काशी में दिवाली पर जमकर आतिशबाजी:घाट दीयों से रोशन हुए, गंगा आरती में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
'घर दीपों से सजे और मन खुशियों से।' इसी पावन और दिव्य भाव के साथ महादेव की नगरी काशी में दीपोत्सव का पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बाबा विश्वनाथ के पावन आंगन से लेकर काशी के कोने-कोने और हर घर के आंगन तक उतरे दीपों के दिव्य प्रकाश ने अज्ञान और अंधकार रूपी 'तम' को पूरी तरह से हर लिया। इस पावन अवसर माता अन्नपूर्णा की 51 दीप से आरती उतारी गई। वहीं गंगा आरती में श्रद्धालुओं ने मां गंगा का आशीर्वाद लिया और यहां गंगा सेवा समिति ने शुभ दीपावली का हजारों दिए जलाकर संदेश दिया। श्री काशी विश्वनाथ धाम में मां लक्ष्मी का भव्य पूजन धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को समेटे हुए, लगातार दूसरे साल श्री काशी विश्वनाथ धाम में महालक्ष्मी के विशेष पूजन के साथ दीपोत्सव की भव्य शुरुआत हुई। धाम परिसर में रविवार की शाम ढलते ही लगातार महालक्ष्मी की आराधना की गई। मंदिर परिसर में स्थित श्री सत्यनारायण भगवान के मंदिर में धन और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणपति की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ ही बाबा विश्वनाथ की षोडशोपचार पूजा संपन्न हुई और मां अन्नपूर्णा का भी विशेष पूजन कर विश्व कल्याण की कामना की गई। गंगा आरती के दिया शुभ दिवाली का संदेश
गंगा सेवा निधि की दैनिक संध्या आरती के शुभ दीपावली का संदेश दिया गया। दीपावली के दिन इस आरती में हजारों लोग उपस्थित हुए और मान गंगा से दीपावली दिन आशीर्वाद लिया। इस दौरान दीयों से शुभ दीपावली लिखा गया। लोगों ने मान गंगा और बाबा विश्वनाथ का जयकारा किया और धन धान्य की प्रार्थना किया। माता अन्नपूर्णा की हुई 51 दीपों से आरती
अन्नपूर्णा मठ मंदिर में स्वर्णमयी रूप के दर्शन के तीसरे दिन दीपावली पर भी भक्तों का तांता लगा रहा। वहीं कुछ महिलाएं शाम को मंदिर पहुंचकर दीप जलाती नजर आईं। रविवार की शाम भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मंदिर के महंत ने स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा की 51 दीपों से आरती उतारी। दीपों की रोशनी से पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। आरती के दौरान महंत शंकर पुरी ने देश और प्रदेश की खुशहाली, सुख-समृद्धि और जन-कल्याण के लिए मंगलकामना की। उन्होंने मां अन्नपूर्णा से प्रार्थना की कि देश में अन्न-धन की कभी कमी न हो, हर घर में सुख-शांति बनी रहे और सभी के जीवन में खुशहाली आए। रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से महका परिसर वहीं श्रीकाशी विश्वनाथ धाम को दीपों की अद्भुत कतारों के साथ-साथ पूरे धाम परिसर को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया था। परिसर की भव्यता को बढ़ाने के लिए देश-विदेश के रंग-बिरंगे और सुगंधित पुष्पों का प्रयोग किया गया था, जिसकी महक से पूरा वातावरण भक्तिमय और दिव्य हो गया। इस अलौकिक दृश्य को देखकर हर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध था और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात स्वर्ग धरती पर उतर आया हो।
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