पीएम मोदी से अभिजीत दीपके के तीखे सवाल!

दिल्ली में चल रहे सीजेपी आंदोलन और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे हैं। वहीं शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सरकार से संवाद स्थापित करने की सलाह देते हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्र की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

पीएम मोदी से अभिजीत दीपके के तीखे सवाल!

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026

दिल्ली में चल रहे सीजेपी आंदोलन और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर देश की राजनीति लगातार गर्म बनी हुई है। संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद अब विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार को घेर रहे हैं। इस बीच सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई सीधे सवाल पूछते हुए सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, छात्रों के आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर सरकार की भूमिका पर जवाब मांगा है। दूसरी ओर विभिन्न विपक्षी दल भी सरकार पर संवाद से बचने का आरोप लगा रहे हैं।दिल्ली में चल रहा यह आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कई राजनीतिक दल भी खुलकर इसके समर्थन में सामने आ रहे हैं। संसद के भीतर और बाहर लगातार इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है और सरकार पर जवाबदेही का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री से पूछे कई सवाल

सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने सामाजिक माध्यम के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा कि सोनम वांगचुक कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते बातचीत करती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद सबसे प्रभावी समाधान होता है।दीपके ने यह भी सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस द्वारा कठोर कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें बलपूर्वक रोकने का प्रयास किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि लगातार विवादों के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सरकार के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों बने हुए हैं।

उद्धव ठाकरे ने सरकार को दी बातचीत की सलाह

शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आंदोलन को लेकर कहा कि यदि कोई समूह अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहा है तो सरकार का पहला दायित्व उनसे संवाद स्थापित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों के मन में कोई भ्रम है तो सरकार को बातचीत के माध्यम से उसे दूर करना चाहिए। ऐसा नहीं होने के कारण ही स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और सहमति ही सबसे बड़ा रास्ता होता है। यदि सरकार जनता की बात सुनने के बजाय केवल शक्ति का प्रयोग करती है तो इससे लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी विपक्ष जनता के मुद्दों को लेकर विरोध जारी रखेगा।

धर्मेंद्र प्रधान पर विपक्ष का हमला जारी

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश के छात्रों को जवाब और जवाबदेही दोनों चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि केवल बयान देने से छात्रों की चिंताओं का समाधान नहीं होगा।विपक्षी दलों का आरोप है कि परीक्षा व्यवस्था और छात्र हितों को लेकर सरकार गंभीर नहीं रही। इसी कारण पूरे देश में असंतोष का माहौल बना हुआ है। विपक्ष लगातार संसद के भीतर इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा और जवाबदेही की मांग कर रहा है।

सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर भी नजर

सोनम वांगचुक को न्यायालय के निर्देश के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी चिकित्सकीय निगरानी की जा रही है। केंद्रीय मंत्रियों द्वारा उनसे मुलाकात किए जाने के बाद भी आंदोलन और राजनीतिक बयानबाजी थमती नजर नहीं आ रही है। सरकार की ओर से बातचीत के संकेत मिलने के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं।आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही और सरकार तथा आंदोलनकारियों के बीच संभावित बातचीत पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी। यह आंदोलन अब केवल छात्र हितों तक सीमित नहीं रहकर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।