जाने कौन हैं जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी ज्ञानमती माता:500 ग्रंथों की रचना की, पूरे देश में जैन तीर्थों का कायाकल्य कराया

Oct 25, 2026 - 16:22
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जाने कौन हैं जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी ज्ञानमती माता:500 ग्रंथों की रचना की, पूरे देश में जैन तीर्थों का कायाकल्य कराया
जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी का जन्म आज से 92 वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में टिकैतनगर ग्राम में शरदपूर्णिमा के दिन लाला छोटेलाल एवं माता मोहिनी देवी की पवित्र कुक्षि से हुआ था। बचपन में माता-पिता ने प्रेम से मैना नाम रखा। बचपन से ही अति धार्मिक प्रवृत्ति की बालिका मैना ने गृहबंधन को तोड़कर वैराग्य पथ पर चलने का निर्णय लिया। बाल्यकाल की शिक्षा टिकैतनगर ग्राम में सम्पन्न की। बचपन से ही अति धार्मिक प्रवृत्ति की बालिका, जिसने अपने परिवार में सभी को धर्म से जोड़कर रखा, कुरीतियाँ समाज में जो व्याप्त थीं, उनको अपने घर में एवं ग्राम में समाज किया। शनै-शनै जैसे विवाह की उम्र आई, तो मैना ने मन में दृढ़ संकल्प रखा था कि मुझे वैराग्य के पथ पर चलकर अपनी आत्मा का कल्याण करना है। आचार्य वीरसागर महाराज से दीक्षा प्राप्त किया समय के साथ बालिका मैना ने गुरुवर दिगम्बर जैनाचार्य आचार्यरत्न देशभूषण जी महाराज से आजन्म ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया एवं आचार्य वीरसागर महाराज के हाथों से माधो राजपुरा (जयपुर) राजस्थान में आर्यिका दीक्षा के व्रत ग्रहण करके मैना से ज्ञानमती नाम प्राप्त किया। 2500 साल के इतिहास में इतना विराट साहित्य रचने वाली पहली साध्वी विजय कुमार जैन (मंत्री-अयोध्या जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी) के अनुसार ज्ञान की प्रभावना करते हुए लगभग साढ़े 500 ग्रंथों का सृजन, जिनकी लेखनी के द्वारा किया गया। भगवान महावीर के पश्चात् 2500 साल के इतिहास में इतना विराट साहित्य रचने वाली पहली महान साध्वी हैं। इसी क्रम में हस्तिनापुर (मेरठ) उ.प्र. के विश्व प्रसिद्ध जम्बूद्वीप की रचना का निर्माण मांगीतुंगी (नासिक) महा., भगवान ऋषभदेव की अखण्ड पाषाण में 108 फुट प्रतिमा का निर्माण (गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज)है। काकंदी, सम्मेदशिखर, भद्दिलपुर, शिर्डी आदि तीर्थों का विकास पूज्य माताजी की प्रेरणा से विजय कुमार जैन (मंत्री-अयोध्या जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी) ने बताया कि शाश्वत तीर्थ अयोध्या का महा विकास, इसी क्रम में कुण्डलपुर, प्रयाग, माधोराजपुरा, काकंदी, सम्मेदशिखर, भद्दिलपुर, शिर्डी आदि तीर्थों का विकास पूज्य माताजी की प्रेरणा से हुआ है। वर्तमान युग में दिगम्बर जैन समाज की साक्षात् सरस्वती माताजी को सम्पूर्ण विश्व का अभिनंदन इस शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर हो रहा है। उनके 75 वें संयम दिवस एवं 93 वें जन्मोत्सव पर सम्पूर्ण जैन समाज की ओर से मंगनकामना की जा रही है। पूरे देश में अनेक कार्यक्रम हो रहे हैं।

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