LPG की मांग 12% घटी, पेट्रोल-डीजल की खपत क्यों बढ़ी
अक्टूबर 2026 में भारत में एलपीजी की खपत सालाना आधार पर 12.11 प्रतिशत घट गई। वहीं पेट्रोल की मांग 3.11 प्रतिशत और डीजल की मांग 11.69 प्रतिशत बढ़ी। मध्य पूर्व में तनाव, आपूर्ति में बाधा और पीएनजी का बढ़ता इस्तेमाल एलपीजी की खपत में गिरावट के प्रमुख कारण हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 2 नवंबर 2026
देश में रसोई गैस यानी एलपीजी की खपत में अक्टूबर 2026 के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर की तुलना में इस साल एलपीजी की खपत 12.11 प्रतिशत घटकर 26.4 लाख टन रह गई। दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिली है। आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में पेट्रोल की खपत 3.77 मिलियन टन पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले 3.11 प्रतिशत अधिक है। वहीं डीजल की मांग में 11.69 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और इसकी खपत बढ़कर 8.15 मिलियन टन हो गई।
एलपीजी की खपत में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में जारी तनाव और इससे प्रभावित हुई गैस आपूर्ति को माना जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित होने से घरेलू बाजार में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ा है। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में पाइप के जरिए प्राकृतिक गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां लोगों को एलपीजी के स्थान पर पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे भी एलपीजी की खपत प्रभावित हुई है।
वहीं पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ने के पीछे देश में सड़क परिवहन, वाहनों के इस्तेमाल और व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। त्योहारी मौसम के दौरान आवाजाही और परिवहन की जरूरत बढ़ने से भी ईंधन की खपत में इजाफा हुआ है। इस तरह अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि जहां एक ओर रसोई गैस की मांग में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल की खपत लगातार बढ़ी है।
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