सजा-ए-मौत पाए मुस्कान-साहिल के वकील की दलील:संदीप दुबे बोले- कोई चश्मदीद नहीं, एविडेंस कंपलीट नहीं मिसिंग है

Oct 29, 2026 - 06:39
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सजा-ए-मौत पाए मुस्कान-साहिल के वकील की दलील:संदीप दुबे बोले- कोई चश्मदीद नहीं, एविडेंस कंपलीट नहीं मिसिंग है
मेरठ के बहुचर्चित 'नीले ड्रम' कांड में सजा-ए-मौत पाए मुस्कान-साहिल की फांसी का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने सुनवाई कर मुस्कान-साहिल की अपील को स्वीकार भी कर लिया है। अब मामले में यूपी सरकार को अपना पक्ष दाखिल करना है। मेरठ कोठ के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले साहिल, मुस्कात के वकील हाईकोर्ट अधिवक्ता संदीप कुमार दुबे अदालत के सामने मजबूत दलीलें दीं। कहा कि (परिस्थितिजन्य साक्ष्य) अप्रत्यक्ष प्रमाण होता है, कोई आंखों देखी घटना नहीं है। जानिये मुस्कान और साहिल के वकील ने क्या कहा सज़ा के खिलाफ हाईकोर्ट में कैपिटल अपील किया है। दोषमुक्त करने की अपील की गई है। यह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित फैसला है। इसमें कोई डायरेक्ट एविडेंस का, कोई आंखों देखी घटना का केस है नहीं है। इसमें कोई चश्मदीद नहीं है। एक 'चेन ऑफ सरकमस्टेंसेस' जिसमें एविडेंस कंप्लीट होना चाहिए, जो कि इसमें मिसिंग दिख रहा है। क्या जमानत की भी मांग की गई है? नहीं इसमें जमानत की मांग कैपिटल अपील में नहीं होती है। इसमें सीधे फाइनल हियरिंग होती है। इसमें दोषमुक्त होंगे या जो भी कोर्ट का निर्णय आएगा, कोर्ट फैसला करती है। हाईकोर्ट ने स्वीकार की अपील, 30 नवंबर को सुनवाई मेरठ के बहुचर्चित 'नीले ड्रम' कांड मामले की मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई। फांसी की सजा पाए दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की याचिका को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की है। मुस्कान और साहिल ने मेरठ कोर्ट से मिली फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। फांसी की सजा के खिलाफ दोषियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मृत्युदंड और दोषसिद्धि के खिलाफ अपील मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने ट्रायल कोर्ट के मृत्युदंड और दोषसिद्धि के आदेश को हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी है। दोनो ने अधिवक्ताओं के माध्यम से ये अपील दाखिल करते हुए मेरठ कोर्ट के 30 सितंबर को दोषसिद्धि और 14 अक्टूबर को फांसी की सजा के फैसले को रद्द करने की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। कोर्ट में दोनों की तरफ से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट सुशील शुक्ला, अधिवक्ता निधि त्रिवेदी, संदीप कुमार दुबे और अधिवक्ता रविंद्र प्रताप सिंह चंदेल पेश हुए। जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की डबल बेंच में मामले की सुनवाई हुई। हाइकोर्ट पहुंचा है मामला मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड यानी ‘ब्लू ड्रम मर्डर केस’ के दोषियों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दोनों ने मेरठ जिला एवं सत्र न्यायालय के दोषसिद्धि और मृत्युदंड के आदेश को अवैध और मनमाना बताते हुए निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने अपील में सभी आरोपों से बरी किए जाने का अनुरोध भी किया है। मेरठ की अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को मौत की सजा सुनाई गई। अब दोनों ने अपने वकीलों के माध्यम से आपराधिक अपील दायर कर निचली अदालत के फैसले पर सवाल उठाए हैं। मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ में अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना जताई गई है। अपील में क्या-क्या तर्क दिए, वो पढ़िए- 1. परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था मामला अपील में कहा गया है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। दोषियों का तर्क है कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, लेकिन निचली अदालत ने कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए अटकलों और अनुमानों के आधार पर निष्कर्ष निकाला। 2. हथियार, सीमेंट और ड्रम की खरीद पर सवाल अपीलकर्ताओं ने हथियार, सीमेंट और ड्रम की खरीद से संबंधित गवाहों के बयानों में कथित विरोधाभास होने का दावा किया है। उनका कहना है कि इन खरीद-बिक्री की पुष्टि के लिए न तो सीसीटीवी फुटेज पेश की गई और न ही वैध खरीद रसीदें उपलब्ध कराई गईं। 3. बरामदगी की प्रक्रिया पर भी आपत्ति दोषियों ने रिकवरी मेमो पर स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर नहीं होने का दावा किया है। इसके अलावा वीडियोग्राफी की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के लिए जरूरी प्रमाणपत्रों की अनुपलब्धता का मुद्दा भी उठाया है। दोषसिद्धि और फांसी का आदेश रद्द करने की मांग दोनों अपीलकर्ताओं ने हाईकोर्ट से 30 सितंबर के दोषसिद्धि आदेश और 14 अक्टूबर को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत आरोपों से बरी किए जाने का अनुरोध किया है। फिलहाल ये सभी तर्क दोषियों की ओर से अपील में रखे गए दावे हैं। इन पर हाईकोर्ट का फैसला आना बाकी है। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष का जवाब और हाईकोर्ट का रुख मामले की आगे की दिशा तय करेगा। मुस्कान ने कैसे सौरभ का मर्डर किया, पढ़िए लंदन से लौटे सौरभ कुमार राजपूत की पत्नी मुस्कान ने 3 मार्च, 2025 को हत्या कर दी। आरोप है कि बॉयफ्रेंड साहिल शुक्ला उर्फ मोहित ने उसका साथ दिया। पहले खाने में दवा मिलाकर सौरभ को बेहोश किया, फिर सोते समय मुस्कान ने उसके सीने में चाकू मारा। हत्या के बाद शव बाथरूम में ले जाया गया। वहां साहिल ने सिर और दोनों हाथ धड़ से अलग किए। टुकड़ों को प्लास्टिक के ड्रम में डालकर सीमेंट का घोल भर दिया। परिवार और पड़ोसियों को गुमराह करने के लिए मुस्कान शिमला-मनाली घूमने चली गई। 13 दिन तक मुस्कान इंस्टाग्राम पर फोटो-वीडियो डालती रही, ताकि लोग समझें कि वे घूम रहे हैं। 18 मार्च को सौरभ का छोटा भाई राहुल घर पहुंचा। उसने मुस्कान को साहिल के साथ देखा। भाई के बारे में पूछने पर मुस्कान जवाब नहीं दे सकी। घर से बदबू आने पर राहुल ने शोर मचाया और पड़ोसी जुट गए। पुलिस पहुंची तो हत्या का खुलासा हुआ। पुलिस कस्टडी में मुस्कान और साहिल ने कथित तौर पर वारदात की पूरी कहानी बताई।

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