झांसी के 80 आंगनबाड़ी केंद्र बने मॉडल:स्मार्ट टीवी से पढ़ाई करेंगे बच्चे, दीवारों पर कलरफुल पेंटिंग भी दे रहीं ज्ञान
झांसी में मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड की पहल पर जिले में 80 आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। बड़ागांव ब्लॉक के कोट (बेहटा) और बबीना ब्लॉक के लेवा गांव में तैयार मॉडल केंद्रों में बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने की व्यवस्था की गई है। जिले के आठ विकासखंडों में 10-10 आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल बनाने की पहल की गई है। इन केंद्रों का उद्देश्य बच्चों को स्कूल जाने से पहले ही पढ़ाई के लिए तैयार करना और उनके बौद्धिक व शारीरिक विकास को बढ़ावा देना है। इसके लिए आंगनबाड़ी भवनों को बच्चों के अनुकूल बनाया जा रहा है, ताकि पढ़ाई उनके लिए बोझ नहीं, बल्कि खेल और मनोरंजन का हिस्सा बने। दीवारों पर अक्षर, चित्रों से सीख रहे सौरमंडल मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों में हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, ज्यामितीय आकृतियां, दिशाओं, जीव-जंतुओं और स्थानीय परिवेश से जुड़े चित्र बनाए गए हैं। बच्चे इन्हें देखकर आसानी से नई चीजें सीख सकते हैं। भवन की दीवारों, सीढ़ियों, दरवाजों और खुली जगहों को भी पढ़ाई के माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। इस व्यवस्था को बिल्डिंग एज लर्निंग एड (BALA) यानी भवन को ही शिक्षण सामग्री बनाने की अवधारणा के तहत तैयार किया गया है। कोट (बेहटा) और लेवा के मॉडल केंद्रों में स्मार्ट टीवी के जरिए बच्चों को रोचक जानकारियां दी जा रही हैं। लघु फिल्मों से उन्हें जागरूक करने के साथ चित्रों के माध्यम से सौरमंडल की जानकारी भी दी जा रही है। इससे बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। रंगीन फर्नीचर से लेकर पोषण वाटिका तक की सुविधा बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मॉडल केंद्रों में रंगीन टेबल-कुर्सियां, किताबों का कोना, झूले और पेंटिंग की व्यवस्था की गई है। बाल मैत्री शौचालय, स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ, हाथ धोने की सुविधा, पोषण वाटिका और बगीचे जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। केंद्रों के बरामदों और बाहरी दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग बनाई गई हैं, ताकि बच्चों को आसपास का माहौल सीखने और खेलने के लिए प्रेरित करे। आठ विकासखंडों में चल रही पहल मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड के मुताबिक, विभिन्न विभागों के अभिसरण से पहले चरण में जिले के 80 आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल बनाया गया है। अन्य केंद्रों को भी बच्चों की सुविधाओं और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) के मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इन केंद्रों को चाइल्ड फ्रेंडली बनाने पर जोर है, जिससे बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा के साथ मनोरंजन और सीखने के बेहतर अवसर मिल सकें। मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के उद्देश्यों से जोड़कर विकसित किया जा रहा है। इसका मकसद बच्चों को शुरुआती उम्र से ही शिक्षा, पोषण, स्वच्छता और सामाजिक व्यवहार की बेहतर समझ देना है।
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