संभल में शरद पूर्णिमा पर गंगा स्नान:2 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई, राजघाट पर 500 दुकानें लगीं
संभल की गंगा में शरद पूर्णिमा पर अपराह्न 12 बजे तक 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई है। सुबह 04 बजे से श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर पहुंचना शुरू कर दिया था, जनपद के अलावा अन्य जनपदों से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट रहा। राजघाट गंगा घाट पर स्नान करने का मेले का आयोजन किया गया, जिसमें खाने पीने से लेकर प्रसाद की दुकानों सहित अन्य चीजों की 500 से अधिक दुकानें लगाई गई। जनपद संभल की तहसील गुन्नौर के राजघाट गंगा, सिसौना डांडा, श्रीविष्णु देव, हरिबाबा बांध के अलावा अस्थाई असदपुर, सांकराघाट पर जनपद के अलावा अलीगढ़, बुलंदशहर, बदायूं, बरेली, रामपुर से आई श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। श्रीविष्णु देव घाट और राजघाट पर जलस्तर पिछले चार महीने के मुकाबले कम हुआ है, यह स्थिति अन्य घाटों पर भी देखने को मिली और श्रद्धालुओं ने बेरिकेट के अंदर रहकर ही स्नान किया है। श्रीविष्णुदेव, सिसौना घाट थाना रजपुरा एवं राजघाट थाना बबराला के अंतर्गत आता है। राजघाट गंगा का कुछ जिसका ऐसा भी था जहां अभी भी किनारे बेरीकटिंग की गई।
आचार्य मोनू वशिष्ठ ने कहा कि शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। आज महाऋषि वाल्मीकि जी की जयंती भी है। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा देवताओं के लिए मानी जाती है, जबकि अमावस्या पितरों के लिए होती है। सभी श्रद्धालुओं के लिए शरद पूर्णिमा का महत्व बढ़ा हैं। माँ भगवती सबकी मनोकामना पूर्ण करें। हर हर गंगे, नमामि गंगे। थाना जुनावई प्रभारी धीरज सिंह, गुन्नौर थाना प्रभारी संजय कुमार, बबराला थाना प्रभारी लवनीश चौधरी, रजपुरा थाना प्रभारी संदीप चौधरी पुलिस फोर्स के साथ गंगा घाटों पर अलर्ट रहें। शरद पूर्णिमा की रात को ही चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है, उसकी किरणों से अमृत बरसता है। इस रात को 'कोजागरी पूर्णिमा' भी कहते हैं, जिसका अर्थ है "कौन जाग रहा है?" मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और आराधना करने वालों को अपनी कृपा बरसाती हैं।
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