केंद्रीय GST ऑफिस में गिरमिटिया साहित्य पर हिंदी संगोष्ठी:आयुक्त विपुल गुप्ला बोले- हिंदी भाषा के योगदान को भूला नहीं जा सकता, विद्वानों ने रखे विचार

Oct 27, 2026 - 21:12
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केंद्रीय GST ऑफिस में गिरमिटिया साहित्य पर हिंदी संगोष्ठी:आयुक्त विपुल गुप्ला बोले- हिंदी भाषा के योगदान को भूला नहीं जा सकता, विद्वानों ने रखे विचार
केंद्रीय जीएसटी कार्यालय गाजियाबाद में मंगलवार शाम मंगलवार शाम गिरमिटिया साहित्य पर हिंदी संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में शिक्षण संस्थानों से प्राचार्य, प्रधानाचार्य, सरकारी विभागों के अधिकारी, कॉलेजों के शिक्षक, चिकित्सा वर्ग और सामाजिक संगठनों के अध्यक्ष और अन्य विद्वानों ने भाग लिया। CGST के आयुक्त विपुल गुप्ता के संरक्षण और निर्देशन में जहां हिंदी की विरासत को लेकर लगातार कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। आज गाजियाबाद में गिरमिटिया समुदाय के संघर्ष और विरासत पर एक संगोष्ठी हुई। जहां हिंदी के प्रचार, प्रसार और गिरमिटिया साहित्य के बारे में वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इससे पहले कार्यक्रम का शुरूआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। संचालन रहे निधि कुमार झा ने जैसे ही मंच से हिंदी की गजलें और शायरी पढ़ीं तो पूरा हॉल तालियों से गूंजने लगा। जहां पर्दे पर अलग अलग कार्यक्रमों की वीडियो भी प्रस्तुत की गईं। हिंदी साहित्य का योगदान अतुलनीय केंद्रीय माल एवं सेवाकर यानी CGST के आयुक्त विपुल गुप्ता ने मंच से बोलते हुए कहा- ‘गिरमिटिया साहित्य पर हिंदी का योगदान अतुलनीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में यह बोलते रहे हैं। हिंदी की सरल भाषा साहित्य को और भी मजबूत करती है। आज देश के अलग अलग राज्यों में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हिंदी भाषा में गिरमिटिया साहित्य के योगदान की सरहाना की जा रही है। यह कार्यक्रम हिंदी हिंदी के साथ साथ साहित्य से जुड़े साहित्य की किताबों में भी दिखाई देगा। जहां पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। इसमें हिंदी साहित्य की अलग अलग पुस्तकों को प्रदर्शनी में रखा गया। कार्यक्रम का संचालन राज भाषा अधिकारी निधि कुमार झा ने किया। संयुक्त आयुक्त अभिषेक कुमार और साहिल सेठ ने प्रदर्शनी में चित्रों व साहित्य की पुस्तकों के बारे में अवगत कराया। अंग्रेजी राज में जुल्म अधिक हाेते थे मुख्य वक्ता और अतिथि डॉ दीप्ति अग्रवाल ने गिरमिटिया के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी राज में संसाधन नहीं थे। उस समय महिलाओं पर जुल्म होते थे, मैंने जब साहित्य और भाषा को बारीकी से देखा तो पता चला कि इस समाज का योगदान बहुत अधिक है। विदेशों में महिलाएं और शिक्षक आज इसे और आगे बढ़ा रहे हैं। गाजियाबाद में हापुड़ चुंगी के निकट सीजीएसटी भवन रानी झांसी मार्ग पर कार्यक्रम में केंद्र सरकार के कई विभाग भी शामिल हुए। जहां सीजीएसटी के एडिशनल कमिश्नर श्रवण बंसल और अन्य अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में पुस्तक प्रदर्शनी में अलग अलग किताबों के बारे में अतिथियों को अवगत कराया। गिरमिटिया साहित्य विशेषज्ञ डॉ. दीप्ति अग्रवाल इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर गिरमिटिया समाज के इतिहास, साहित्य, सांस्कृतिक विरासत और प्रवासी भारतीयों के संघर्ष पर बात रखी। हिंदी साहित्य में उनके योगदान के बारे और पेंटिंग की भी जानकारी दी। विदेशों तक हिंदी भाषा संगोष्ठी के साथ गिरमिटिया साहित्य से जुड़ी किताबों की प्रदर्शनी भी लगाई, पारंपरिक गिरमिटिया गीतों का गायन भी मुख्य आकर्षण रहा। यह आयोजन नई पीढ़ी को इस समाज के इतिहास से परिचित कराएगा। सीजीएसटी के आफिसर निधि कुमार झा ने बताया कि हिंदी भाषा आज देश के अलावा विदेशों तक भी फैली है। यह अलग अलग रूप में बोली जाती है। कुछ जगह क्षेत्रीय बोलचाल में शब्द अलग हो सकते हैं, लेकिन हिंदी भाषा का योगदान आज भी सबसे अधिक है। गाजियाबाद के लिए बड़ी उपलब्धि रही सीजीएसटी गाजियाबाद आयुक्तालय की हिन्दी पत्रिका 'हिंडन' को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की अखिल भारतीय हिन्दी गृह पत्रिका पुरस्कार योजना में 'क' क्षेत्र के लिए इसी अक्टूबर माह में द्वितीय पुरस्कार मिला। यह गाजियाबाद के लिए बड़ी उपलब्धि रही। दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित सीएसओआई सभागार में आयोजित राजभाषा सम्मेलन में CBIC के अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी ने सीजीएसटी गाजियाबाद के कमिश्नर विपुल गुप्ता को पुरस्कार प्रदान किया था। पुरस्कार मिलने पर आयुक्तालय में खुशी का माहौल रहा। जिसके बाद कमिश्नर विपुल गुप्ता ने सीजीएसटी गाजियाबाद परिवार को बधाई देते हुए कहा था कि भविष्य में पत्रिका को और बेहतर बनाने के साथ हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए आयुक्तालय लगातार काम करता रहेगा।

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