झांसी में वर्कशॉप में डिफेंस कोरिडोर पर मंथन:लोकल उद्यमियों को ग्लोबल इंडस्ट्री से जुड़ने का अवसर मिलेगा
झांसी में विकसित हो रहे डिफेंस कॉरिडोर की भूमिका को समझने और संभावनाओं को तलाशने के मकसद से शुक्रवार को रीजनल डिफेंस वर्कशॉप का आयोजन हुआ। एक निजी होटल में आयोजित वर्कशॉप में डिफेंस इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमी, स्थानीय एमएसएमई के प्रतिनिधि, स्थानीय औद्योगिक संगठन के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन और उद्योग विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। वर्कशॉप में उपस्थित प्रतिनिधियों ने डिफेंस कॉरिडोर से औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर अपनी राय रखी। इस वर्कशॉप में स्थानीय उद्यमियों को डिफेंस सेक्टर की बड़ी कंपनियों के साथ संबद्ध होने की संभावना पर भी चर्चा हुई। बुंदेलखंड के लोकल उद्यमियों को डिफेंस इंडस्ट्री से जुड़े ग्लोबल चेन से जुड़ने का अवसर मिल सकेगा। वर्कशॉप में मौजूद उत्तर प्रदेश सरकार के अफसरों ने उद्यमियों को बताया कि डिफेंस कॉरिडोर के झांसी नोड में विशेष सब्सिडी प्रदान की जा रही है। वर्कशॉप से निकले निष्कर्षों की रिपोर्ट प्रदेश की योगी सरकार को सौंपी जाएगी। सभी डिफेंस कॉरिडोर में बैठक झांसी के डीएम गौरांग राठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के साथ मिलकर सभी डिफेंस कॉरिडोर में एक महत्वपूर्व वर्कशॉप आयोजित कराई है। इसका मकसद यह जानना है कि डिफेंस कॉरिडोर के आने से किस तरह जिले में वर्तमान में मौजूद औद्योगिक इकाइयां, चाहे वे एमएसएमई हों अथवा भारी उद्योग हों, उन्हें फायदा मिल सकता है और उनकी क्या भूमिका हो सकती है। डिफेंस कॉरिडोर आने वाले समय में लोकल सपोर्ट से और बेहतर हो सके और जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का विजन है कि उत्तर प्रदेश डिफेंस हब के रूप में उभर सके, उसको हम किस तरह से साकार कर सकते हैं, इन सब बातों पर चर्चा हुई। इसमें डिफेंस सेक्टर की कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। स्थानीय उद्योग और बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे। आज यहां एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि एक ऐसा मैकेनिज्म बनायेंगे जिससे यहां के उद्योगों को सीधा संवाद डिफेंस कॉरिडोर से जुड़े उद्योग से हो सके। इससे झांसी के स्थानीय उद्योगों को फायदा होगा। सरकार को रिपोर्ट सौपेंगे ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर हर्ष वी पंत ने बताया कि उत्तर प्रदेश में जो डिफेंस कॉरिडोर बन रहा है, उसके अलग-अलग नोड बन रहे हैं, उसमें झांसी भी एक महत्वपूर्ण नोड है। हमारा प्रयास है कि कार्यशाला के माध्यम से यह जानने की कोशिश की जाए कि डिफेंस कॉरिडोर का प्रभाव क्या पड़ रहा है। धरातल पर कैसे उतर रहा है, उसमें समस्याएं क्या आ रही हैं, इसके जो स्टेकहोल्डर्स हैं, सरकार, इंडस्ट्री, एकेडमिया सब मिलकर मिलकर एक साथ आएं। हम कार्यशाला के बाद एक डिटेल रिपोर्ट सरकार को देंगे। झांसी में जमीन है, संसाधन है, प्रतिभा है, संस्थाएं हैं, इनको देखते हुए डिफेंस सेक्टर की क्या आवश्यकताएं हैं, इस पर हमने संवाद किया है। हमारा प्रयास है कि डिफेंस कॉरिडोर को सिर्फ डिफेंस सेक्टर से जुड़े उद्योग के रूप में नहीं देखा जाए क्योंकि इसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। इससे स्थानीय उद्योगों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इसे लेकर स्टेकहोल्डर्स काफी उत्साहित दिखाई दिए हैं। ये रहे मौजूद कार्यशाला में स्थानीय सांसद अनुराग शर्मा, डीएम गौरांग राठी, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट हर्ष पंत, उपायुक्त उद्योग मनीष चौधरी के अलावा भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, इंडो गल्फ, विजयन त्रिशूल डिफेंस सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड, फ्यूचर अर्थ स्टार्टअप समेत कई कंपनियों, स्टार्टअप्स और संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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