नोएडा में बनेगी AI सिटी:45 साल के लिए लीज पर मिलेगा प्रोजेक्ट, बोर्ड की सैद्धांतिक मंजूरी मंजूरी, 50% क्षेत्र आईटी के लिए आरक्षित
नोएडा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिटी सह बिजनेस पार्क विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक में उत्तर प्रदेश प्राइवेट बिजनेस पार्क डेवलपमेंट स्कीम-2025 को अपनाने और परियोजना के लिए मास्टर डेवलपर के चयन संबंधी आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। परियोजना का विकास पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर किया जाएगा। इसके लिए प्रतिस्पर्धी ई-बिडिंग के माध्यम से निजी डेवलपर का चयन होगा। जमीन का मालिकाना हक नोएडा प्राधिकरण के पास रहेगा, जबकि डेवलपर को निर्धारित शर्तों के तहत 45 साल की लीज पर परियोजना विकसित करने का अवसर मिलेगा। लीज को अगले 45 साल तक बढ़ाने का भी प्रावधान होगा। परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), आईटी-आईटीईएस, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी), डीप-टेक कंपनियों और स्टार्टअप के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही प्रशिक्षण और कौशल विकास केंद्रों की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य नोएडा में तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना और निवेश के नए अवसर तैयार करना है। 50 प्रतिशत क्षेत्र आईटी कंपनियों के लिए आरक्षित प्रस्तावित बिजनेस पार्क के कुल निर्मित क्षेत्र का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा आईटी और ज्ञान आधारित सेवाओं से जुड़ी इकाइयों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इसमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, बीपीओ, टेक्नोलॉजी पार्क और रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। अधिकतम 10 प्रतिशत निर्मित क्षेत्र में फूड कोर्ट, रिटेल आउटलेट और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। शेष क्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्र, कौशल विकास केंद्र, रिसर्च सेंटर और तकनीकी गतिविधियों से जुड़ी सहायक सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। डीबीएफओटी मॉडल पर होगा विकास परियोजना का विकास डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल पर किया जाएगा। इसके तहत चयनित निजी डेवलपर अपने खर्च और जोखिम पर परियोजना का निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और रखरखाव करेगा। उसे 45 साल की रियायत अवधि दी जाएगी। निर्धारित शर्तों के तहत इसे अगले 45 साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा। परियोजना की विस्तृत शर्तें मास्टर डेवलपर के चयन के लिए जारी होने वाले आरएफपी में निर्धारित की जाएंगी। पांच चरणों में पूरा होगा निर्माण परियोजना का निर्माण पांच चरणों में पूरा किया जाएगा। प्रत्येक चरण में निर्धारित फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) का 20 प्रतिशत हिस्सा विकसित करना होगा। पहले चरण में 24 महीने के भीतर 20 प्रतिशत निर्माण पूरा करना होगा, जबकि दूसरे चरण में 36 महीने के भीतर कुल 40 प्रतिशत निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद तीसरे और चौथे चरण में कुल निर्माण क्रमशः 60 और 80 प्रतिशत तक पहुंचाया जाएगा। पांचवें चरण में पूरा निर्धारित एफएआर विकसित करना होगा। अगले चरण का निर्माण शुरू करने के लिए पिछले चरण में विकसित क्षेत्र का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा बाजार में इस्तेमाल या किराये पर उठना जरूरी होगा। हालांकि, मांग कम रहने की स्थिति में भी अगले चरण को पिछले चरण के पूरा होने के बाद 18 महीने से अधिक समय तक टाला नहीं जा सकेगा। पूरी परियोजना अधिकतम 90 महीने यानी साढ़े सात साल में पूरी करनी होगी। ई-बिडिंग से चुना जाएगा डेवलपर मास्टर डेवलपर का चयन तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा। तकनीकी मूल्यांकन 100 अंकों का होगा। इसमें कम से कम 75 अंक हासिल करने वाले आवेदकों की वित्तीय बोली खोली जाएगी। वित्तीय मूल्यांकन में प्राधिकरण की निर्धारित आईटी/आईटीईएस भूमि दर के आधार पर अग्रिम भूमि प्रीमियम और किराये से होने वाली सकल आय में प्राधिकरण की हिस्सेदारी को आधार बनाया जाएगा। दोनों मानकों को 50-50 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। किराये के अलावा पार्किंग, साझा सुविधाओं, यूटिलिटी, को-वर्किंग स्पेस और अन्य व्यावसायिक सेवाओं से होने वाली आय भी राजस्व हिस्सेदारी के दायरे में आएगी। बोर्ड से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद प्राधिकरण परियोजना की पात्रता, वित्तीय मानकों और बोली की विस्तृत शर्तों के साथ आरएफपी जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
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