मालवी आलू समेत तीन उत्पादों को जीआई टैग
मध्य प्रदेश के मालवी आलू, मालवा के गराडू और सैलाना के बालम खीरे को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ है। इस मान्यता से इन उत्पादों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होने के साथ किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
दि राइजिंग न्यूज़ | भोपाल | 24 जून 2026
मालवी आलू को मिली नई पहचान
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कृषि उत्पाद मालवी आलू को भौगोलिक संकेतक अर्थात जीआई टैग प्रदान किया गया है। इसके साथ ही मालवा क्षेत्र के गराडू और रतलाम जिले के सैलाना क्षेत्र में उगाए जाने वाले बालम खीरे को भी यह विशेष मान्यता मिली है। इस उपलब्धि से इन उत्पादों की पहचान देश और विदेश के बाजारों में और मजबूत होगी तथा किसानों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।
गराडू और बालम खीरे की विशेषता
बागवानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार मालवा का गराडू और सैलाना का बालम खीरा अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और स्वाद के कारण लंबे समय से लोकप्रिय रहे हैं।बालम खीरा अपने बड़े आकार, रसदार स्वाद और विशिष्ट रंग के लिए जाना जाता है। वहीं गराडू एक जड़ वाली सब्जी है, जो पकने के बाद बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम रहती है। सर्दियों के मौसम में इसकी मांग काफी अधिक रहती है और यह मालवा क्षेत्र के लोकप्रिय व्यंजनों में शामिल है।
मालवी आलू की खास गुणवत्ता
इंदौर जिले में बड़े पैमाने पर उगाए जाने वाले मालवी आलू को उसकी विशिष्ट गुणवत्ता के कारण जीआई टैग मिला है। अधिकारियों के अनुसार इस आलू में शर्करा और स्टार्च की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।इसी कारण इससे बनने वाले चिप्स, वेफर्स और फ्रेंच फ्राइज़ तलने के बाद अधिक गहरे रंग के नहीं होते और उनकी गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है। यही वजह है कि कई खाद्य प्रसंस्करण कंपनियां सीधे किसानों से इसकी खरीद करती हैं।
हजारों किसानों को होगा लाभ
जानकारी के अनुसार इंदौर जिले में लगभग 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मालवी आलू की खेती की जाती है और करीब 35 हजार किसान इससे जुड़े हुए हैं।वहीं रतलाम जिले में बालम खीरे की खेती लगभग 100 हेक्टेयर और गराडू की खेती करीब 120 हेक्टेयर क्षेत्र में होती है। बड़ी संख्या में किसान इन फसलों की खेती से अपनी आजीविका चलाते हैं।
निर्यात और बाजार के अवसर बढ़ेंगे
जीआई टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की ब्रांड पहचान मजबूत होगी। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने, नए बाजारों तक पहुंच बनाने और निर्यात के अवसर बढ़ाने में सहायता मिलेगी।जीआई टैग किसी उत्पाद को उसके भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी विशिष्ट पहचान और गुणवत्ता के आधार पर कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। इससे उत्पाद की मौलिकता सुरक्षित रहती है और नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
पहले भी कई उत्पादों को मिल चुकी है मान्यता
मध्य प्रदेश के कई अन्य प्रसिद्ध उत्पादों को पहले ही जीआई टैग प्राप्त हो चुका है। इनमें रतलामी सेव, कड़कनाथ चिकन, रियावन लहसुन, चिन्नौर चावल और सुंदरजा आम प्रमुख हैं।अब मालवी आलू, गराडू और बालम खीरे के इस सूची में शामिल होने से प्रदेश की कृषि और खाद्य उत्पादों की पहचान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।