2 करोड़ से बनीं पांच जेट्टी बदहाल:ददरीघाट पर नाले की ओर झुकी, रास्ता मिट्टी और गंदगी से पटा, प्रतीक्षालय का फर्श टूटा

Oct 31, 2026 - 16:40
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2 करोड़ से बनीं पांच जेट्टी बदहाल:ददरीघाट पर नाले की ओर झुकी, रास्ता मिट्टी और गंदगी से पटा, प्रतीक्षालय का फर्श टूटा
गाजीपुर में गंगा को जल परिवहन का प्रमुख माध्यम बनाने की योजना पर सरकारी अनदेखी भारी पड़ती दिख रही है। शहर के ददरीघाट पर बनाई गई जेट्टी बदहाल स्थिति में है। गंगा से करीब 50 मीटर दूर मिट्टी के ढेर पर पड़ी जेट्टी नाले की तरफ झुकी हुई है। इसी नाले से शहर का गंदा पानी गंगा में गिरता है। जेट्टी तक पहुंचने का रास्ता मिट्टी और गंदगी से पटा है। यात्रियों के उतरने-चढ़ने और जलयानों के ठहराव के लिए बनाई गई यह सुविधा अपने उद्देश्य से दूर नजर आ रही है। शनिवार दोपहर 12 बजे दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने मौके पर जाकर रियलिटी चेक किया। 5 जेट्टी पर खर्च हुए करीब दो करोड़ रुपए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने गाजीपुर के पोस्ता घाट, ददरीघाट, कलेक्टर घाट, जमानिया के बलुआ घाट और करंडा के चोचकपुर घाट पर पांच सामुदायिक जेट्टी बनवाई थीं। इन पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च हुए। यानी प्रत्येक जेट्टी की लागत लगभग 40 लाख रुपये रही। इनका उद्देश्य जलमार्ग से आने-जाने वाले यात्रियों को सुरक्षित उतरने-चढ़ने की सुविधा देना था। साथ ही किसानों, मछुआरों और व्यापारियों के सामान की ढुलाई आसान करना भी योजना में शामिल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जलमार्ग विकास की पहल के तहत राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर वाराणसी से हल्दिया तक 1390 किलोमीटर लंबे जलमार्ग को विकसित किया जा रहा है। गाजीपुर की जेट्टी भी इसी योजना का हिस्सा हैं। प्रतीक्षालय का फर्श टूटा, बैठने की व्यवस्था भी खराब यात्रियों की सुविधा के लिए ददरीघाट पर प्रतीक्षालय भी बनाया गया था। इसका उद्देश्य जलमार्ग से आने वाले यात्रियों और विदेशी पर्यटकों को बैठने और आराम करने की जगह देना था। लेकिन प्रतीक्षालय का फर्श टूटकर धंस चुका है। जेट्टी तक पहुंचने का रास्ता गंदगी से भरा है। बैठने की व्यवस्था भी उपयोग लायक नहीं रह गई है। ऐसे में जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई जेट्टी और प्रतीक्षालय यात्रियों को सुविधा नहीं दे पा रहे हैं। इनकी मौजूदा स्थिति सरकारी व्यवस्था की अनदेखी को उजागर कर रही है। निर्माण के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी पर सवाल जेट्टी निर्माण के बाद शुरुआती दो साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की बताई गई थी। इसके बाद संबंधित स्थानीय निकायों और विभागों को संचालन और देखरेख करनी थी। ऐसे में सवाल है कि जेट्टी और प्रतीक्षालय की नियमित सफाई, मरम्मत और उपयोग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस विभाग के पास है। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई इस सुविधा को मिट्टी, गंदगी और टूट-फूट के बीच छोड़ दिया गया है। जिम्मेदार विभागों को इसकी मरम्मत कराकर जल परिवहन के लिए उपयोगी बनाना चाहिए।

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