संभल के गंगा घाटों पर शरद पूर्णिमा का स्नान:एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई, अलग-अलग जिलों से पहुंचे लोग
संभल की गंगा में शरद पूर्णिमा पर रविवार की दोपहर 01 बजे तक 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई है। सुबह 06 बजे से श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर पहुंचना शुरू कर दिया था, जनपद के अलावा अन्य जनपदों से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट रहा। जनपद संभल की तहसील गुन्नौर के राजघाट गंगा, सिसौना डांडा, श्रीविष्णु देव, हरिबाबा बांध के अलावा अस्थाई असदपुर, सांकराघाट पर जनपद के अलावा अलीगढ़, बुलंदशहर, बदायूं, बरेली, रामपुर से आई श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। श्री विष्णु देव घाट पर जलस्तर पिछले चार महीने के मुकाबले कम हो गया है। यह स्थिति अन्य घाटों पर भी देखने को मिली। पहले गंगा के गहरे पानी को देखते हुए बैरिकेड किया गया था लेकिन अब स्थिति सामान्य हो गई है। श्रीविष्णुदेव, सिसौना घाट थाना रजपुरा एवं राजघाट थाना बबराला के अंतर्गत आता है। पं. शोभित शास्त्री ने बताया कि शरद पूर्णिमा का स्थान आज भी हो रहा है और कल 26 अक्टूबर को भी होगा। थाना जुनावई प्रभारी धीरज सिंह, गुन्नौर थाना प्रभारी संजय कुमार, बबराला थाना प्रभारी लवनीश चौधरी, रजपुरा थाना प्रभारी संदीप चौधरी पुलिस फोर्स के साथ गंगा घाटों पर अलर्ट रहें। वहीं एएसपी (दक्षिणी) मनोज रावत, एसडीएम अवधेश कुमार, सीओ अंकित मिश्रा एवं तहसीलदार रवि सोनकर ने गंगा घाटों का निरीक्षण किया। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वर्ष में केवल शरद पूर्णिमा की रात को ही चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है, उसकी किरणों से अमृत बरसता है। इस रात को 'कोजागरी पूर्णिमा' भी कहते हैं, जिसका अर्थ है "कौन जाग रहा है?" मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और आराधना करने वालों को अपनी कृपा बरसाती हैं। भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी चांदनी रात में श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था।
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