भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कैसे तय होते हैं हर दिन बदलने वाले रेट का पूरा गणित समझिए
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स और अन्य लागतों के आधार पर तय होती हैं। तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं। इसका सीधा असर आम जनता की जेब और देश की महंगाई पर पड़ता है।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 14 मई 2026
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रहे बदलाव ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कभी दाम बढ़ते हैं तो कभी घटते हैं, जिससे लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इनकी कीमतें तय कौन करता है और किस आधार पर हर दिन रेट बदले जाते हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल एक फैक्टर पर निर्भर नहीं होतीं, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार, टैक्स व्यवस्था और कई आर्थिक कारण शामिल होते हैं। इसी वजह से देश के अलग-अलग शहरों में ईंधन के दाम अलग-अलग देखने को मिलते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पूरी तरह निर्भर है कीमतों का आधार
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत में भी ईंधन के दाम बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनाव, युद्ध या आपूर्ति में कमी भी कीमतों को प्रभावित करती है। यही कारण है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट वैश्विक घटनाओं से सीधे जुड़े रहते हैं।
कौन तय करता है पेट्रोल-डीजल की कीमतें
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मुख्य रूप से सरकारी तेल विपणन कंपनियां तय करती हैं। इनमें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, उत्पादन लागत और अन्य खर्चों को ध्यान में रखकर रोजाना कीमतों की समीक्षा करती हैं। पहले कीमतों की समीक्षा हर 15 दिन में होती थी, लेकिन जून 2017 से इसे बदलकर दैनिक आधार पर कर दिया गया है। अब हर सुबह 6 बजे नए रेट जारी किए जाते हैं।
टैक्स की वजह से भी बढ़ता है ईंधन का दाम
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में टैक्स का बड़ा हिस्सा शामिल होता है। केंद्र सरकार की ओर से उत्पाद शुल्क लगाया जाता है, जबकि राज्य सरकारें अपने स्तर पर मूल्य संवर्धित कर वसूलती हैं। अलग-अलग राज्यों में टैक्स दर अलग होने के कारण देश के हर शहर में ईंधन की कीमतें भी अलग दिखाई देती हैं। यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में पेट्रोल-डीजल के दामों में अंतर देखने को मिलता है। टैक्स का यह ढांचा अंतिम कीमत को काफी प्रभावित करता है।
किन परिस्थितियों में बढ़ते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो भारत में भी ईंधन महंगा हो जाता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी कीमतों को प्रभावित करती है। युद्ध, वैश्विक संकट और सप्लाई में कमी जैसी स्थितियां भी तेल की कीमतें बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। कई बार सरकार आम जनता को राहत देने के लिए टैक्स में कटौती करती है, जिससे कीमतों में अस्थायी राहत मिलती है।
हर दिन क्यों बदलते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट
जून 2017 से भारत में डेली प्राइस रिवीजन सिस्टम लागू किया गया है। इसका मतलब है कि अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा हर दिन की जाती है। इसी वजह से हर सुबह 6 बजे नए रेट जारी होते हैं। यह प्रणाली बाजार के हिसाब से कीमतों को संतुलित रखने के लिए बनाई गई है। इससे तेल कंपनियों को भी अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव के अनुसार कीमतों को एडजस्ट करने में आसानी होती है।
आम आदमी की जिंदगी पर सीधा असर
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। जब ईंधन महंगा होता है तो ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ जाता है, जिससे सब्जी, अनाज और अन्य जरूरी सामान की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं। इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है। इसी वजह से ईंधन की कीमतें देश की अर्थव्यवस्था में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं और हर वर्ग के लोगों को प्रभावित करती हैं।v