जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी प्राथमिकी रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में हुए छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली समेत कई राज्यों में दर्ज प्राथमिकी पर आगे की कार्रवाई रोक दी है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया। दिल्ली पुलिस को गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के संबंध में अलग मामला दर्ज करने की अनुमति दी गई है। वहीं, केंद्र सरकार ने छात्रों से किए गए वादों को पूरा करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 01 सितंबर 2026
अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने लिया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए जुलाई में हुए छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों पर बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्ति का प्रयोग करते हुए इन प्राथमिकी को निरस्त करने का आदेश दिया। अदालत के इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े कई प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से राहत मिली है।केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से अनुरोध किया था कि जिन राज्यों में आंदोलन को लेकर मामले दर्ज हुए हैं, वहां भी आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाए। अदालत ने इस अनुरोध पर सहमति जताई और अन्य राज्यों में दर्ज प्राथमिकी में भी आगे की कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। इससे आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लग गया है।
दिल्ली में दर्ज हुई थीं 13 प्राथमिकी
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 20 से 25 जुलाई के बीच छात्र आंदोलन को लेकर कुल 13 प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से इन सभी मामलों को निरस्त करने का अनुरोध किया था। अदालत ने दिल्ली पुलिस के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए इन प्राथमिकी को खत्म करने की अनुमति दे दी है।हालांकि, दिल्ली पुलिस को एक नया मामला दर्ज करने की अनुमति भी दी गई है। यह मामला भीड़ में शामिल ऐसे 2,873 लोगों से संबंधित होगा, जिनका पहले गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। इस संबंध में पुलिस को अदालत की ओर से अनुमति मिल गई है और यह कार्रवाई अलग आधार पर की जा सकेगी।
केंद्र सरकार ने छात्रों से किए वादों का दिया हवाला
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार ने आंदोलन कर रहे छात्रों से कुछ वादे किए थे। इनमें दर्ज मुकदमों को वापस लेने और भविष्य में इन मामलों को लेकर नई प्राथमिकी दर्ज नहीं करने जैसी बातें शामिल थीं। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह छात्रों से किए गए इन वादों को पूरा करना चाहती है।केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि आंदोलन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। सरकार ने अदालत से अनुरोध किया कि इस संबंध में तत्काल कोई अंतिम आदेश जारी न किया जाए। केंद्र के अनुसार, इस विषय पर एक व्यवस्था तैयार की जा रही है और इसके लिए कुछ समय की आवश्यकता है।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि नीट परीक्षा से जुड़े तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सरकार की ओर से एक व्यवस्था तैयार की जा रही है। केंद्र ने अदालत से इस विषय पर तीन महीने का समय देने का अनुरोध किया है।केंद्र सरकार का कहना था कि अदालत की ओर से दिया गया कोई भी आदेश भविष्य में होने वाली सभी तरह की परीक्षाओं के मामलों में उदाहरण बन सकता है। इसलिए मुआवजे के संबंध में व्यापक व्यवस्था तैयार करने की आवश्यकता है। अदालत ने सरकार के इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया और इस दिशा में आगे बढ़ने की अनुमति दी।
सौरव दास ने अदालत का जताया आभार
सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से मौजूद सह-संयोजक सौरव दास ने हाथ जोड़कर न्यायाधीशों का आभार जताया। उन्होंने अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताया। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं।सौरव दास ने अदालत को यह भी बताया कि 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च का फैसला वापस लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन अब इस मार्च को आगे नहीं बढ़ाएगा। अदालत ने सौरव दास के इस बयान को भी अपने आदेश में दर्ज करने का निर्देश दिया।
5 सितंबर के मार्च पर भी लिया गया फैसला
जुलाई के छात्र आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से 5 सितंबर को मार्च निकालने की घोषणा की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट में सौरव दास ने इस प्रस्तावित मार्च को वापस लेने की जानकारी दी है। अदालत ने इस बयान को दर्ज कर लिया है।सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े मामलों में प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिली है। वहीं, गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों को लेकर अलग प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दिए जाने से मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब इस संबंध में आगे की कार्रवाई पुलिस और संबंधित अधिकारियों की प्रक्रिया के अनुसार होगी।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई के छात्र आंदोलन से जुड़ी प्राथमिकी निरस्त करने का आदेश दिया।
- अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया।
- दिल्ली में 20 से 25 जुलाई के बीच 13 प्राथमिकी दर्ज हुई थीं।
- बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र में दर्ज मामलों पर भी आगे कार्रवाई नहीं होगी।
- दिल्ली पुलिस को गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के संबंध में नया मामला दर्ज करने की अनुमति मिली।
- केंद्र सरकार ने छात्रों से किए गए वादे पूरे करने की बात कही।
- आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पर भी सहमति बनी।
- 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने की जानकारी अदालत को दी गई।
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