उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका! आदित्य के लिए सीट छोड़ने वाले सचिन अहीर अब शिंदे के साथ

महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। महाविकास आघाड़ी ने जे. एम. अभ्यंकर को उम्मीदवार बनाया है, जबकि उद्धव ठाकरे के करीबी रहे सचिन अहीर ने शिंदे गुट की ओर से नामांकन दाखिल कर सभी को चौंका दिया। कभी आदित्य ठाकरे के लिए सीट छोड़ने वाले सचिन अहीर का यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।

उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका! आदित्य के लिए सीट छोड़ने वाले सचिन अहीर अब शिंदे के साथ

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 30 जून 2026


महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर

महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। महाविकास आघाड़ी ने वरिष्ठ शिक्षक और विधान परिषद सदस्य जे. एम. अभ्यंकर को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट ने उद्धव ठाकरे के करीबी रहे सचिन अहीर को मैदान में उतारकर राजनीतिक मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।


उद्धव ठाकरे को करीबी नेता से मिला बड़ा झटका

सचिन अहीर लंबे समय तक उद्धव ठाकरे और शिवसेना के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में उनकी पहचान आदित्य ठाकरे के करीबी सहयोगी के रूप में रही है। उन्होंने एक समय आदित्य ठाकरे के लिए अपनी विधानसभा सीट तक छोड़ दी थी, लेकिन अब वही सचिन अहीर शिंदे गुट की ओर से चुनाव मैदान में उतरकर उद्धव ठाकरे के लिए नई चुनौती बन गए हैं। इसे महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा सियासी संदेश माना जा रहा है।


एकनाथ शिंदे ने फिर चौंकाया

उपसभापति पद के उम्मीदवार को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। माना जा रहा था कि शिंदे गुट किसी दूसरे नेता को मैदान में उतार सकता है, लेकिन अंतिम समय में सचिन अहीर के नाम का ऐलान कर एकनाथ शिंदे ने सभी को चौंका दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है और विपक्ष पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।


महाविकास आघाड़ी ने जे. एम. अभ्यंकर पर जताया भरोसा

महाविकास आघाड़ी ने उपसभापति पद के लिए जे. एम. अभ्यंकर को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। गठबंधन को उम्मीद है कि उन्हें सहयोगी दलों का पूरा समर्थन मिलेगा। दूसरी ओर शिंदे गुट भी अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। ऐसे में यह चुनाव केवल एक पद का नहीं बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक ताकत का भी संकेत माना जा रहा है।


एक जुलाई को होगा मतदान

विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए मतदान एक जुलाई को होगा। नामांकन की प्रक्रिया 30 जून को पूरी की जाएगी। चुनाव परिणाम यह तय करेगा कि सदन में किस पक्ष का प्रभाव अधिक मजबूत है। इस मुकाबले पर राज्य के राजनीतिक दलों के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषकों की भी नजर बनी हुई है।