दिल्ली में फिर बुलडोजर का डर
दिल्ली के यमुना बाढ़ क्षेत्र यानी ओ जोन में आने वाली 94 कॉलोनियों पर संभावित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय निवासियों, भाजपा सांसदों और मंत्रियों ने कार्रवाई का विरोध किया है। दावा किया जा रहा है कि इस विवाद से लगभग 15 लाख परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 11 जून 2026
ओ जोन की कॉलोनियों में बढ़ी चिंता
दिल्ली के यमुना बाढ़ क्षेत्र यानी ओ जोन में स्थित कॉलोनियों और गांवों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। संभावित बुलडोजर कार्रवाई की आशंका ने लाखों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से बसे परिवारों के सामने अब अपने घरों को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
94 कॉलोनियों पर कार्रवाई की आशंका
जानकारी के अनुसार राजधानी में लगभग 94 कॉलोनियां ऐसी हैं जो ओ जोन विवाद के दायरे में बताई जा रही हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को डर है कि उनके घरों को अवैध घोषित कर हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। इस संभावना को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में विरोध और बैठकों का दौर जारी है।
भाजपा नेताओं ने जताई आपत्ति
पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी और दक्षिण दिल्ली से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया है कि उनके घरों पर बुलडोजर नहीं चलने दिया जाएगा। नेताओं का कहना है कि जिन कॉलोनियों को पहले नियमित किया जा चुका है, उन्हें दोबारा विवादित श्रेणी में डालना उचित नहीं है।
स्थानीय लोगों में दहशत
सोनिया विहार, ओल्ड उस्मानपुर, गढ़ी मांडू, जैतपुर और आसपास के इलाकों में ओ जोन संबंधी बोर्ड लगाए जाने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है। कई परिवारों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इन क्षेत्रों में रह रहे हैं और उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई से घर बनाए हैं।
विकास कार्य और विवाद
एक ओर संबंधित क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इन्हीं इलाकों में संभावित कार्रवाई की चर्चाओं ने लोगों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि क्षेत्र विकास योजनाओं का हिस्सा हैं तो फिर उन्हें हटाने की आशंका क्यों पैदा हो रही है।
15 लाख परिवारों पर असर की आशंका
राजनीतिक नेताओं का दावा है कि इस विवाद से सीधे तौर पर करीब 15 लाख परिवार प्रभावित हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि उनके पास बिजली, पानी और अन्य सरकारी सुविधाओं के वैध कनेक्शन हैं तथा वे वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं।
बाढ़ का भी है दूसरा पक्ष
इस पूरे विवाद का दूसरा पक्ष यमुना के बाढ़ क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। अतीत में कई बार यमुना के जलस्तर बढ़ने पर इन इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नियोजन और सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।