23 दिन बाद खत्म हुई छात्रों की भूख हड़ताल!

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले तेईस दिनों से जारी तीन छात्रों की भूख हड़ताल सोमवार को समाप्त हो गई। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब संसद मार्च को लेकर राजधानी में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच इस घटनाक्रम ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है।

23 दिन बाद खत्म हुई छात्रों की भूख हड़ताल!

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 जुलाई 2026

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले तेईस दिनों से जारी तीन छात्रों की भूख हड़ताल सोमवार को समाप्त हो गई। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया, जब संसद मार्च को लेकर राजधानी में राजनीतिक माहौल बेहद गर्म बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प, पुलिस कार्रवाई और बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच इस घटनाक्रम ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया। अभिनेत्री शबाना आजमी की मौजूदगी में छात्रा नेहा ने अपना अनशन समाप्त किया, जिसके बाद इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो गई हैं।


जंतर-मंतर पर 23 दिन बाद समाप्त हुई तीन छात्रों की भूख हड़ताल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले तेईस दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे तीन छात्रों ने सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया, जब संसद मार्च को लेकर राजधानी में भारी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। सोमवार सुबह से ही जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। इसी घटनाक्रम के बीच छात्रों द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा आंदोलन का सबसे बड़ा घटनाक्रम बनकर सामने आई।


तेईस दिनों तक लगातार चला आंदोलन

छात्र संगठन से जुड़े तीनों छात्र पिछले तेईस दिनों से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल कर रहे थे। उनका कहना था कि शिक्षा, छात्र अधिकारों और अन्य मुद्दों पर संबंधित पक्षों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। इसी कारण उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने के लिए अनशन का रास्ता चुना। लंबे समय तक चले इस आंदोलन के दौरान देशभर के अनेक छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों ने उनका समर्थन किया। जंतर-मंतर पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर छात्रों का हौसला बढ़ा रहे थे, जिससे यह आंदोलन लगातार चर्चा का विषय बना रहा।


संसद मार्च के दौरान बदले हालात

सोमवार को संसद मार्च के आह्वान के बाद राजधानी दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज हो गईं। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ने लगे, जिसके चलते कई स्थानों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई। हालात को देखते हुए पुलिस ने कई इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया, जिसे आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।


शबाना आजमी पहुंचीं जंतर-मंतर

प्रसिद्ध अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आजमी भी सोमवार को जंतर-मंतर पहुंचीं। उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मुलाकात कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और उनकी मांगों पर विस्तार से बातचीत की। शबाना आजमी ने आंदोलनकारियों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। इसके बाद उन्होंने छात्रा नेहा को जूस पिलाकर उनकी भूख हड़ताल समाप्त कराई। इस दौरान आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर इस फैसले का स्वागत किया।


स्वास्थ्य को लेकर बढ़ रही थी चिंता

लगातार तेईस दिनों तक भूख हड़ताल जारी रहने के कारण छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी। चिकित्सकों द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा था और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह भी दी जा रही थी। सामाजिक संगठनों और समर्थकों ने भी छात्रों से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की थी। अंततः परिस्थितियों को देखते हुए छात्रों ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया, जिससे समर्थकों ने राहत की सांस ली।


राजधानी में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

संसद मार्च और जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम के बाद राजधानी की राजनीति और अधिक गर्मा गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस पूरे मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ दलों ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान जारी किए, जबकि कुछ ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की कार्रवाई को आवश्यक बताया। इस घटनाक्रम के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और अधिक राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।


आगे क्या होगा

भूख हड़ताल समाप्त होने के बाद भी आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा है। प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई जाएगी। वहीं प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और संबंधित पक्षों के बीच क्या सहमति बनती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।