शरद पूर्णिमा पर च्यवन मुनि आश्रम पर श्रद्धालुओं भीड़:पोखरे में भक्तों ने लगाई डुबकी, मेले में खरीदार उमड़े

Oct 26, 2026 - 11:05
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शरद पूर्णिमा पर च्यवन मुनि आश्रम पर श्रद्धालुओं भीड़:पोखरे में भक्तों ने लगाई डुबकी, मेले में खरीदार उमड़े
गोंडा में जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर पंडरी कृपाल विकासखंड अंतर्गत सुभागपुर स्थित महर्षि च्यवन आश्रम पर आज सोमवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया गया है। जहां सुबह 6 बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है आज सोमवार सुबह 9:30 बजे तक हजारों श्रद्धालु आश्रम स्थित ऐतिहासिक पोखरे में आस्था की डुबकी लगा चुके है। धार्मिक मान्यता है कि इस पवित्र सरोवर में स्नान करने से चर्म रोग दूर होते हैं और शरीर निरोगी रहता है। हालांकि, इस बार सरोवर में फैली गंदगी और प्रशासन की उपेक्षा के बीच ही श्रद्धालुओं को किसी तरह डुबकी लगानी पड़ी। मेले में खिलौने, घरेलू सामान और आगामी धनतेरस व दीपावली पर्व को लेकर सजी दुकानों पर लोगों ने जमकर खरीदारी की। तीन तस्वीरें देखिए ​सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। देहात कोतवाली समेत कई थानों की पुलिस बल मौके पर मुस्तैद है। मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। हर वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान रहता है। मान्यता है कि महर्षि च्यवन ने इसी स्थान पर हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। दीर्घ तपस्या के कारण उनके शरीर पर दीमकों ने बांबी (मिट्टी का टीला) बना ली थी। एक बार सूर्यवंशी राजा शर्याति अपनी पुत्री सुकन्या के साथ यहां आए। सुकन्या ने कौतूहलवश मिट्टी के ढेर में चमकती दो मणियों जैसी वस्तुओं में सरकंडा चुभो दिया, जो वास्तव में समाधिस्थ महर्षि की आंखें थीं। आंखों से रक्त बहता देख राजा शर्याति ने मिट्टी हटवाई, तो महर्षि को दृष्टिहीन पाया। ​पश्चाताप की अग्नि में जल रही राजकुमारी सुकन्या ने वहीं रहकर महर्षि की सेवा करने का संकल्प लिया। सेवा और तपस्या से प्रसन्न होकर बाद में महर्षि ने जड़ी-बूटियों के योग से दिव्य रसायन ‘च्यवनप्राश’ तैयार किया, जिसके सेवन से वे पुन: नवयौवन को प्राप्त हुए और सुकन्या से विवाह किया। लोकमान्यता के अनुसार, महर्षि ने इस पोखरे को वरदान दिया था कि शरद पूर्णिमा के दिन इसमें स्नान करने वाला व्यक्ति रोगमुक्त रहेगा। तभी से प्रतिवर्ष यहां शरद पूर्णिमा पर भव्य मेला लगता आ रहा है। देहात कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि मेले को लेकर के सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं पानी कम है ऐसे में फिर भी लोगों को अधिक पानी में न जाने की सलाह दी जा रही है।

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