मंगलपुर गांव के लोग गहने बेचकर करा रहे इलाज:किसी ने 60 हजार तो किसी ने 40 हजार रुपए खर्च किए, महामारी से रोजगार पर संकट

Oct 30, 2026 - 14:33
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मंगलपुर गांव के लोग गहने बेचकर करा रहे इलाज:किसी ने 60 हजार तो किसी ने 40 हजार रुपए खर्च किए, महामारी से रोजगार पर संकट
मंगलपुर गांव में बुखार और संक्रमण का प्रकोप अब लोगों की सेहत के साथ उनकी आर्थिक स्थिति पर भी भारी पड़ रहा है। गांव में एक ही परिवार के कई सदस्य बीमार पड़ रहे हैं। इलाज के लिए कोई गहने बेच रहा है तो कोई जमा पूंजी खर्च कर रहा है। किसी परिवार ने 30 हजार तो किसी ने 40 हजार और किसी ने 60 हजार रुपए तक इलाज पर खर्च कर दिए हैं। जिला मलेरिया अधिकारी शरद चंद्र पांडेय के मुताबिक, गांव में 60 लोगों के सैंपल लेकर जांच कराई गई, जिनमें 5 लोगों की रिपोर्ट टाइफाइड पॉजिटिव आई है। पानी के नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट 2-3 दिन में आने की उम्मीद है। अधिकारी ने पानी उबालकर पीने की सलाह दी है। गहने बेचकर जुटा रहे इलाज का पैसा गांव में बीमारी का असर इतना बढ़ गया है कि परिवारों को इलाज के लिए अपनी जमा पूंजी और कीमती सामान तक बेचना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि कई परिवारों ने सोने-चांदी के गहने बेचकर अस्पताल का खर्च उठाया है। किसी ने 30 हजार तो किसी ने 40 हजार रुपए तक खर्च किए हैं। कुछ परिवारों का इलाज का खर्च 60 हजार रुपए तक पहुंच गया है। एक साथ परिवार के कई सदस्यों के बीमार होने से खर्च कई गुना बढ़ गया है। ऐसे में लोगों के सामने इलाज कराने और घर का खर्च चलाने, दोनों की चुनौती खड़ी हो गई है। एक घर में 2-3 मरीज, मजदूरी भी छूटी ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में ऐसे कई परिवार हैं, जहां दो से तीन सदस्य एक साथ बीमार हैं। बीमारी के कारण मजदूरी करने वाले लोग भी काम पर नहीं जा पा रहे। परिवार का कमाने वाला सदस्य ही बीमार पड़ रहा है तो रोज की आमदनी बंद हो जा रही है। एक ग्रामीण ने बताया कि परिवार में बेटा मजदूरी करता था, लेकिन उसके और परिवार के अन्य सदस्यों के बीमार होने से कमाई रुक गई। अब इलाज का खर्च उठाने के साथ खाने-पीने की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है। अस्पताल में भर्ती, ऊपर से दवाइयों का खर्च ग्रामीणों ने बताया कि कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। बुखार, शरीर में दर्द, उल्टी, कमजोरी और प्लेटलेट्स कम होने की शिकायत के बाद जांच और इलाज पर लगातार खर्च हो रहा है। जड़ावती देवी ने बताया कि उनके दोनों बच्चे करीब 10 दिनों से बीमार हैं। डॉक्टर बोले- एक महीने से आ रहे ऐसे मरीज स्थानीय डॉक्टर प्रवेश मिश्रा ने बताया कि मरीजों की संख्या पहले से कम हुई है लेकिन गाँव में अभी भी महामारी जैसी स्थिति बनी हुई है।करीब 2 महीने से गांव में बुखार, जोड़ों में दर्द, उल्टी, जी मिचलाने और लिवर में सूजन की शिकायत वाले मरीज लगातार आ रहे हैं। कुछ मरीजों में टाइफाइड पॉजिटिव मिला है, जबकि कुछ में डेंगू की शिकायत भी सामने आई है। उनका कहना है कि एक घर में एक मरीज के बीमार होने के बाद दूसरे सदस्य भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इससे परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। फिलहाल पानी की रिपोर्ट का इंतजार जिला मलेरिया अधिकारी शरद चन्द्र पांडेय ने बताया कि, शुरुआती जांच में मलेरिया और डेंगू के मामले सामने नहीं आए हैं। 60 लोगों की जांच में 5 टाइफाइड पॉजिटिव मिले हैं। गांव के पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद पानी की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल ग्रामीणों को पानी उबालकर ठंडा करने के बाद पीने की सलाह दी गई है। पोखरी से फैल रही बीमारी गांव वालों का भी कहना है कि इस बीमारी की वजह गाँव में बनी हुई पोखरी ही है जिसमें सीवर का पूरे गाँव के सीवर का गंदा पानी आता है। आसपास टॉयलेट भी बने हुए हैं और पोखरी के अगल बगल हैंडपंप और बोरवेल लगे हुए हैं, जिससे जो पानी निकलता है उसे पीने से लोग बीमार पड़ रहे हैं। ग्रामीण बोलें- ग्रामप्रधान नहीं करता काम स्थानीय निवासियों ने कहा कि यहां का प्रधान कोई काम नहीं करता है जब पोखरी सीवर का गंदा पानी डालना शुरु हुआ था तभी हमने मना किया था इसके बाद भी पानी यहां आता है। जिससे अब आसपास के बोरवेल में पीला पानी आने लगा है। बीमारी में ना सिर्फ दर्द से हमारी कमर तोड़ी है बल्कि अब आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ रहा है।

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