राजकोट डिमोलिशन ड्राइव के खर्च पर बवाल

गुजरात के राजकोट में अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए गए मेगा डिमोलिशन अभियान के बाद अब करोड़ों नहीं बल्कि लाखों रुपये के खानपान और पेयजल खर्च को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम के रिकॉर्ड में चाय, नाश्ता, भोजन और पानी पर करीब 46 लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं। खर्च की राशि सामने आने के बाद स्टैंडिंग कमेटी ने बिल पर रोक लगा दी है और अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।

राजकोट डिमोलिशन ड्राइव के खर्च पर बवाल

दि राइजिंग न्यूज़ | राजकोट | 27 जून 2026

गुजरात के राजकोट में अवैध निर्माणों को हटाने के लिए चलाए गए मेगा डिमोलिशन अभियान के बाद अब खर्च को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम द्वारा अभियान के दौरान चाय, नाश्ता, भोजन, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं पर किए गए खर्च का ब्योरा सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।खर्च से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार केवल खानपान और पेयजल पर लाखों रुपये खर्च किए गए, जिसके बाद नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी ने संबंधित बिलों पर फिलहाल रोक लगा दी है और अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।

फरवरी में चला था मेगा अभियान

यह मामला राजकोट के जंगलेश्वर क्षेत्र से जुड़ा है, जहां फरवरी 2026 में नगर निगम ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। आजी नदी के किनारे और टाउन प्लानिंग रोड के आसपास मौजूद अवैध निर्माणों को हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया था।नगर निगम के अनुसार इस अभियान के दौरान लगभग 1,400 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। कार्रवाई को सफल बनाने के लिए नगर निगम, पुलिस और अन्य सरकारी विभागों के लगभग 4,800 अधिकारी, कर्मचारी और श्रमिक तैनात किए गए थे।

चाय और नाश्ते पर लाखों का खर्च

नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार अभियान के दौरान कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बड़े पैमाने पर चाय, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की गई थी।दस्तावेजों में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक 21,310 कप चाय-बिस्किट, गांठिया-जलेबी, पोहा तथा अन्य नाश्ते की सामग्री पर कुल 6 लाख 30 हजार 946 रुपये खर्च किए गए।इसके अलावा अभियान के दौरान विशेष भोजन व्यवस्था भी की गई। रिकॉर्ड में 13,390 स्पेशल लंच पैकेट, मसाला छाछ और 4,000 नींबू-अदरक शरबत की बोतलों का उल्लेख है। इन मदों पर 20 लाख 68 हजार 500 रुपये खर्च दर्शाया गया है।इस प्रकार केवल खानपान पर कुल 27 लाख 20 हजार 946 रुपये का बिल तैयार किया गया।

पानी और मंडप का खर्च भी चर्चा में

विवाद केवल भोजन तक सीमित नहीं है। दस्तावेजों के अनुसार अभियान के दौरान मिनरल वाटर की खरीद पर 12 लाख 40 हजार 28 रुपये खर्च किए गए।इसके अतिरिक्त मंडप और अन्य अस्थायी व्यवस्थाओं पर 6 लाख 70 हजार 678 रुपये खर्च दिखाए गए हैं।इन सभी मदों को जोड़ने पर अभियान के दौरान कुल खर्च लगभग 46 लाख 31 हजार रुपये तक पहुंच जाता है।

स्टैंडिंग कमेटी ने मांगा जवाब

जब यह प्रस्ताव भुगतान की मंजूरी के लिए नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तब सदस्यों ने खर्च की राशि पर गंभीर सवाल उठाए।कमेटी का कहना है कि तोड़फोड़ और अतिक्रमण हटाने जैसी कार्रवाई के दौरान खानपान पर इतना बड़ा खर्च असामान्य प्रतीत होता है। इसी वजह से बिल को फिलहाल मंजूरी नहीं दी गई है।कमेटी ने संबंधित अधिकारियों से पूरे खर्च का विस्तृत ब्यौरा और लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है।

पानी के खर्च पर उठे सबसे ज्यादा सवाल

सबसे अधिक चर्चा मिनरल वाटर पर हुए खर्च को लेकर हो रही है। यदि एक 200 मिलीलीटर पानी की बोतल की औसत कीमत पांच रुपये मानी जाए तो 12.40 लाख रुपये में लगभग ढाई लाख के आसपास पानी की बोतलें खरीदी जा सकती थीं।यही कारण है कि विपक्षी दलों के साथ-साथ स्थानीय नागरिक भी खर्च की वास्तविकता और पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।

कांग्रेस ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

कांग्रेस ने पूरे मामले को कथित भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।राजकोट कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजदीपसिंह जाडेजा ने कहा कि एक तरफ लोगों के घर और दुकानें तोड़ी जा रही थीं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों के खानपान पर जनता के कर के पैसे का भारी खर्च किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है और इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

नगर निगम ने दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद नगर निगम अधिकारियों ने अपना पक्ष भी रखा है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान कई दिनों तक चला और इसमें हजारों कर्मचारी लगातार ड्यूटी पर मौजूद रहे।उनके अनुसार कार्य में बाधा न आए और कर्मचारी मौके से बाहर न जाएं, इसलिए भोजन, चाय, नाश्ता और पेयजल की व्यवस्था करना प्रशासनिक आवश्यकता थी।नगर निगम का कहना है कि सभी खर्च निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किए गए हैं और स्टैंडिंग कमेटी को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

जांच के बाद होगा फैसला

फिलहाल खर्च से जुड़े बिलों को मंजूरी नहीं मिली है। स्टैंडिंग कमेटी अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण और दस्तावेजों की समीक्षा करेगी। इसके बाद ही भुगतान और आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।राजकोट नगर निगम का यह मामला अब प्रशासनिक खर्च, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में जांच और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद इस विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।