क्या डॉलर के मुकाबले 100 के पार चला जाएगा रुपया विशेषज्ञों की अलग-अलग राय ने बढ़ाई चिंता

भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है और डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है कि क्या रुपया 100 प्रति डॉलर का स्तर पार करेगा या नहीं

क्या डॉलर के मुकाबले 100 के पार चला जाएगा रुपया  विशेषज्ञों की अलग-अलग राय ने बढ़ाई चिंता

दि राइजिंग न्यूज | भारत | 20 मई 2026

भारतीय रुपया इस समय लगातार दबाव में बना हुआ है और डॉलर के मुकाबले नए निचले स्तर पर पहुंचता जा रहा है। 19 मई 2026 को रुपया गिरकर 96 रुपये 52 पैसे प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। साल की शुरुआत में रुपया करीब 89 के आसपास था, लेकिन कुछ ही महीनों में इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार कमजोर हो रही भारतीय मुद्रा ने आम लोगों से लेकर उद्योग जगत तक की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय हालात, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की निकासी ने भारतीय मुद्रा पर भारी दबाव बनाया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि क्या आने वाले समय में रुपया डॉलर के मुकाबले 100 का आंकड़ा पार कर सकता है। इस मुद्दे पर अलग-अलग अर्थशास्त्रियों और वित्त विशेषज्ञों की राय सामने आई है।


कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाया दबाव

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं। तेल की कीमतें 105 से 107 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुकी हैं, जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ गया है और डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी है। यही वजह है कि रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और इसकी कीमत गिरती जा रही है।


विदेशी निवेशकों की निकासी बनी बड़ी वजह

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी भी रुपये की कमजोरी की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। वर्ष 2026 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से लाखों करोड़ रुपये निकाल लिए हैं।जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है। इससे भारतीय मुद्रा और कमजोर होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है।


कुछ विशेषज्ञों ने जताई 100 के पार जाने की आशंका

पूर्व संयुक्त राष्ट्र सलाहकार और अर्थशास्त्री संतोष मेहरोत्रा का मानना है कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो रुपया आसानी से 100 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों में रुपये में आई तेज गिरावट ने अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाला है।मुद्रा मामलों के विशेषज्ञ के एन डे ने भी कहा कि बाजार में जिस तरह की गिरावट देखने को मिल रही है, उससे 100 का स्तर अब केवल कल्पना नहीं रह गया है। उनके अनुसार रुपये में गिरावट की रफ्तार ने बाजार को चौंका दिया है और फिलहाल कोई स्थिर स्थिति दिखाई नहीं दे रही।


कई विशेषज्ञों ने जताया भरोसा

कुछ वित्त विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक रुपये को इतनी तेजी से कमजोर नहीं होने देगा। वित्त विश्लेषक धीरज निम के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है और रुपये को 100 के स्तर तक जाने से रोक सकता है।वहीं अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने भी कहा है कि रुपया कमजोर जरूर हो सकता है, लेकिन फिलहाल उसके 100 के पार जाने की संभावना कम दिखाई देती है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हाल के दिनों में गिरावट उम्मीद से ज्यादा तेज रही है।


संतुलित राय रखने वाले विशेषज्ञ क्या कहते हैं

कुछ अर्थशास्त्री रुपये की नियंत्रित गिरावट को सामान्य आर्थिक प्रक्रिया मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मुद्रा धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से कमजोर होती है तो इससे निर्यात को फायदा मिल सकता है और अर्थव्यवस्था प्रतिस्पर्धी बनी रहती है।समस्या तब पैदा होती है जब गिरावट अचानक और अनियंत्रित हो जाए। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और इसका असर भारतीय मुद्रा पर लगातार दिखाई दे रहा है।


भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका होगी अहम

रुपये को स्थिर बनाए रखने में भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत के पास अभी भी बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जिसकी मदद से बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और विदेशी निवेश वापस लौटता है तो रुपया फिर से मजबूत हो सकता है। लेकिन यदि वैश्विक संकट और गहराता है, तो 100 रुपये प्रति डॉलर का स्तर वास्तविकता बन सकता है।


आने वाले महीने रहेंगे चुनौतीपूर्ण

अलग-अलग विशेषज्ञों की राय भले अलग हो, लेकिन सभी इस बात पर सहमत दिखाई दे रहे हैं कि आने वाले महीने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आसान नहीं होंगे। महंगाई, तेल की कीमतें, विदेशी निवेश और वैश्विक तनाव जैसे कई बड़े कारक आने वाले समय में भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगे।आम लोगों के लिए इसका सीधा असर महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, आयातित वस्तुओं और रोजमर्रा के खर्च पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अब हर किसी की नजर रुपये और डॉलर के बदलते समीकरण पर टिकी हुई है।