KGMU में कुलसचिव ने किए ट्रांसफर, VC ने किए कैंसिल:9 कर्मचारियों के तबादले पर रोक, कुलपति-कुलसचिव के बीच बढ़ा टकराव
KGMU में कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद और कुलसचिव अर्चना गहरवार के बीच चल रहा प्रशासनिक विवाद गहराता नजर आ रहा है। कुलसचिव की ओर से 24 सितंबर को एकेडमिक काउंसिल और पेंशन सेल में तैनात 9 कर्मचारियों के तबादले किए गए। इसके अगले ही दिन 25 सितंबर को कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने सभी 9 तबादला आदेश निरस्त कर दिए। कुलपति की ओर से जारी आदेश में 24 सितंबर के कार्यालय आदेश संख्या 1005 से 1013 तक को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक स्थगित किया गया है। साथ ही सभी स्थानांतरित कर्मचारियों को अपनी पुरानी तैनाती वाले स्थान पर ही काम करने के निर्देश दिए गए हैं। कुलसचिव ने नौ कर्मचारियों के किए थे तबादले 24 सितंबर को जारी आदेशों में कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी और वरिष्ठ प्रशासनिक सहायकों के नाम शामिल हैं। कुलपति के आदेश के बाद सभी को पुरानी तैनाती पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। निरस्त करने की बताई ये वजह KGMU प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि कर्मचारियों के तबादले से पहले कुलपति से अनुमति लेने के लिए कहा गया था। इसका पालन नहीं किया गया। इसी वजह से तबादले निरस्त किए गए हैं। 23 सितंबर की विशेष कार्यपरिषद बैठक पर भी हुआ था विवाद तबादलों से ठीक एक दिन पहले 23 सितंबर को KGMU में विशेष कार्यपरिषद की बैठक को लेकर भी कुलपति और कुलसचिव आमने-सामने थे। कुलसचिव अर्चना गहरवार ने बैठक की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे स्थगित करने की मांग की थी। उन्होंने छह बिंदुओं में आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि बैठक का एजेंडा, प्रस्ताव और संबंधित दस्तावेज समय से उपलब्ध कराए जाने चाहिए। वहीं, कुलपति की ओर से कहा गया कि विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण मामलों के लिए बैठक जरूरी थी। 18 सितंबर को विशेष बैठक बुलाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन बैठक नहीं बुलाई गई। इसके बाद 23 सितंबर की बैठक का नोटिस जारी किया गया। बैठक में कुलसचिव मौजूद नहीं रहीं और 320 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर फैसला लिया गया। कर्मचारियों ने भी कुलसचिव के खिलाफ किया था प्रदर्शन इससे पहले सितंबर में KGMU कर्मचारी परिषद ने कुलसचिव को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन और हड़ताल की थी। कर्मचारियों ने वेतन, पदोन्नति, कैडर निर्धारण, भर्ती और लंबित मामलों समेत कई मांगें उठाई थीं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कर्मचारियों के बीच नोकझोंक भी हुई थी। बाद में कुलपति से वार्ता के बाद आंदोलन स्थगित किया गया। प्रदर्शन से पहले कुलसचिव ने छह महीने के लिए हड़ताल पर रोक का आदेश भी जारी किया था। उन्होंने अपने कार्यकाल में कर्मचारियों से जुड़े 2461 सेवा मामलों के निस्तारण का दावा किया था। इनमें 485 पदोन्नति, 423 एसीपी, 495 जीपीएफ लोन और 908 वेतन निर्धारण के मामले शामिल बताए गए थे। कर्मचारी परिषद ने इन दावों पर आपत्ति जताई थी। मई में कर्मचारियों ने कुलसचिव को कार्यालय में किया था बंद कुलसचिव और कर्मचारियों के बीच विवाद नया नहीं है। मई में कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर कुलसचिव के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। आरोप था कि कर्मचारियों ने करीब तीन घंटे तक कार्यालय का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया था। इस दौरान कार्यालय की बिजली भी काट दी गई थी।
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