कोहरे में एक्सप्रेसवे पर घटेगी वाहनों की रफ्तार:31 अक्टूबर तक सुरक्षा इंतजाम पूरे करने के निर्देश, 1 नवंबर से 15 फरवरी तक लागू होंगी स्पीड लिमिट

Oct 23, 2026 - 18:04
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कोहरे में एक्सप्रेसवे पर घटेगी वाहनों की रफ्तार:31 अक्टूबर तक सुरक्षा इंतजाम पूरे करने के निर्देश, 1 नवंबर से 15 फरवरी तक लागू होंगी स्पीड लिमिट
सर्दियों में कोहरे के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने तैयारी शुरू कर दी है। आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक और गंगा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएंगे। इसके तहत वाहनों की गति सीमा कम करने, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने, कोहरा गश्ती दल तैनात करने और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी संबंधित एजेंसियों को 31 अक्टूबर 2026 तक जरूरी तैयारियां पूरी करनी होंगी। 15 नवंबर से और कम हो जाएगी वाहनों की रफ्तार यूपीडा के सीईओ दीपक कुमार ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। कोहरे के दौरान कम दिखाई देने से हादसों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सभी एजेंसियों को समय पर सुरक्षा इंतजाम पूरे करने और गति सीमा का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। हल्के वाहनों के लिए 1 से 15 नवंबर तक सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के बीच अधिकतम गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा और रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक 80 किमी प्रति घंटा रहेगी। 15 नवंबर के बाद इसे घटाकर दिन में 80 और रात में 60 किमी प्रति घंटा कर दिया जाएगा। बसों और अन्य एम-2 व एम-3 श्रेणी के वाहनों के लिए शुरुआती अवधि में दिन की गति सीमा 80 और रात की 60 किमी प्रति घंटा होगी। 15 नवंबर के बाद यह सीमा दिन में 60 और रात में 50 किमी प्रति घंटा हो जाएगी। मालवाहक वाहनों की गति सीमा शुरुआत में दिन में 60 और रात में 50 किमी प्रति घंटा रहेगी। 15 नवंबर से दिन में अधिकतम 50 और रात में 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार तय की जाएगी। ये प्रतिबंध 15 फरवरी 2027 तक या कोहरे की स्थिति में सुधार होने तक लागू रहेंगे। गति सीमा तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई एक्सप्रेसवे पर लगे ऑटोमैटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) में गति सीमा के अनुसार बदलाव किए जाएंगे। इससे तय सीमा से तेज वाहन चलाने वालों की निगरानी की जा सकेगी और नियम तोड़ने पर कार्रवाई होगी। 50 मीटर से कम दिखाई देने पर सुरक्षित जगह पहुंचाए जाएंगे वाहन घने कोहरे में जब दृश्यता 50 मीटर से कम होगी, तब सुरक्षा और गश्ती दल पुलिस के साथ मिलकर वाहनों की आवाजाही पर नजर रखेंगे। जरूरत पड़ने पर वाहन चालकों को नजदीकी टोल प्लाजा, पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट या अन्य सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाएगा। वहां वाहनों को रोकने और स्थिति सामान्य होने पर काफिले के रूप में आगे भेजने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी। एंबुलेंस, गश्ती वाहन और दूसरी आपातकालीन सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी। जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त टीमें और संसाधन भी लगाए जाएंगे। फॉग लाइट, रिफ्लेक्टर और साइनबोर्ड की होगी जांच कोहरे के दौरान सड़क साफ दिखाई देने के लिए एक्सप्रेसवे पर लगे रिफ्लेक्टिव टेप और साइनबोर्ड की जांच की जाएगी। प्रवेश और निकास बिंदुओं पर फॉग लाइट लगाई जाएंगी। जिन जगहों पर घना कोहरा छाने की आशंका ज्यादा है, वहां अतिरिक्त रिफ्लेक्टर और ब्लिंकर लगाए जाएंगे। मोड़ों, नदियों और नालों के आसपास के हिस्सों पर खास ध्यान दिया जाएगा। निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के दौरान भी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने होंगे, ताकि वाहन चालकों को किसी तरह की परेशानी न हो। टोल प्लाजा पर यात्रियों को किया जाएगा जागरूक टोल प्लाजा पर पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए वाहन चालकों को गति सीमा और कोहरे में सावधानी बरतने की जानकारी दी जाएगी। रेडियो और एफएम चैनलों पर भी सुरक्षा संबंधी संदेश प्रसारित होंगे। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के प्रवेश-निकास बिंदुओं, टोल प्लाजा और अन्य प्रमुख जगहों पर साइनबोर्ड लगाए जाएंगे। अधिकारी नियमित रूप से करेंगे निरीक्षण यूपीडा के मुख्य अभियंता, मुख्य महाप्रबंधक और सुरक्षा टीमें एक्सप्रेसवे का नियमित निरीक्षण करेंगी। सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर कमियों को दूर कराया जाएगा। सभी व्यवस्थाएं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय सड़क कांग्रेस के लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएंगी। यूपीडा का लक्ष्य सर्दियों में कोहरे के कारण होने वाले हादसों का खतरा कम करना और यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना है।

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