ट्रंप की बैठक बेनतीजा, ईरान पर अड़ा अमेरिका ; दो घंटे चली चर्चा

व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई दो घंटे लंबी बैठक के बावजूद ईरान समझौते पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका। अमेरिका अपनी कठोर शर्तों पर कायम है जबकि ईरान उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। बातचीत के साथ-साथ सैन्य दबाव भी जारी है, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम होने के बजाय और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

ट्रंप की बैठक बेनतीजा, ईरान पर अड़ा अमेरिका ; दो घंटे चली चर्चा

दि राइजिंग न्यूज़। वॉशिंगटन। 1 जून 2026

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर जारी कूटनीतिक हलचल के बीच व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय बैठक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई करीब दो घंटे लंबी बैठक के बाद भी समझौते पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया, जिससे दोनों देशों के बीच जारी तनाव और अनिश्चितता बरकरार है। व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सलाहकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। हालांकि बैठक समाप्त होने के बाद भी कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया और राष्ट्रपति बिना किसी अंतिम निष्कर्ष के वहां से रवाना हो गए।

ट्रंप की शर्तों पर अटका समझौता

अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल ऐसे समझौते को स्वीकार करेंगे जो उनकी निर्धारित लाल सीमाओं को पूरा करे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करे। बैठक से पहले ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि किसी भी संभावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए पूरी तरह खोलना और ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित न करने की गारंटी देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में लाने पर सहमत हो।

ईरान ने जताया कड़ा विरोध

ईरान पहले ही इन शर्तों का विरोध कर चुका है। तेहरान का मानना है कि अमेरिका एकतरफा शर्तें थोपने की कोशिश कर रहा है। इसी कारण दोनों देशों के बीच समझौते की राह अभी भी कठिन बनी हुई है। हाल के दिनों में यह चर्चा तेज थी कि दोनों पक्ष प्रारंभिक समझौते के करीब पहुंच चुके हैं और मौजूदा संघर्षविराम को 60 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

सैन्य दबाव भी जारी

कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ अमेरिका ने सैन्य दबाव बनाए रखने के संकेत भी दिए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि समझौता विफल होता है तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के पास पर्याप्त संसाधन और क्षमता मौजूद है तथा वाशिंगटन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए हर विकल्प खुला रखे हुए है।

तेहरान का भरोसा टूटा

ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने अमेरिका की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान अब केवल शब्दों और आश्वासनों पर भरोसा नहीं करता। उनका कहना है कि व्यवहारिक कदम उठाए बिना किसी भी समझौते पर आगे बढ़ना संभव नहीं है। वहीं पूर्व सैन्य अधिकारी मोहसिन रेजाई ने भी आरोप लगाया कि अमेरिका अभी भी दबाव और प्रतिबंधों की नीति पर कायम है, जिससे विश्वास बहाली की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

दुनिया की नजरें अगले कदम पर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच जल्द सहमति नहीं बनती है तो पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में वॉशिंगटन और तेहरान की अगली रणनीति पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।