पर उठे सवाल, ग्रुप स्टेज में टूटा भारत का वर्ल्ड कप सपना

आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम का सफर ग्रुप चरण में ही समाप्त हो गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबले में 170 रन बनाने के बावजूद भारत को हार का सामना करना पड़ा। मैच के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर की रणनीति, टीम चयन और बल्लेबाजी क्रम को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

हरमनप्रीत कौर की कप्तानी पर उठे सवाल, ग्रुप स्टेज में टूटा भारत का वर्ल्ड कप सपना

दि राइजिंग न्यूज़ | लंदन | 30 जून 2026

आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का अभियान ग्रुप स्टेज में ही समाप्त हो गया। लॉर्ड्स में खेले गए अहम मुकाबले में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के सामने 170 रन का प्रतिस्पर्धी लक्ष्य रखा था, लेकिन इसके बावजूद टीम को 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ भारत का सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना भी टूट गया, जबकि ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका ने ग्रुप-ए से अंतिम चार में अपनी जगह पक्की कर ली।

मजबूत स्थिति के बावजूद हाथ से फिसला मैच

मैच के शुरुआती चरण में भारतीय टीम पूरी तरह नियंत्रण में दिखाई दे रही थी। ऑस्ट्रेलिया की पारी की दूसरी ही गेंद पर भारत को पहला विकेट मिल गया। इसके बाद फोएबे लिचफील्ड और बेथ मूनी के विकेट गिरने से ऑस्ट्रेलिया 9.1 ओवर में 68 रन पर 3 विकेट खो चुका था।इस समय तक मुकाबला भारत की पकड़ में माना जा रहा था, लेकिन यहीं से मैच का रुख बदल गया। कप्तान हरमनप्रीत कौर के कुछ रणनीतिक फैसले चर्चा का विषय बन गए और ऑस्ट्रेलियाई टीम ने धीरे-धीरे वापसी करते हुए मैच अपने नाम कर लिया।

गेंदबाजी बदलाव पर उठे सवाल

भारतीय स्पिनर श्री चरणी ने अपने शुरुआती दो ओवरों में केवल 10 रन देकर एक विकेट हासिल किया था और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा था। इसके बावजूद उन्हें लगातार गेंदबाजी नहीं दी गई।कप्तान ने इसके बजाय राधा यादव और शेफाली वर्मा को गेंद थमाई। ऑस्ट्रेलिया की एलिस पेरी और एश्ले गार्डनर ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया। खास तौर पर राधा यादव के एक ओवर में 17 रन बटोरकर दोनों बल्लेबाजों ने मैच का संतुलन ऑस्ट्रेलिया की ओर झुका दिया।जब तक श्री चरणी और दीप्ति शर्मा को दोबारा गेंद सौंपी गई, तब तक ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज पूरी तरह लय में आ चुके थे और भारत पर दबाव बढ़ चुका था।

टीम चयन पर भी उठे प्रश्न

इस मुकाबले में टीम चयन को लेकर भी कई सवाल सामने आए। तेज गेंदबाज नंदनी शर्मा की जगह क्रांति गौड़ को अंतिम एकादश में शामिल किया गया, लेकिन उन्हें पूरे मैच में केवल एक ओवर ही फेंकने का अवसर मिला।क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टीम प्रबंधन को उन पर पर्याप्त भरोसा नहीं था, तो उनकी जगह अतिरिक्त बल्लेबाज या ऑलराउंडर को शामिल किया जा सकता था।इसी तरह आक्रामक बल्लेबाज भारती फुलमाली को बाहर रखकर यास्तिका भाटिया को मौका दिया गया, लेकिन यास्तिका को बल्लेबाजी के लिए मैदान पर भेजा ही नहीं गया। इस फैसले ने टीम चयन की रणनीति पर और अधिक सवाल खड़े कर दिए।

ऋचा घोष को देर से भेजना पड़ा भारी

भारत की सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में शामिल ऋचा घोष को बल्लेबाजी क्रम में काफी नीचे रखा गया। जब टीम को तेज रन गति की जरूरत थी, तब भी उन्हें इंतजार करना पड़ा।ऋचा को 20वें ओवर में बल्लेबाजी के लिए भेजा गया और उन्हें केवल एक गेंद खेलने का मौका मिला। कई क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऋचा घोष को पहले बल्लेबाजी के लिए भेजा जाता, तो भारत का स्कोर और अधिक मजबूत हो सकता था।इसके विपरीत जेमिमा रोड्रिग्स को हरमनप्रीत कौर से पहले बल्लेबाजी के लिए भेजा गया, जिससे बल्लेबाजी क्रम को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।

कोच और कप्तान दोनों निशाने पर

विश्व कप से बाहर होने के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर और मुख्य कोच अमोल मजूमदार की रणनीति की आलोचना तेज हो गई है। पिछले कुछ महीनों में भी टीम चयन, बल्लेबाजी क्रम और मैच के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं।इस हार ने भारतीय महिला टीम के विश्व कप अभियान का अंत कर दिया है और अब टीम प्रबंधन को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए अपनी रणनीति पर गंभीरता से पुनर्विचार करना होगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से भरी भारतीय टीम बेहतर योजना और सटीक फैसलों के साथ इस टूर्नामेंट में कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सकती थी।