लखनऊ को दहलाने की साजिश! पाकिस्तान से आए हथियार, 3 लाख की सुपारी का खुलासा
लखनऊ में आतंकी साजिश रचने के आरोप में उत्तर प्रदेश एटीएस ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। जांच में पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क और संचालक राणा भाई से संपर्क होने की बात सामने आई है। संदिग्धों के पास से विदेशी पिस्तौल और 20 कारतूस बरामद किए गए हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 31 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आतंकी साजिश रचने के मामले में उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनमें तीन युवक और एक नाबालिग शामिल है। जांच एजेंसियों के अनुसार, चारों संदिग्ध पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी नेटवर्क के संचालक राणा भाई के संपर्क में थे। आरोप है कि उन्हें लखनऊ में पुलिस या सेना के किसी अधिकारी अथवा जवान की हत्या करने का जिम्मा सौंपा गया था। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि संदिग्धों को हथियार और कारतूस उपलब्ध कराए गए थे, जिन्हें पाकिस्तान से भेजे जाने की बात कही गई थी।
जांच के मुताबिक, चारों संदिग्ध 27 अक्टूबर को पंजाब के अमृतसर से दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की रात करीब 12 बजे लखनऊ पहुंचे थे। आरोप है कि पाकिस्तान में बैठे राणा भाई ने उन्हें लखनऊ आने के लिए लगभग 2,550 रुपये भेजे थे। इसके बाद रहने और खाने-पीने के खर्च के लिए भी अलग-अलग किस्तों में पैसे उपलब्ध कराए गए। संदिग्ध इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के माध्यम से लगातार अपने पाकिस्तानी संचालक के संपर्क में थे। लखनऊ पहुंचने के बाद उन्होंने रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस तरह शहर के महत्वपूर्ण स्थानों की जानकारी जुटाई जा रही थी।
पूछताछ में हथियारों की आपूर्ति को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। एटीएस के अनुसार, संदिग्धों को लखनऊ पहुंचने के बाद एक विदेशी पिस्तौल और 20 कारतूस उपलब्ध कराए गए थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि पाकिस्तान में बैठे राणा भाई ने उन्हें जानकारी दी थी कि ये हथियार और कारतूस पाकिस्तान से भेजे गए हैं। लखनऊ में नेटवर्क से जुड़े एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें हथियार उपलब्ध कराए थे। अब जांच एजेंसियां उस व्यक्ति की पहचान करने और हथियारों की आपूर्ति करने वाले पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।
जांच के दौरान संदिग्धों के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात भी सामने आई है। एटीएस को मोबाइल में संदिग्ध बातचीत, वीडियो और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की निगरानी से जुड़ी तस्वीरें मिली हैं। इसके अलावा विदेशी दूरभाष नंबरों से जुड़े आभासी नंबरों के माध्यम से व्हाट्सऐप चलाए जाने के संकेत भी मिले हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन माध्यमों से संवेदनशील स्थानों की जानकारी और उनकी स्थिति पाकिस्तान में बैठे संचालकों तक पहुंचाई जा रही थी।
एटीएस की जांच के अनुसार, संदिग्धों को किसी पुलिस या सेना के अधिकारी अथवा जवान की हत्या करने और पूरी घटना का वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे संचालक को भेजने का निर्देश दिया गया था। इस काम को पूरा करने के बदले उन्हें तीन लाख रुपये देने का कथित प्रस्ताव भी दिया गया था। आरोप है कि घटना को अंजाम देने के बाद उन्हें नेपाल भागने की योजना बताई गई थी, ताकि गिरफ्तारी से बच सकें। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां अभी इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं और साजिश से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि की जा रही है।
फिलहाल उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता पाकिस्तान में बैठे संचालक राणा भाई, हथियार उपलब्ध कराने वाले स्थानीय सहयोगियों और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटा है। एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि लखनऊ में किन-किन संवेदनशील स्थानों की निगरानी की गई थी और इस साजिश में कितने अन्य लोग शामिल हो सकते हैं। राजधानी में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की जांच कर रही हैं।
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