दो साल की कैद का खौफनाक सच

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक झोला निर्माण फैक्ट्री से 13 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें नौकरी का झांसा देकर लाया गया, मोबाइल और पहचान पत्र छीन लिए गए तथा दो वर्षों तक अमानवीय परिस्थितियों में कैद रखकर काम कराया गया।

दो साल की कैद का खौफनाक सच

दि राइजिंग न्यूज़ | मुजफ्फरनगर | 25 जून 2026

फैक्ट्री में कैद मिली 13 जिंदगियां

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बंधुआ मजदूरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। श्रम विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक झोला निर्माण फैक्ट्री से 13 मजदूरों को मुक्त कराया गया। अधिकारियों के अनुसार मजदूरों को फैक्ट्री परिसर में बंधक बनाकर रखा गया था और उन पर निगरानी के लिए दो पिटबुल कुत्ते तैनात किए गए थे।

मजदूर के भागने से खुला राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री से निकलने में सफल रहा और उसने पुलिस को पूरी आपबीती बताई। सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने तत्काल संयुक्त टीम गठित कर फैक्ट्री पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उनके बयान दर्ज किए गए।

नौकरी का झांसा देकर बनाया बंधक

मुक्त कराए गए मजदूरों ने बताया कि उन्हें बेहतर रोजगार और अधिक वेतन का लालच देकर फैक्ट्री में लाया गया था। वहां पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड छीन लिए गए। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें परिवार के सदस्यों से संपर्क करने की अनुमति नहीं थी और पिछले लगभग दो वर्षों से वे फैक्ट्री परिसर में ही रहने को मजबूर थे।

पिटबुल के डर में गुजर रहे थे दिन

पीड़ितों के अनुसार फैक्ट्री परिसर में दो पिटबुल कुत्ते रखे गए थे, जिनके कारण मजदूर हमेशा भय में रहते थे। कड़ी निगरानी और डर के माहौल के चलते कोई भी वहां से भागने का साहस नहीं कर पाता था। प्रशासन का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

विरोध करने पर होती थी मारपीट

मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनसे लगातार काम कराया जाता था लेकिन बदले में मजदूरी नहीं दी जाती थी। भोजन के नाम पर केवल एक बार सूखी रोटी दी जाती थी। विरोध करने या भागने की कोशिश करने पर लाठियों और कोड़ों से पिटाई की जाती थी। रेस्क्यू के दौरान कई मजदूरों के शरीर पर चोट और अत्याचार के निशान पाए गए। पुलिस ने फैक्ट्री परिसर से मारपीट में इस्तेमाल होने वाली लाठियां और अन्य सामान भी बरामद किया है।

कई राज्यों और नेपाल से लाए गए थे मजदूर

रेस्क्यू किए गए मजदूरों की पहचान रामू, विक्रम, नारायण, सीताराम, संतोष, शिवम जाटव, जगदीश, राजहंस, साहिल, रंजीत पासवान, दिलशाद, उज्ज्वल और सोनू चौहान के रूप में हुई है। ये मजदूर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मजदूर नेपाल से भी लाए गए थे।

दो आरोपी गिरफ्तार मुख्य मालिक फरार

पुलिस ने मामले में फैक्ट्री से जुड़े दो मुख्य आरोपियों शिवम त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं फैक्ट्री का मुख्य मालिक अभी फरार बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

मौत और लापता मजदूरों की भी जांच

एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह जानकारी सामने आई है कि पिछले दो वर्षों के दौरान यातनाओं के कारण एक मजदूर की मौत हुई थी जबकि दो अन्य मजदूर लापता बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इस मामले की जांच हत्या, बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी के विभिन्न पहलुओं से कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।